केजरीवाल-अन्ना की मुलाकात से क्यों आई आंदोलन में दरार
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व अन्ना हजारे की मुलाकात किसान आंदोलन में दरार डाल गई। केजरीवाल के आते ही जल पुरुष राजेंद्र सिंह, वामपंथी किसान नेता अतुल अंजान, कविता कृष्णनन व प्रशांत भूषण मंच से चले गए। इसके लिए अन्ना के विरोधाभासी बयानों को जिम्मेदार ठहराया गया। इसके कारण पलवल से चली पदयात्रा के संसद मार्ग पहुंचने से पहले सभा भंग कर दी गई।
यह आंदोलन दरअसल देश के सामाजिक और किसान संगठनों ने चलाया था। इसके लिए एकता परिषद के बैनर तले पलवल से किसानों की पदयात्रा भी निकली थी। अन्ना हजारे ने भी इसमें शामिल होने की सहमति दी थी। मंगलवार को मंच पर सामाजिक संगठनों के लोग जुटे थे। वहीं, अन्ना ने कहा था कि किसी नेता को मंच पर जगह नहीं मिलेगी। दोपहर बाद तीन बजे तक सब-कुछ ठीक रहा।
करीब तीन बजे केजरीवाल संसद मार्ग पहुंचे और आम लोगों के बीच बैठ गए। तभी एमडीएमके प्रमुख वाइको व मेधा पाटकर की अन्ना से बात हुई। थोड़ी देर बाद वाइको ने केजरीवाल को मंच पर बुलाया। थोड़ा विरोध के बीच जिस वक्त केजरीवाल मंच पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, माइक राजेंद्र सिंह के हाथ में था। लेकिन बदले घटनाक्रम का तनाव उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था।
अपनी बात खत्म करने के बाद राजेंद्र सिंह मंच से उतर गए। वहीं, अतुल अंजान, कविता कृष्णनन समेत दूसरे कई वामपंथी नेताओं ने भी आंदोलन से किनारा कर लिया। इतना ही नहीं, पलवल से निकली पदयात्रा के संसद मार्ग पहुंचने से पहले ही विसर्जित कर दी गई।
केजरीवाल के मंच पर आने पर क्या बोले अन्ना
अन्ना हजारे ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कहा था मंच पर कोई राजनेता नहीं आएगा। केजरीवाल ने हमसे बात की। उन्होंने आंदोलन में शामिल होने को कहा था। वह आकर भीड़ में बैठ गए। लेकिन वह दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। व्यक्ति के तौर पर नहीं, मुख्यमंत्री पद का सम्मान करते हुए उन्हें मंच पर जगह दी गई है।
हमने केजरीवाल को मंच पर बुलाने के विरोध में मंच छोड़ा। सोमवार रात अन्ना ने कहा कि मंच पर कोई नेता नहीं होगा। जबकि कई दलों के सांसदों ने आंदोलन से जुड़ने की पेशकश की थी। मंगलवार को अचानक अन्ना ने केजरीवाल को मंच पर बुला लिया।
वामपंथी नेता कहते हैं कि इससे साफ है कि अन्ना रात में कुछ और बोलते हैं और सुबह कुछ और करते हैं। अगर किसी राज्य के मुख्यमंत्री को बुलाना ही था तो उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे प्रदेशों के मुख्यमंत्री को भी बुलाया जा सकता था। जहां बड़ी तादात में किसान हैं।
सीढ़ियों से नहीं चढ़ सके केजरीवाल, हाथ पकड़कर खींचा
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अपने सभी विधायकों के साथ दोपहर बाद 2.50 बजे संसद मार्ग पहुंचे। केजरीवाल पहले मंच के सामने भीड़ में बैठ गए। थोड़ी देर बाद उन्हें मंच पर बुलाया गया, लेकिन केजरीवाल को मंच पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने सीढ़ियों पर ही रोक लिया।
उन्होंने केजरीवाल को मंच से आए बुलावे को भी अनसुना कर दिया। एक बार फिर केजरीवाल ने भीड़ की तरफ का रुख किया। तभी मंच पर मौजूद कुछ नेताओं ने केजरीवाल का हाथ पकड़कर ऊपर खींचा। इसके बाद केजरीवाल अपने गुरु अन्ना हजारे के बीच बैठ गए।
इस बीच दोनों में ज्यादा बातें नहीं हुईं। बतौर किसान प्रतिनिधि योगेंद्र यादव मंच पर थे। जबकि आम आदमी पार्टी विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी व अलका लांबा को मंच पर जाने से मना कर दिया गया।