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नहीं रद्द होगी कन्हैया की जमानत, 28 अप्रैल को होगी सुनवाई

Wed, 23 Mar 2016 06:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 23 Mar 2016 06:07 PM IST
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Kanhaiy's bail will not be cancel, next hearing on April 28
कन्हैया कुमार

जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारेबाजी मामले में आरोपी छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया को मिली अंतरिम जमानत रद्द करने के मुद्दे पर पहली बार उपराज्यपाल द्वारा नियुक्त विशेष वकील व दिल्ली सरकार के स्थाई अधिवक्ता एक मत हुए।

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दोनों ने कन्हैया की जमानत रद्द करने के लिए दायर याचिका पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि कन्हैया ने जमानत की शर्तो का उल्लंघन किया है या नहीं, लेकिन उनकी नजर में अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया।
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अदालत ने याचिका पर सवाल उठाते हुए सुनवाई 28 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने सुनवाई शुरू होते ही याची विनीत जिंदल के अधिवक्ता आरपी लूथरा से पूछा कि आखिर इस प्रकार की याचिका दायर करने में आपका लोकस क्या है। इस मामले में आप पक्ष नहीं है।
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याची ने कहा कि अगर कोई समाज को बांटने और प्रभावित करने की कोशिश करता है तो कोई भी उसके खिलाफ याचिका दायर कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार पहल नहीं करती तो देश का कोई भी नागरिक याचिका दाखिल कर सकता है।

याचिकाकर्ता ने कहा की कन्हैया ने जमानत की शर्तों का उलंघन किया है। कन्हैया जमानत पर छूटने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। कन्हैया ने कहा की कश्मीर में सैनिक महिलाओं के साथ बलात्कार करते है।

याची व दिल्ली सरकार के वकील में नोकझोंक

Kanhaiy's bail will not be cancel, next hearing on April 28
न्यायालय - फोटो : file photo

अदालत ने उनके तर्को पर सवाल उठाते हुए कहा कि आप जल्दी में क्यों है। अगर आपने शिकायत दर्ज की है और पुलिस केस को रजिस्टर नहीं करती तो आप निचली अदालत में जा सकते है।

याचिकाकर्ता ने दिल्ली सरकार पर सवाल उठाया कहा की राज्य सरकार ने जमानत रद्द करने को लेकर कोई अर्जी नहीं दाखिल की है, हो सकता है ये सब राजनीती दबाव से भी हो सकता है।

अदालत ने कहा राज्य सरकार और केंद्र सरकार इस मामले को देख रही होंगी। हमें नहीं लगता इस मामले में आपका भी कोई लोकस है। अदालत ने ये भी कहा आप न्यूज चैनल को लेकर कुछ मत बताइये। क्योंकि 2 दिन पहले ही एक कांस्टेबल की स्टोरी को लेकर माफीनामा चलाया था।

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार और याचिकाकर्ता के बीच नोकझोंक भी हुई। दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने याचिकाकर्ता के उस बयान पर आपत्ति जताई जिसमें लूथरा ने कहा की सब्र रखो केजरीवाल मत बनो।

इस पर राहुल मेहरा ने कहा की ये मांफी मांगे नहीं तो में भी इनको कुछ कहूँगा। अदालत ने बीच बचाव करते हुए याचिकाकर्ता को कहा की आप कोर्ट के सामने अपनी बातें रखे, बिना बात के कमेंट न करे।

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