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भारत में मोबाइल से बढ़ रही है नपुंसकता

Mon, 28 Apr 2014 07:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 28 Apr 2014 07:01 PM IST
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Mobile and electronic gadgets emissions may cause infertility in men

मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गजट से युवाओं में नपुंसकता बढ़ रही है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया जा सका तो आने वाले दिनों में और भी समस्या बढ़ेगी। एम्स में इलाज के आने वाले 15 से 20 फीसदी युवक-युवतियों में यह समस्या देखी जा रही है।

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की गाइनोकोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. डॉ. अलका कृपलानी ने बताया कि मोबाइल, इंटरनेट, अधिक समय तक कंप्यूटर पर बैठने और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गजट केअधिक इस्तेमाल से नपुंसकता बढ़ रही है। मेट्रो शहर और आधुनिक जीवन शैली अपनाने वाले युवा-युवतियों में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है।

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माता-पिता बनने में हो रही है दिक्कत

Mobile and electronic gadgets emissions may cause infertility in men

इलेक्ट्रॉनिक गजट के अधिक इस्तेमाल से जहां युवतियों में अंडाणु की संख्या घट रही तो युवाओं में शुक्राणु की संख्या घट रही है। ऐसी स्थिति में माता-पिता दोनों बनना मुश्किल हो रहा है।

डॉ. कृपलानी ने बताया कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए युवतियों में किसी अन्य महिला से अंडाणु लेकर उसमे इंजेक्ट किया जाता है, तो युवाओं में किसी अन्य पुरुष से शुक्राणु लेकर इंजेक्ट किया जाता है। इसके बाद ये माता-पिता बन पाते हैं।
 
डॉ. कृपलानी ने बताया कि  आजकल युवतियां अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित होती हैं, इसलिए पारिवारिक जीवन से ज्यादा अपने नौकरी-पेशा जीवन को ज्यादा महत्व देती है। इस चक्कर में 35 को पार कर जाती है। इस उम्र में मां बनने में दिक्कत आनी शुरू हो जाती है। क्योंकि कई बार इस उम्र में भी अंडाणु बनना कम हो जाता है।

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