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आईजीआई : पियर-सी से तेज होगी बोर्डिंग, ट्रांजिट यात्रियों को फायदा
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टी-3 पर तैयार पियर-सी को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए किया जाएगा शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईजीआई एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए राहत की खबर है। आने वाले सप्ताह में टर्मिनल-3 (टी-3) पर तैयार पियर-सी को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए शुरू किया जाएगा। इसके लिए जरूरी मंजूरियां जल्द मिलने की संभावना है।
पियर-सी के शुरू होने के साथ ही टी-3 पर तीन पियर ए, बी और सी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए उपयोग में लाए जाएंगे, जबकि पियर-डी केवल घरेलू उड़ानों के लिए रहेगा। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को कम भीड़, तेज बोर्डिंग और बेहतर फ्लाइट मैनेजमेंट का लाभ मिलेगा। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा ट्रांजिट यात्रियों को होगा।
एयरपोर्ट पर एयरसाइड ट्रांसफर सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिससे यात्री बिना बाहर निकले ही एक फ्लाइट से दूसरी फ्लाइट तक आसानी से पहुंच सकेंगे। बस सेवा के जरिए यह सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने का जोखिम कम होगा। बता दें कि हवाई अड्डे के पियर-वे लंबे काॅरिडोरनुमा ढांचे होते हैं, जो मुख्य इमारत से बाहर होते हैं। यहां विमान खड़े होते हैं और यात्री एयरोब्रिज के जरिए सीधे विमान में सवार होते हैं।
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2028 तक पूरा होगा पियर-ई का काम
फिलहाल टी-3 रोजाना लगभग 1.05 लाख यात्रियों को संभाल रहा है, जिनमें 60 हजार अंतरराष्ट्रीय और 45 हजार घरेलू यात्री शामिल हैं। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए यह विस्तार जरूरी माना जा रहा है। इसके अलावा पियर-ई का निर्माण कार्य भी जारी है, जो 2028 तक पूरा होगा। इससे टी-3 की क्षमता में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि होगी। टर्मिनल-1 और टर्मिनल-2 को घरेलू उड़ानों के लिए विकसित किया जा रहा है, जिससे टी-3 को पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय हब के रूप में स्थापित किया जा सके।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईजीआई एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए राहत की खबर है। आने वाले सप्ताह में टर्मिनल-3 (टी-3) पर तैयार पियर-सी को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए शुरू किया जाएगा। इसके लिए जरूरी मंजूरियां जल्द मिलने की संभावना है।
पियर-सी के शुरू होने के साथ ही टी-3 पर तीन पियर ए, बी और सी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए उपयोग में लाए जाएंगे, जबकि पियर-डी केवल घरेलू उड़ानों के लिए रहेगा। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को कम भीड़, तेज बोर्डिंग और बेहतर फ्लाइट मैनेजमेंट का लाभ मिलेगा। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा ट्रांजिट यात्रियों को होगा।
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एयरपोर्ट पर एयरसाइड ट्रांसफर सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिससे यात्री बिना बाहर निकले ही एक फ्लाइट से दूसरी फ्लाइट तक आसानी से पहुंच सकेंगे। बस सेवा के जरिए यह सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने का जोखिम कम होगा। बता दें कि हवाई अड्डे के पियर-वे लंबे काॅरिडोरनुमा ढांचे होते हैं, जो मुख्य इमारत से बाहर होते हैं। यहां विमान खड़े होते हैं और यात्री एयरोब्रिज के जरिए सीधे विमान में सवार होते हैं।
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2028 तक पूरा होगा पियर-ई का काम
फिलहाल टी-3 रोजाना लगभग 1.05 लाख यात्रियों को संभाल रहा है, जिनमें 60 हजार अंतरराष्ट्रीय और 45 हजार घरेलू यात्री शामिल हैं। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए यह विस्तार जरूरी माना जा रहा है। इसके अलावा पियर-ई का निर्माण कार्य भी जारी है, जो 2028 तक पूरा होगा। इससे टी-3 की क्षमता में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि होगी। टर्मिनल-1 और टर्मिनल-2 को घरेलू उड़ानों के लिए विकसित किया जा रहा है, जिससे टी-3 को पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय हब के रूप में स्थापित किया जा सके।