Delhi: एलजी ने दिए 30 जून तक यमुना साफ करने के आदेश, सक्सेना बोले- 95 फीसदी सीवेज उपचार करना होगा सुनिश्चित
उपराज्यपाल ने यमुना की सफाई से जुड़े प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक की और दो टूक शब्दों में समय के भीतर काम करने के निर्देश दिए।
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उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शनिवार को सख्त आदेश दिए हैं कि सभी संबंधित एजेंसियां यमुना की सफाई का काम समयबद्ध तरीके से पूरा करें। जून के अंत तक यमुना में बहने वाले 95 प्रतिशत सीवेज के पानी का उपचार सुनिश्चित करना होगा। साथ ही 263 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइनें बिछानी होंगी। इससे 30 जून तक यमुना के प्रदूषण स्तर में ठोस सुधार दिखेगा। उपराज्यपाल ने इस काम में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त न करने की नसीहत दी।
उपराज्यपाल ने यमुना की सफाई से जुड़े प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक की और दो टूक शब्दों में समय के भीतर काम करने के निर्देश दिए। यमुना के कायाकल्प पर उच्चस्तरीय समिति (एचएलसी) की चौथी बैठक में आठ लक्ष्यों को पूरा करने के निर्देश जारी किए गए। इसमें सबसे ज्यादा जोर नालों की गंदगी साफ करने पर दिया गया। जून के आखिरी तक न्यूनतम 95 फीसदी सीवेज उपचार की क्षमता विकसित करनी होगी। इससे नालों में गिरने से पहले गंदगी साफ हो जाएगी। इससे नदी में गिरने वाले नालों के पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा।
बैठक में उपराज्यपाल ने कहा कि बेशक यमुना के बाढ़ क्षेत्र के पुनर्विकास का काम चल रहा है और नालों की गाद भी निकाली जा रही है। साथ ही, सीवेज शोधन संयंत्र भी बन रहे हैं। फिर भी जरूरी है कि सभी कामों को मिशन मोड में किया जाए। इस काम में लगी सभी एजेंसियों को तय समय में काम पूरा करना है। इस काम में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
समीक्षा बैठक में उपराज्यपाल को बताया गया कि नजफगढ़ नाले की सफाई का असर अब दिखने लगा है। इससे आईएसबीटी कश्मीरी गेट के पास यमुना के पानी की गुणवत्ता भी पहले की तुलना में बेहतर हुई है। यही जगह है, जहां नजफगढ़ नाला नदी में मिलता है। उपराज्यपाल ने जोर दिया कि अभी इस तरह काम करना है, जिससे गुणवत्ता ज्यादा बेहतर हो सके। उपराज्यपाल को बताया गया कि नजफगढ़ में गिरने वाले 44 नालों की पहचान की गई है। इसमें से 17 नालों की गंदगी का साफ किया जा रहा है। वहीं, अक्तूबर तक बाकी का काम पूरा हो जाएगा। सप्लीमेंट्री ड्रेन में गिरने वाले सभी नाले भी अक्तूबर तक साफ कर लिए जाएंगे।
अभी दिल्ली में 768 एमजीडी सीवेज पैदा होता है। इसका 75.5 फीसदी यानी 580 एमजीडी सीवेज की सफाई हो रही है। उच्चस्तरीय कमेटी का मानना है कि जून तक क्षमता 95 फीसदी तक हो जानी चाहिए, जबकि दिसंबर तक 814 एमजीडी क्षमता करने का लक्ष्य है। अगले साल जून तक इसे 864.5 एमजीडी तक ले जाया जाएगा। इसके लिए ओखला, दिल्ली गेट व सोनिया विहार में तीन नए एसटीपी बनने हैं। मौजूदा तीन एसटीपी को नए सिरे से तैयार करना है। वहीं, 40 छोटे-छोटे शोधन प्लांट लगेंगे। उच्चस्तरीय कमेटी इसकी निगरानी कर रही है। एक माह के भीतर इनके लिए जमीन का आवंटन कर दिया गया है, जबकि बीते आठ सालों से यह लंबित था।
बैठक में बताया गया कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र का 10 अलग-अलग प्रोजेक्ट से विकास हो रहा है। इसमें बांसेरा, असिता ईस्ट व अमृत बॉयो पार्क का काम पूरा हो गया है, जबकि असिता वेस्ट, कालिंदी बॉयोडायवर्सिटी पार्क, मयूर नेचर पार्क और यमुना वनस्थली का काम तयशुदा समय में पूरा कर लिया जाएगा।
नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा सहयोग से प्री-फैब्रिकेटेड विकेंद्रित सीवेज शोधन संयंत्र लगाए जा रहे हैं। वहीं, सेप्टेज ले जाने वाले 180 पंजीकृत वाहनों की अब जीपीएस ट्रैकिंग की जाएगी। इससे सीवेज का संग्रह और निपटान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
आठ लक्ष्य रखे गए
. सीवरेज का 100 फीसदी उपचार।
. यमुना में गिरने वाले सभी नालों में शोधित पानी का प्रवाह।
. अनधिकृत कॉलोनियों और जेजे क्लस्टर में सीवरेज नेटवर्क का निर्माण।
. औद्योगिक इलाकों से निकलने वाले पानी का प्रबंधन।
. सेप्टेज प्रबंधन।
. बाढ़ के मैदानों का जीर्णोद्धार और कायाकल्प।
. उपचारित अपशिष्ट जल का इस्तेमाल।
. नजफगढ़ झील का पर्यावरण प्रबंधन।