फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   LED screens and loudspeakers installed on Singhu border to spread voice of farmers

सिंघु बॉर्डर: दूर तक किसानों की आवाज पहुंचाने के लिए लगाए गए 10 किलोमीटर तक लाउडस्पीकर, एलईडी स्क्रीन

Tue, 05 Jan 2021 06:33 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 05 Jan 2021 06:33 AM IST
विज्ञापन
LED screens and loudspeakers installed on Singhu border to spread voice of farmers
सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसान - फोटो : amar ujala

कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध दर्ज कर रहे किसानों की आवाज दूर तक पहुंचाने के लिए सिंघु बॉर्डर पर एलईडी स्क्रीन और लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। आंदोलन के दौरान आपसी संवाद बनाए रखने के लिए वॉकी टॉकी का भी खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। आंदोलन में सूचना तंत्र को हाईटेक बनाने के लिए तमाम गैजेट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि आपसी संपर्क हमेशा बरकरार रहे।

विज्ञापन


आंदोलन के शुरुआती दौर से किसान नेता रोजाना समर्थकों को संबोधित कर रहे हैं। लंबी दूरी तक सड़क पर मौजूद समर्थकों तक किसान नेताओं की बात आसानी से पहुंच सके, इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा की प्रबंधन ने बदलाव किए। मंच के पास 8 गुना 10 फुट की एलईडी स्क्रीन लगाई गई। करीब 10 किलोमीटर के दायरे में बड़े स्पीकर लगाए गए ताकि मंच से दूर मौजूद लोगों तक भी नेताओं की बात सुन सकें।
विज्ञापन


आजाद किसान समिति, दोआबा के लखविंदर सिंह का कहना है कि आंदोलन स्थल पर लंगर, चिकित्सा शिविर, ट्रॉलियां, मंच हैं। सभी जरूरी गतिविधियों के साथ साथ लोगों को संबोधन सुनने का मौका मिले, इसलिए 150-200 मीटर की दूरी पर स्पीकर लगाए गए हैं। हमारी कोशिश है कि आंदोलन में सभी किसान समर्थकों तक नेताओं की बातें पहुंच सके, इसलिए यह व्यवस्था की गई है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कॉल ड्रॉप होने पर वॉकी टॉकी का सहारा
लोगों की संख्या काफी अधिक है, इसलिए सभी मंच के सामने मौजूद रहे ऐसा संभव नहीं है। ऐसे में माइक्रोफोन के जरिये वक्ताओं के संबोधन को दूर तक पहुंचाया जाता है। विरोध स्थल पर मोबाइल नेटवर्क को बेहतर करने सहित वॉकी टॉकी के जरिये एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। 


जसकरन सिंह ने कहा कि सिंघु बॉर्डर पर नेटवर्क की समस्या होती है। कॉल ड्रॉप की समस्या से बचने के लिए वॉकी टॉकी के जरिए आपस में एक दूसरे से संपर्क में रहते हैं। मंच, टेंट के अलावा आंदोलन स्थल की तमाम बुनियादी सुविधाओं के लिए एक दूसरे के बीच संवाद बनाए रखने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed