झंडे के धंधे के लिए तिरंगे का अपमान
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गुड़गांव में केंद्रीय गृह मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर शहर में धड़ल्ले से प्लास्टिक के झंडे बिक रहे हैं। देशभक्ति के जज्बे की निशानी झंडे के अपमान की चिंता न तो जिला प्रशासन को है और न ही देशभक्त बनने वाले लोगों को।
झंडे के धंधे के रूप में राष्ट्रीय अस्मिता को ताक पर रख दिया गया है। दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर शहर के चौक चौराहों पर झंडे की दुकानें सज चुकी हैं। दुकान व ऑफिस को सजाने के लिए प्लास्टिक के छोटे-छोटे झंडे लोग खरीद रहे हैं।
स्कूलों में होने वाले कार्यक्रम में शिरकत के लिए बच्चों के पास झंडा होना जरूरी है। इसके लिए बाजार में प्लास्टिक के छोटे झंडे पांच रुपये से लेकर 25 रुपये तक मौजूद हैं।
ये होता है नुकसान
सदर बाजार के दुकानदार पंकज का कहना है कि प्लास्टिक के झंडे बेचने है या नहीं, इस बारे में जानकारी नहीं है। अमूमन पिछले एक सप्ताह में हर दिन करीब सौ प्लास्टिक के झंडे बिक रहे हैं। 15 अगस्त तक इसकी मांग और बढ़ जाएगी। हालांकि जिला प्रशासन का दावा है कि प्लास्टिक के झंडे पर रोक के लिए आदेश जारी किया जा चुका है।
प्लास्टिक से बने झंडे कागज के समान जैविक रूप से अपघटय (बायो डिग्रेडेबल) नहीं होते। इस कारण यह लंबे समय तक नष्ट नहीं होते और वातावरण के लिए हानिकारक भी होते हैं। इसके अलावा प्लास्टिक से बने राष्ट्रीय ध्वज का सम्मानपूर्वक उचित निपटान सुनिश्चित करना भी एक समस्या है।
झंडे का होता है अपमान
सांस्कृतिक व स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के बाद बच्चे अक्सर प्लास्टिक के झंडे फेंक देते हैं। जो लोगों के पांव के नीचे पड़ता है। सफाई कर्मचारी झाड़ू लगाकर इसे इकट्ठा करते हैं। कई बार जला दिया जाता है तो कहीं कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है, जिससे राष्ट्र्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम की धारा-दो का उल्लंघन होता है। इसके तहत अब तीन साल की सजा होना तय है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्लास्टिक के तिरंगे का उपयोग करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके प्रयोग पर तीन वर्ष की कैद या जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेल-कूद समारोहों में प्लास्टिक के तिरंगे के उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। प्लास्टिक के तिरंगे का उपयोग राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है। भारतीय झंडा संहिता 2002 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।