‘कोई जिंदगी तीर्थ बनाकर जीता है, कोई तमाशा’, अंतिम प्रवचन राष्ट्र संत ने बताई थी जीने की कला
जिंदगी एक है, खुश होकर जियो। कोई जिंदगी को तीर्थ बनाकर जीता है। कोई जिंदगी को तमाशा बनाकर जीता है। यह बात राष्ट्र संत तरुण सागर ने करीब एक साल पहले अपने अंतिम प्रवचन में कही थी। वह लोगों को जीना सीखाकर चले गए।
बसंतपुर सैंथली गांव के तत्कालीन प्रधान कुंती त्यागी ने बताया कि 26 फरवरी 2017 को दो दिवसीय मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। प्रवचन से पहले दिन राष्ट्र संत तरुण सागर ने मुरादनगर स्थित यूआईएमटी कॉलेज के छात्रों को बुलाकर जिंदगी जीने व जिंदगी में सफलता पाने का गुरू मंत्र बताया था।
दूसरे दिन कार्यक्रम में गांववासियों को गृहस्थ की जानकारी दी। उधर, जैन समाज के स्वदेश जैन ने बताया कि करीब छह माह पहले क्रांतिकारी राष्ट्र संत मोदीनगर स्थित जैन मंदिर आए थे। इस दौरान महराज ने एक और बार प्रवचन करने का वादा किया था।
2014 में तरुण सागर तीर्थ की रखी गई नींव
तत्काल ग्राम प्रधान कुंती त्यागी ने बताया कि 2014 में वह ग्राम प्रधान थीं। महराज जी का उनके घर से घरेलू रिश्ता था। उस समय वह साढ़े 19 बीघे जमीन खरीद कर 26 जून 2017 को तरुण सागर तीर्थ की नींव रखी।
तीर्थ निर्माणाधीन है। तरुण ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील जैन ने बताया कि तीर्थ स्थल पर मुनिश्री तरुण सागर महाराज अंतिम बार 24 से 26 फरवरी में एक कार्यक्रम में प्रवचन देने आए थे। वह आठ बार मुरादनगर आ चुके हैं।