कोर्ट से बाहर सेटल नहीं होगा एनडी तिवारी का मामला
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हाईकोर्ट ने पितृत्व विवाद मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनडी तिवारी के उस आवेदन को खारिज कर दिया जिसमें विवाद को मध्यस्थता से सुलझाने की इजाजत मांगी थी।
तिवारी के पुत्र होने का दावा करने वाले रोहित शेखर व उनकी मां उज्जवला शर्मा ने मध्यस्थता पर अपनी आपत्ति जताई। न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ ने अपने फैसले में कहा कि मध्यस्थता तभी संभव है जब दोनों पक्ष उसके लिए तैयार हो।
अदालत ने कहा रोहित व उज्जवला शर्मा ने मध्यस्थता सुनवाई में शामिल होने से इंकार कर दिया है। अत: आवेदन को स्वीकार करने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने कहा इस मामले में अब अंतिम सुनवाई 21 अप्रैल से आरंभ होगी।
डीएनए टेस्ट से साबित हुआ था मामला
इससे पूर्व तिवारी ने अधिवक्ता ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल महसूस कर रहे है कि उसे दूसरे पक्ष से दोस्ताना तरीके से आपसी रजामंदी से बैठ कर मामले को सुलझा लेना चाहिए। अत: अदालत से आग्रह है अंतिम जिरह से पूर्व मामले को अध्यस्थता केंद्र में भेज दिया जाए।
वहीं दूसरी तरफ रोहित व उज्जवला के अधिवक्ता ने आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट आने के बाद मध्यस्थता केंद्र में मामला भेजने का सुझाव दिया था लेकिन तिवारी ने मना कर दिया। अब मध्यस्ता का सवाल ही नहीं उठता।
इसके अलावा विवाद पैसे या भूमि का नहीं है। डीएनए रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया है कि रोहित, तिवारी के पुत्र है और उन्हें यह स्वीकार कर लेना चाहिए। तिवारी ने यह भी तर्क रखा था कि उनकी कोई आय नहीं है बल्कि वे पेंशन पर गुजारा कर रहे है। उन पर अदालत ने जो ढ़ाई लाख का भारी जुर्माना किया है, उसे माफ किया जाए।
कोर्ट आने से बचते रहे हैं एनडी तिवारी
इस मामले में नियुक्त लोकल कमीश्नर के समक्ष रोहित शेखर व उनकी मां उज्जवला शर्मा से तिवारी के अधिवक्ता जिरह कर चुके है। तिवारी को कई बार कोर्ट में आने के मौके दिए गए लेकिन वे किसी न किसी बहाने पेश नहीं हुए।
आखिर लोकल कमीश्नर ने उनसे जिरह पूरी मानते हुए सुनवाई बंद कर दी थी। इसके बाद तिवारी ने पुन: अदालत में पक्ष रखने का मौका प्रदान करने का आग्रह किया। अदालत ने उन्हें 20 फरवरी को लोकल कमीश्नर के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था लेकिन वे पुन: पेश नहीं हुए।