फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Life expectancy of cancer patients reduced by 17 years

Cancer: 17 साल घटी कैंसर के मरीजों की आयु, 45 साल के बजाय 28 वर्ष की उम्र में दिख रहे लक्षण

Sun, 11 Feb 2024 08:42 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 11 Feb 2024 08:42 AM IST
सार

कैंसर रोग के जो लक्षण करीब 15 साल पहले 45 साल की उम्र के मरीजों में दिखाई देते थे, वहीं लक्षण अब 28 साल की उम्र के लोगों में भी दिख रहे हैं। वहीं, देश की महिलाओं में सबसे ज्यादा स्तन कैंसर के मामले हैं। उसके बाद दूसरे नंबर पर सर्वाइकल कैंसर हैं।

विज्ञापन
Life expectancy of cancer patients reduced by 17 years
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

बदलते लाइफ स्टाइल, खानपान और पर्यावरण में हो रहे बदलाव सहित अन्य कारणों से कैंसर मरीजों की आयु पिछले 15 सालों में 17 साल तक घट गई है। कैंसर रोग के जो लक्षण करीब 15 साल पहले 45 साल की उम्र के मरीजों में दिखाई देते थे, वहीं लक्षण अब 28 साल की उम्र के लोगों में भी दिख रहे हैं। कैंसर पीड़ितों की उम्र घटने से कैंसर विशेषज्ञ भी परेशान हैं।

विज्ञापन

 
इन्हीं समस्याओं को लेकर देशभर के कैंसर विशेषज्ञ शनिवार को दिल्ली में आईओकोन 2024 कार्यक्रम में जुटे। इस दौरान पिछले 15 साल में कैंसर देखभाल में प्रगति और सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान बताया गया कि देश की महिलाओं में सबसे ज्यादा स्तन कैंसर के मामले हैं। उसके बाद दूसरे नंबर पर सर्वाइकल कैंसर हैं। इन दोनों बीमारियों से हर साल हजारों महिलाएं जान गवां रहीं हैं।
विज्ञापन


सर्वाइकल कैंसर को लेकर टीकाकरण की तैयारी शुरू हो गई है। ठीक इसी तरह से 25 साल के बाद महिलाओं में खुद ही स्तन की जांच के प्रति जागरूक बढ़ानी होगी। ऐसा करने पर इन कैंसर की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है। वहीं पुरुषों में हेड एंड नेक कैंसर सबसे ज्यादा हैं। इसके लिए तंबाकू जिम्मेदार है। जबकि दूसरे नंबर पर लंग्स कैंसर हैं। धूम्रपान इसका बड़ा कारण है। इन्हें रोकने के लिए जागरूकता के साथ सरकार को कड़े फैसले लेने होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


45 साल के बजाय 28 वर्ष की उम्र में दिख रहे लक्षण
डॉ. प्रिया बंसल का कहना है कि 25 साल की उम्र के बाद खुद के स्तन की जांच कर इस कैंसर को रोका जा सकता है। स्तन में दो एमएम के गांठ स्टेज एक और दो से पांच एमएम की गांठ स्टेज दो हो सकती है। यदि मरीज इन स्टेज में भी डॉक्टर के पास आ जाती है तो इलाज आसानी से हो सकता है। लेकिन जागरूकता के अभाव में महिलाएं एडवांस स्टेज में आती हैं। इस वजह से मौत के मामले काफी अधिक हैं।

5 % की दर से बढ़ रहे मरीज हर साल
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. शुभम गर्ग ने कहा कि मरीजों में कई तरह के कैंसर हैं। इनमें स्तन, सर्वाइकल कैंसर, हेड एंड नेक व लंग्स कैंसर सबसे ज्यादा हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण लंग्स कैंसर अब नॉन स्मोकर में भी दिखने लगा है। हर साल पांच फीसदी तक कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। इनकी रोकथाम के लिए जांच और इलाज को बढ़ाना होगा।

मेक इन इंडिया पर बढ़े शोध 
देश में कैंसर के इलाज व जांच के लिए मेक इन इंडिया मशीनों की संख्या बढ़ने लगी हैं। लेकिन इनकी सटीकता की जांच के लिए शोध को बढ़ावा देना होगा। इसके परिणाम आने में अभी लंबा समय लगेगा। ऐसे में मौजूदा एडवांस मशीन की संख्या भी बढ़ानी होगा। जिससे इलाज और जांच में तेजी आ सकें। डॉ. रावल का कहना है कि वह अमेरिकन और भारतीय मशीनों के परिणाम का तुलनात्मक अध्ययन कर रहे हैं।

सब्सिडी दे सरकार
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार को इलाज की मशीन लाने के लिए सब्सिडी देनी चाहिए। देशभर में अभी रेडिएशन की कुल 640 मशीन हैं, जबकि जनसंख्या के आधार पर यह 1400 होनी चाहिए। यह मशीनें विदेश से आती हैं और सरकार इनपर काफी भारी टैक्स लगाती है। इनके दाम को कम करने के लिए सरकार को छूट देना चाहिए ताकि मशीनों की संख्या बढ़े।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed