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इन 1.5 लाख में से 1 को भी नौकरी नहीं दिला सका आरक्षण

Tue, 04 Mar 2014 05:55 PM IST
कुंदन तिवारी/अमर उजाला, फरीदाबाद
कुंदन तिवारी/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 04 Mar 2014 05:55 PM IST
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Misuse of reservation in faridabad

फरीदाबाद सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय के बाहर आरक्षण विरोधी पार्टी के महासचिव दीपक गौड़ एवं उपाध्यक्ष श्वेता द्विवेदी द्वारा अनिश्चित कॉलीन अनशन छठे दिन भी जारी रहा।

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मंगलवार को पार्टी के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया भारत सरकार हर वर्ष 4-5 लाख करोड़ रुपये जातिगत आरक्षण एवं दलित उत्थान के नाम पर खर्च करती है।

जिसका सीधा अर्थ है कि हर साल एक करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये नगद दिया जा सकता है। देश में करीब कुल छह करोड़ गरीब परिवार हैं, यानि सिर्फ छह वर्ष तक देश के हर गरीब परिवार को 5 लाख रुपये दिए जा सकते हैं।
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जिससे वह सभी अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं और पूरे देश से गरीबी मिटाई जा सकती है। परन्तु 65 साल से लगातार दिए जा रहे जातिगत आरक्षण के बाद भी सिर्फ गरीबी और बेरोजगारी बढ़ती ही जा रही है। जो एक प्रकार से आरक्षण के नाम पर राजनीतिक पदों का खेल उजागर कर रही है।

धरने में शामिल होने आए ओल्ड फरीदाबाद झुग्गी प्रधान शिव सिंह के मुताबिक फरीदाबाद में करीब 1.5 लाख लोग झुग्गी झोंपड़ी या कच्चे मकानों में रहते हैं। जो दलित व पिछड़े वर्ग से आते हैं।


परन्तु पिछले 20 वर्ष में उनमें से किसी एक भी व्यक्ति को जातिगत आरक्षण से सरकारी नौकरी मिलना तो दूर कि बात है, उनके बच्चे अच्छे स्कूल में दाखिला तक नहीं मिल सका। हैरानी की बात यह है कि आरक्षण के नाम पर कागजी कार्रवाई तो हो रही है। लेकिन उनकी दशा को सुधारने का प्रयास तक नहीं किया जा रहा है।

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अगर आरक्षण के नाम पर इतना पैसा ही सरकार से मिल जाता तो शायद बच्चे को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाकर तालीम पूरी करा लेते और दो वक्त की रोटी अच्छी तरह से नसीब होती। उन्होंने कहा कि वह अपनी बस्ती में जाकर आरक्षण का पूर्ण जोर विरोध के लिए लोगों को जागरूक करेंगे। जिससे लोगों को समानता का अधिकार मिल सके।

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