टैंकर घोटाले के मामले में दिल्ली सीएम केजरीवाल से हो सकती है पूछताछ
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किराये का टैंकर लगवाने में जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एसीबी मुखिया ने जांच आगे बढ़ाने और जहां-जहां फाइल रुकी, उनसे पूछताछ करने की बात कही है। ऐसे में इस मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से पूछताछ की संभावना बढ़ गई है।
क्योंकि केजरीवाल पर अगस्त, 2015 से जल मंत्री कपिल मिश्रा की चिट्ठी और रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज करवाने या एसीबी-सीबीआई को मामला भेजने में देरी के आरोप हैं। इस संबंध में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने भी एसीबी को चिट्ठी भेजी है।
टैंकर किराये पर लेने का फैसला दिसंबर, 2010 का है, जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थीं। शिकायत मिलने पर आम आदमी पार्टी की सरकार ने कमेटी बनाई तो फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट लटकाने के लिए नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को भी जांच के दायरे में लाने के लिए एक चिट्ठी एसीबी को भेज दी। इसके बाद एसीबी मुखिया ने जांच आगे बढ़ाने और जहां-जहां फाइल रुकी, उनसे पूछताछ करने की बात कहकर मामले को और तूल दे दिया है।
किराये के टैंकर में क्या है घोटाला
इस बीच करीब 400 करोड़ के टैंकर घोटाले में वर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, जल मंत्री कपिल मिश्रा, नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। अरविंद केजरीवाल इसके लिए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहे हैं तो शीला दीक्षित ने कहा है कि टैंकर किराये पर लेने का फैसला अकेले नहीं लिया।
भाजपा के नेता भी शामिल थे और आम आदमी पार्टी उस समय होती तो इनके सदस्य भी शामिल होते। इस बीच जल मंत्री कपिल मिश्रा ने शीला दीक्षित के खिलाफ पुरानी तीन एफआईआर पर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की तरफ से कार्रवाई नहीं करने को लेकर सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक लड़ाई यहां तक बढ़ी कि नेता प्रतिपक्ष ने टैंकर का टेंडर रद्द करने तक की मांग रख दी।
किराये के टैंकर में क्या है घोटाला
टैंकर घोटाला वर्ष 2011-12 में सामने आया था। जिन इलाकों में पाइप से पानी नहीं पहुंच रहा था, वहां पानी पहुंचाने के लिए स्टील के 450 टैंकर किराये पर लिए जाने थे। पहले इसका टेंडर 2010 में हुआ। टेंडर की लागत 50.98 करोड़ रुपये थी। फिर डेढ़ साल में चार बार टेंडर रद्द किए गए। अंतिम टेंडर दिसंबर, 2011 में जिसमें इसकी लागत बढ़ गई। कुल मिलाकर घोटाले में 360.55 करोड़ रुपये सरकारी खजाने के नुकसान का जिक्र है। इसमें मेसर्स डीआईएमटीएस को बिना बोली के सलाहकार बनाए जाने से भी 36.59 करोड़ रुपये नुकसान का हुआ है।
टैंकर लेने के फैसले में भाजपा भी शामिल: शीला
बतौर जल बोर्ड अध्यक्ष रहते किराए का टैंकर लेने में गड़बड़ी के आरोप पर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बृहस्पतिवार को कहा है कि यह फैसला सामूहिक था और इसमें नियमों का पूरी तरह से पालन किया गया है। अब आरोप लग रहे हैं। उस वक्त तो कोई आरोप नहीं लगे थे। फैसले में जल बोर्ड के सीईओ, उपाध्यक्ष, सदस्य, एमसीडी और भाजपा के सदस्य भी शामिल थे।
आम आदमी पार्टी उस समय होती तो उसके सदस्य भी शामिल होते। पत्रकारों के पूछने पर कि कपिल मिश्रा ने आरोप लगाए हैं? इस पर दीक्षित ने कहा-कौन है मिश्रा, मुझे नहीं मालूम। जब वक्त आएगा मैं जवाब दूंगी। जो आरोप हैं, उसे मेरे पास आने दीजिए, पहले देख तो लूं कि कह क्या रहे हैं।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया है कि टैंकर घोटाले के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित गलतबयानी करके लोगों को गुमराह कर रही हैं। यह कार्य उनके चहेते ठेकेदारों को सौंपा गया था और उस समय जल बोर्ड में भाजपा का एक भी सदस्य नहीं था।
गुप्ता ने शीला दीक्षित के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि बोर्ड में भाजपा का सदस्य शामिल होता तो वह घोटालों का विरोध करता। उन्होंने बताया कि कैग और केंद्रीय सतर्कता आयोग ने टेंडर देने को दिशा निर्देशों का खुला उल्लंघन बताया था, जिसके तहत सरकारी खजाने को 400 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा था।