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महंगाई का डबल अटैक: पेट्रोल-डीजल के चढ़ते भाव से रोटी, कपड़ा व मकान होगा महंगा

Thu, 08 Jul 2021 06:47 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 08 Jul 2021 06:47 PM IST
सार

पर्यटन, निर्माण पर तो असर दिखेगा, निजी वाहन ही नहीं, सार्वजनिक वाहन की कीमत भी बढ़ेगी। इसके साथ ही बिजली उपभोक्ताओं पर भी महंगाई की मार पड़ेगी, रसोई समेत सौंदर्य प्रसाधन भी महंगा हो जाएगा...

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Inflation double attack petrol diesel price rise will also increase bread cloth and house prices
महंगाई - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

पेट्रोल व डीजल की बढ़ती कीमतों का आम लोगों पर दूर तक असर पड़ेगा। इससे रोजमर्रा की जरूरतों के सामान महंगे होने तय हैं। साथ ही पर्यटन, कपड़ा, ब्यूटी प्रोडक्ट, किराना, निर्माण उद्योग, बिजली, उद्योग-धंधों पर भी इसकी मार पड़ेगी। बढ़ती महंगाई कोविड की वजह से चरमराई आर्थिक व्यवस्था को और भी बदहाल करेगी। सार्वजनिक वाहनों की सवारी भी महंगी हो जाएगी।
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दिल्ली ही नहीं सभी मेट्रो शहरों में पेट्रोल का भाव सौ रुपये के पार चला गया है। इससे हर वर्ग परेशानी के दौर से गुजर रहा है। निजी वाहन चलाना तो महंगा हो ही गया है अब इसका असर सार्वजनिक वाहनों पर भी पड़ना तय है। ढाबा में खाना भी महंगा हो जाए तो अचरज नहीं होगा। पेट्रोल-डीजल के भाव में बढ़ोत्तरी का असर रोटी, कपड़ा और मकान भी पड़ेगा। क्यों ट्रांस्पोर्ट महंगा होगा तो असर आने वाले समय में दिखेगा।
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कपड़े पर भी पड़ेगा असर
कपड़ा उद्योग पर भी पेट्रोल की कीमत बढने का असर दिख सकता है। कपड़ा मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि लुगदी से लेकर फिनिशिंग वर्क तक पेट्रोल की जरूरत होती है। इसके बाद तैयार कपड़े को एक जगह से दूसरे जगह भेजने का खर्च अलग होता है। दिल्ली मर्केन्टाइल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष श्रीभगवान बंसल का कहना है कि माल के कॉस्टिंग में पहले ही वृद्धि हो चुकी है। एक ट्रक से माल मंगाने या भेजने पर जब 70 रुपया लीटर पेट्रोल था तो करीब 60 हजार रुपया खर्च होता था। अब 70 हजार खर्च बैठेगा। इसका नुकसान आम आदमी को झेलना पड़ेगा।
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बिजली भी हो जाएगी महंगी
बिजली उत्पाद में भी पेट्रोल का इस्तेमाल होता है। बिजली उत्पाद कंपनियां बिजली की कीमत में फ्यूल कॉस्ट भी जोड़ती है। फ्यूल की ट्रकों से ढुलाई भी होती है। लिहाजा बिजली आपूर्ति करने वाली कंपनियां रेट बढ़ा सकती है और आम उपभोक्ताओं पर इसका भार डाला जा सकता है।

पर्यटन भी हो जाएगा महंगा
पेट्रोल की बढ़ी कीमत से निजी वाहन चलाना तो महंगा हो ही गया है अब कॉमर्शियल व्हीकल से चलना भी महंगा हो गया है। इसका असर पर्यटन उद्योग पर भी पड़ेगा। टूर एंड ट्रेवल से जुड़े कारोबारी व भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय प्रकाश जैन का कहना है पेट्रोल के भाव बढने से किराना के सामान महंगे तो होंगे ही दवाईयां भी महंगी हो जाएंगी। होटल में ठहरना, खाना और वहां तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल में आने वाले कॉमर्शियल वाहन का चार्ज बढ़ जाएगा। कुल मिलाकर पर्यटन करने वालों पर 20-25 प्रतिशत अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।

