फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Malaysian juvenile case involved in Tabligi Jamaat transferred to another board due to Shortage of judges

न्यायाधीशों की कमी के चलते तबलीगी जमात में शामिल मलेशियाई किशोर का मामला दूसरे बोर्ड में स्थानांतरित

Thu, 16 Jul 2020 05:26 PM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Thu, 16 Jul 2020 05:26 PM IST
विज्ञापन
Malaysian juvenile case involved in Tabligi Jamaat transferred to another board due to Shortage of judges
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

कोरोना वायरस के दौरान तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने के आरोपी मलेशियाई किशोर का मामला उच्च न्यायालय ने एक किशोर न्याय बोर्ड से दूसरे बोर्ड में स्थानांतरित कर दिया है।  किशोर न्याय बोर्ड-1 में न्यायाधीशों की कमी के कारण उच्च न्यायालय ने दूसरे बोर्ड में किशोर का मामला स्थानांतरित किया है।

विज्ञापन


60 मलयेशियाई तब्लीगी जमातियों को किया रिहा, सात-सात हजार का जुर्माना

अदालत ने अपराध स्वीकार करने व 7-7 हजार रुपये जुर्माना भरने के बाद 60 मलेशियाई नागरिकों को रिहा कर दिया। इन विदेशी नागरिकों को अदालत ने 7 जुलाई को जमानत प्रदान की थी। इन मलेशियाई नागरिकों पर कोविड-19 महामारी के दौरान निजामुद्दीन मरकज में आयोजित तब्लीगी जमात में शामिल होने, वीजा नियमों और सरकारी आदेश के उल्लंघन करने के आरोप थे।
विज्ञापन


साकेत जिला अदालत के महानगर दंडाधिकारी सिद्धार्थ मलिक ने 9 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से विदेशियों की ओर से कम सजा की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने आरोपियों के अपराध स्वीकार किए जाने के बाद उन्हें प्ली बार्गेनिंग (याचिका समझौता प्रक्रिया) के अंतर्गत मुक्त कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट में सुनवाई के दौरान विदेशी नागरिकों की ओर से पेश वकील एस हरि ने जिरह की। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों की याचिकाओं पर शिकायतकर्ता लाजपत नगर के उप संभागीय मेजिस्ट्रेट, लाजपत नगर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और निजामुद्दीन के निरीक्षक को कोई आपत्ति नहीं है। इस तथ्य पर गौर करते हुए अदालत ने इन आरोपी विदेशी नागरिकों को मुक्त कर दिया।


इन आरोपियों ने प्ली बार्गेनिंग याचिका दायर कर अपना अपराध स्वीकार करके अदालत से सजा कम करने का अनुरोध किया था। इसके तहत अधिकतम सात साल तक सजा वाले मामलों में ही प्ली बार्गेनिंग की अनुमति दी जाती है। बशर्ते अपराध के कारण पीड़ित की सामाजिक-आर्थिक स्थिति प्रभावित नहीं होती और अपराध महिला अथवा 14 साल से कम उम्र के बच्चे के प्रति न किया गया हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed