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फर्जी रसीदें और गबन: दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल पर कार्रवाई, उपराज्यपाल ने अभियोजन को दी मंजूरी

Wed, 18 Jun 2025 10:58 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: श्याम जी. Updated Wed, 18 Jun 2025 10:58 PM IST
सार

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा और कांस्टेबल खुशी राम के खिलाफ लाइसेंस नवीनीकरण में फर्जी रसीदें जारी कर गबन करने के मामले में अभियोजन को मंजूरी दी। जांच में सरकारी खजाने को लाखों का नुकसान और मिलीभगत के सबूत मिले।

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Lieutenant Governor approves prosecution against policemen for embezzlement and fraud
वीके सक्सेना - फोटो : एएनआई

विस्तार

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा और कांस्टेबल खुशी राम के खिलाफ गबन और फर्जीवाड़े के गंभीर मामले में अभियोजन की मंजूरी दी है। यह स्वीकृति दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 की धारा 197 के अंतर्गत दी गई है। दोनों कर्मियों पर एफआईआर संख्या 105/2018 के तहत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में मामला दर्ज है। यह मामला वर्ष 2016 से 2018 के बीच हथियार लाइसेंस, होटल, गेस्ट हाउस और प्रेस लाइसेंस के नवीनीकरण के दौरान वसूले गए शुल्कों में अनियमितता से संबंधित है।

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जांच में सामने आया है कि इन कर्मियों ने नकद में शुल्क वसूलने के बाद फर्जी रसीदें जारी कीं, जो सिस्टम-जनरेटेड नहीं थीं। ये लेनदेन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किए गए, जिससे सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि आर्म्स लाइसेंस रिन्युअल काउंटर नं. 2 से हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा की तैनाती के समय सबसे अधिक फर्जी रसीदें जारी की गईं। इससे दोनों कर्मियों के बीच मिलीभगत का संदेह मजबूत हुआ। साथ ही कंप्यूटर से कई महत्वपूर्ण फाइलें डिलीट करने और कागजी दस्तावेजों के गायब होने की पुष्टि भी जांच में आई है। फॉरेंसिक जांच और आर्थिक अपराध शाखा की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
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गृह विभाग ने भी माना है कि इन्होंने सरकारी सॉफ्टवेयर को दरकिनार करते हुए नकली रसीदें तैयार कीं और असली रसीदों वाले प्रिंटर का ही उपयोग किया। उपराज्यपाल ने अभियोजन की स्वीकृति के साथ-साथ गृह विभाग को यह निर्देश भी दिया है कि दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 140 के तहत भी अभियोजन की अनुमति के मामले की समीक्षा की जाए। साथ ही दोषी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।

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