सब्जियों व फल पर भी दिखेगा असर
आजादपुर मंडी में आने वाली सब्जियों व फलों पर भी और अधिक असर देखने को मिलेगा। अभी से ही सब चीजों का किराया बढ़ गया है। प्याज मंडी में 20 रुपये से 24 रुपये प्रतिकिलो है जबकि इस मौसम में 8 रुपये इस मौसम में बिकता था। आलू के भाव भी तेज हो गया है। पोटैटो एंड अनियन मर्चेंट एसोसिएशन के महासचिव राजेंद्र शर्मा का कहना है कि आलू-प्याज समेत अन्य सब्जियों का भाव 10-20 प्रतिशत बढ़ गया है। कोरोना में खपत कम है नहीं तो और अधिक बढ़ जाता। कॉमर्शियल व्हीकल पर किराए बढ़ गए है। जहां बिजली नहीं मिलती वहां किसानों को डीजल के सहारे खेती करनी पड़ती है। किसानों की लागत फसल उपजाने में बढ़ जाती है। लिहाजा रेट बढ़ाना तय है। 

पेट्रोल-डीजल को जीएसटी दायरे में लाए केंद्र सरकार:सीटीआई
पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दामों से आम आदमी ही नहीं बल्कि व्यापारी वर्ग भी परेशान है। व्यापारियों ने भी पेट्रोल -डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ( सीटीआई ) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन से यह सवाल किया है कि आखिर क्या वजह है कि सरकार हर चीज पर तो जीएसटी लगाने के पक्ष में है लेकिन पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाती है।


सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल व अध्यक्ष सुभाष खंडेलवाल का कहना है कि पूरे देश में तेल के दामों की कीमत आसमान छू रही है। हर वर्ग के व्यक्ति को परेशानी झेलनी पड़ रही है। तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से रोज मर्रा की चीजों की कीमतें भी महंगी हो जाएंगी। कोरोना के बाद से लोगों ने अपने व्यक्तिगत वाहनों का ज्यादा उपयोग करना शुरू कर दिया है जिससे लोगों का आर्थिक बजट बिगड़ गया है। माल भाड़ा और ट्रान्सपोर्टेशन महंगा होने से महंगाई भी बढती जा रही है। गोयल ने कहा कि हमने सरकार को पहला सुझाव दिया है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अधिकतम लक्जरी स्लैब 28 प्रतिशत में रखा जाए। दूसरा सुझाव है कि जिस तरह रूपये प्रति लीटर के हिसाब से एक्साइज ड्यूटी लगती है उसी तरह सरकार पेट्रोल पर प्रति लीटर 18 रूपये सेंट्रल और प्रति लीटर 18 रूपये स्टेट लगा दे। इससे पेट्रोल की कीमत डीलर कमीशन मिलाकर 80.22 रूपये हो जाएगी।

. दिल्ली में पेट्रोल की डीलर प्राइज करीब 40.62 रूपये प्रति लीटर।
. सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी-32.90 रूपये प्रति लीटर
. प्रतिलीटर वैट दर 23.13 रुपये लीटर।
. डीलर कमीशन 3.60 रूपये प्रति लीटर
. पेट्रोल पर 56.03 रूपये प्रति लीटर टैक्स लग रहा है।

. डीजल की डीलर प्राइज 42.39 रूपये प्रति लीटर है
. एक्साइज ड्यूटी 31.80 रूपये प्रति लीटर है
. वैट शुल्क 12.85 रूपये प्रति लीटर है
. डीलर कमीशन 2.53 रूपये प्रति लीटर है
. डीजल पर 44.65 रूपये प्रति लीटर टैक्स लग रहा है
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