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अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि: 99.9% समय पालन से दुनिया भर में छाई नमो भारत, बर्लिन में भी दिखाई परिचालन क्षमता
Sun, 08 Nov 2026 06:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा
शनि पाथौली, नई दिल्ली
शनि पाथौली, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 08 Nov 2026 06:24 AM IST
सार
99.9 प्रतिशत समयपालन के साथ परिचालन करने वाली इस क्षेत्रीय रेल प्रणाली की तकनीक और यात्री सुविधाओं की जर्मनी से लेकर स्पेन तक सराहना हो रही है।
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नमो भारत ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली-एनसीआर में सफर का समय घटाने और सड़क पर यातायात का दबाव कम करने वाली नमो भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है। 99.9 प्रतिशत समयपालन के साथ परिचालन करने वाली इस क्षेत्रीय रेल प्रणाली की तकनीक और यात्री सुविधाओं की जर्मनी से लेकर स्पेन तक सराहना हो रही है।
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भारत की पहली क्षेत्रीय तीव्र परिवहन प्रणाली (आरआरटीएस) अब दुनिया के सामने आधुनिक शहरी और क्षेत्रीय परिवहन के एक नए मॉडल के रूप में पेश की जा रही है। स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित स्मार्ट सिटी एक्सपो वर्ल्ड कांग्रेस-2026 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) नमो भारत की उपलब्धियों और तकनीक का प्रदर्शन कर रहा है।
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यहां एक बार फिर नमो भारत आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस आयोजन में बताया जा रहा है कि किस तरह बड़े शहरों और उनके आसपास के क्षेत्रों के बीच तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन के लिए आधुनिक क्षेत्रीय रेल व्यवस्था विकसित की गई है। इसमें विशेष रूप से ट्रेनों के 99.9 प्रतिशत समयपालन को रेखांकित किया जा रहा है।
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4.8 करोड़ से अधिक यात्राएं, रोजाना एक लाख से ज्यादा यात्री : दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ को जोड़ने वाला 82.15 किलोमीटर लंबा नमो भारत कॉरिडोर अक्तूबर 2023 में चरणबद्ध तरीके से शुरू हुआ था। इस पर अब तक 4.8 करोड़ से अधिक यात्री यात्राएं दर्ज की जा चुकी हैं। रोजाना एक लाख से अधिक यात्री इस सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
दिल्ली के अलावा इन शहरों तक पहुंचेगी नमो भारत
एनसीआर में नमो भारत नेटवर्क के विस्तार के लिए दो प्रमुख कॉरिडोर को प्राथमिकता दी गई है। इनमें दिल्ली-पानीपत-करनाल और दिल्ली-गुरुग्राम-बावल-अलवर कॉरिडोर शामिल हैं। करीब 136.30 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर के जरिए सोनीपत, गन्नौर, समालखा, पानीपत और करनाल को दिल्ली से तेज क्षेत्रीय रेल संपर्क उपलब्ध कराने की योजना है। इससे इन शहरों से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों को परिवहन का एक वैकल्पिक साधन मिल सकेगा। दूसरा प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली-गुरुग्राम-बावल-अलवर है, जिसकी लंबाई करीब 196 किलोमीटर होगी। इसका मार्ग सराय काले खां से शुरू होकर मुनिरका, एयरोसिटी, गुरुग्राम, बावल और राजस्थान के एसएनबी क्षेत्र से होते हुए अलवर तक प्रस्तावित है।
बर्लिन में भी दिखाई परिचालन की ताकत
नमो भारत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए एनसीआरटीसी लगातार वैश्विक परिवहन मंचों पर भागीदारी कर रहा है। इस साल सितंबर में जर्मनी के बर्लिन में आयोजित इनोट्रांस अंतरराष्ट्रीय परिवहन प्रदर्शनी में भी इसकी तकनीक और परिचालन मॉडल प्रदर्शित किया गया था। बार्सिलोना में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न देशों की परिवहन एजेंसियों, शहरी नियोजकों और निवेशकों को भारतीय क्षेत्रीय रेल प्रणाली की कार्यक्षमता से परिचित कराया जा रहा है। इससे भारत में विकसित परिवहन तकनीक और परियोजना से जुड़े अनुभवों को दूसरे देशों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।
देश में 2,900 किलोमीटर तक फैलेगा नेटवर्क
नमो भारत के विस्तार को लेकर देश के प्रमुख शहरी समूहों में करीब 2,900 किलोमीटर लंबे संभावित क्षेत्रीय तीव्र परिवहन कॉरिडोर की पहचान की गई है। इनमें बेंगलुरु-मैसूरु-तुमकुरु-होसुर, चेन्नई-वेल्लोर-विल्लुपुरम-चेंगलपट्टू और हैदराबाद-वारंगल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा, गाजियाबाद से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (जेवर) तक नमो भारत कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी एनसीआरटीसी सरकार को सौंप चुका है।
सिग्नलिंग तकनीक में भी भारत की उपलब्धि
नमो भारत की एक बड़ी विशेषता इसमें इस्तेमाल की गई एलटीई आधारित ईटीसीएस हाइब्रिड लेवल-3 सिग्नलिंग तकनीक है। इसे वैश्विक स्तर पर पहली बार लागू किया गया है। इस सिग्नलिंग तकनीक को भी बार्सिलोना में प्रदर्शित किया जा रहा है।
नमो भारत की परिचालन व्यवस्था से रूबरू हुए रेलवे के प्रशिक्षु अधिकारी
भारतीय रेलवे वित्त प्रबंधन संस्थान (आईआरआईएफएम) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने नमो भारत परियोजना की तकनीक, बुनियादी ढांचे और परिचालन व्यवस्था को करीब से समझा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने 2022 ईओएल और 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया।
इस दौरान अधिकारियों को नमो भारत की कार्यप्रणाली और क्षेत्रीय परिवहन के आधुनिक स्वरूप से अवगत कराया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गतिशक्ति भवन में नमो भारत परियोजना पर आयोजित एक परिचयात्मक प्रस्तुति से हुई। इसमें प्रशिक्षु अधिकारियों को देश की पहली क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली (आरआरटीएस) की विशेषताओं, तकनीक और परियोजना के उद्देश्यों की जानकारी दी गई। इसके बाद प्रशिक्षु अधिकारियों ने एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल और निदेशक (वित्त) नमिता मेहरोत्रा के साथ संवाद किया।
इस दौरान उन्हें परियोजना के विकास, वित्तीय प्रबंधन और क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला। इसके बाद प्रशिक्षु अधिकारियों ने सराय काले खां स्थित नमो भारत स्टेशन का दौरा किया। यहां उन्हें स्टेशन की आधुनिक संरचना, यात्री सुविधाओं और विभिन्न परिवहन साधनों को एक-दूसरे से जोड़ने की व्यवस्था यानी बहु-माध्यमीय एकीकरण (मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन) के बारे में जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि किस तरह स्टेशन को अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़कर यात्रियों के आवागमन को अधिक सुगम बनाया गया है। प्रशिक्षु अधिकारियों ने सराय काले खां से आनंद विहार होते हुए मेरठ साउथ तक नमो भारत ट्रेन में सफर भी किया। इस यात्रा के दौरान उन्हें आधुनिक क्षेत्रीय परिवहन प्रणाली की परिचालन व्यवस्था और तकनीकी विशेषताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।