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जानिए आखिर किसकी मध्यस्थता से टूटा केजरीवाल का धरना?
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 22 Jan 2014 10:47 AM IST
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल नजीब जंग से मिली अपील पर धरना समाप्त करने का ऐलान किया। अपील में ही मालवीय नगर थानाध्यक्ष और पहाड़गंज के पीसीआर इंचार्ज को छुट्टी पर भेजने तथा एन्क्वॉयरी तेज करने की बात लिखी गई थी।
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लेकिन गृहमंत्री, उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस से चल रही तनानती महज दो एसएचओ को छुट्टी पर भेजने से कैसे खत्म हुई? इसका जवाब है जेडीयू विधायक शोएब इकबाल और निर्दलीय विधायक रामवीर शौकीन की मध्यस्थता।
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तीन एसएचओ और दो एसीपी के निलंबन की मांग को लेकर अरविंद केजरीवाल 36 घंटे धरने पर बैठे रहे। उनका धरना खत्म कराने में जेडीयू विधायक शोएब इकबाल और निर्दलीय विधायक रामवीर शौकीन की अहम भूमिका बताई जा रही है।
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दोनों विधायक मंगलवार करीब तीन बजे धरना स्थल पर पहुंचे थे। उस वक्त शोएब ने बताया कि वे एक फार्मूला लेकर आए हैं। अरविंद केजरीवाल से बातचीत की और पौने पांच बजे के करीब वहां से लौटते वक्त कहा कि शाम तक हल निकल आएगा।
शोएब इकबाल ने कहा कि धरना आंदोलन से दिल्ली में माहौल खराब हो रहा था। केजरीवाल से बात की कि अड़े रहने की बजाय जांच होने तक मालवीय नगर एसएचओ और पहाड़गंज पीसीआर के दोषी अधिकारी को छुट्टी पर भेजने पर मान जाएं। केजरीवाल ने हां कही। फिर पुलिस आयुक्त से बातचीत की गई।
पुलिस आयुक्त ने विशेष आयुक्त (कानून व्यवस्था) दीपक मिश्रा की ड्यूटी लगाई। दीपक मिश्रा से मीटिंग हुई। उसमें एसएचओ और पीसीआर इंचार्ज को छुट्टी पर भेजने का तय हुआ। इस बीच संदेश उपराज्यपाल नजीब जंग के पास पहुंचा और वहां से अपील आ गई और केजरीवाल ने धरना खत्म करने का ऐलान कर दिया।
जेडीयू विधायक शोएब इकबाल का कहना है कि जब ‘आप’ सरकार बना लेते हैं तो कुंवारे लड़के पर जैसी जिम्मेदारी शादी करने के बाद आई, उसी तरह की जिम्मेदारी आ जाती है। बहुत कुछ सोचकर काम करना पड़ता है। मैंने अपने अनुभव के हिसाब से मध्यस्थता की है।