दंगा पीड़ितों को नौकरी नहीं मिली तो इस्तीफा देंगे सिरसा
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दिल्ली विधानसभा में भाजपा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने सिख दंगा मामले में शुक्रवार को दिल्ली सरकार को बड़ी चेतावनी दे दी। बकौल सिरसा, दो महीने में दिल्ली सरकार दंगा पीड़ितों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी व मकान पर मालिकाना हक नहीं देती तो वह विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे। साथ ही, उन्होंने आप को कांग्रेस के साथ कोई समझौता न करने नसीहत भी दी।
सिख दंगा मामले पर विधानसभा में चर्चा के दौरान मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि 1984 की तत्कालीन सरकार ने न सिर्फ सिखों को मारा, बल्कि मारने का तरीका भी पहले से तय कर रखा था। सिरसा ने आरोप लगाया कि इसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार थी। उन्होंने कहा कि 34 साल बाद पीड़ितों को इंसाफ मिलना शुरू हुआ है।
कांग्रेस ने दंगा पीड़ितों के लिए कॉलोनी ऐसी जगहों पर बसाईं, जहां उसके नेताओं का वर्चस्व था। बाद में पीड़ितों को शांत रखने के लिए डराया-धमकाया भी गया। कांग्रेस को सिख दंगों का दोषी बताते हुए उन्होंने सदन से अपील की कि उसके साथ किसी भी दल को कोई संबंध नहीं रखना चाहिए।
दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सिरसा ने कहा कि बीते चार साल में उसने कोई वायदा पूरा नहीं किया है। इसके लिए बीते दो साल में उन्होंने चार बार मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं। सिरसा ने सदन में मांग रखी कि सरकार हर पीड़ित परिवार के कम से कम एक सदस्य को नौकरी दे। साथ ही विधवा कालोनी में पीड़ितों के घरों को फ्री होल्ड करके मालिकाना हक दिलाए।
उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अपील की कि वह दंगा पीड़ितों के हक में सरकार को हिदायत दें। साथ ही चेतावनी दी कि विधायक के तौर पर अगर वह दंगा पीड़ितों के लिए काम नहीं करा सकते तो विधानसभा में रहने में कोई शौक नहीं है। दो महीने के भीतर सरकार ने दोनों काम पूरे नहीं किए तो वह विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे।
आप के जगदीप सिंह ने भी बयां किया दर्द
विधानसभा में हरि नगर से विधायक जगदीप सिंह ने भी अपना दर्द बयां किया। दंगों के दौरान उनके पिता की हत्या कर दी गई थी। बकौल जगदीप, 1984 का कत्लेआम उनके जेहन में आज भी ताजा है। 34 साल बाद भी कौम को इंसाफ नहीं मिल सका है। इस बीच, सिख दंगों पर अलग-अलग कई आयोग ने रिपोर्ट दी, लेकिन इंसाफ नहीं मिला। जगदीप सिंह ने बताया कि दंगों के दौरान वह 13-14 साल के थे। वे अपने पिता के कपड़ों को देखकर उनकी शिनाख्त कर सके थे। चर्चा के दौरान उन्होंने अकाली दल पर भी कई आरोप लगाए। साथ ही, भाजपा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा से अकाली दल से इस्तीफा देने की मांग की।
आकस्मिक निधि बढ़ाई गई
दिल्ली सरकार ने आकस्मिक निधि की रकम बढ़ा दी है। 10 करोड़ की जगह इसे 100 करोड़ रुपये करने का दिल्ली सरकार का संशोधन प्रस्ताव सदन ने पास कर दिया। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि आकस्मिक निधि का इस्तेमाल किसी भी आपात स्थिति में सरकार करती है। इस लिहाज से सालों पहले तय 10 करोड़ की राशि कम पड़ रही है। दिल्ली विधानसभा ने ध्वनि मत से संशोधन पारित कर दिया।
विपक्ष ने किया वॉकआउट
सत्र की शुरुआत में ही विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। विपक्ष की मांग थी कि दिल्ली सरकार चौथे वित्त आयोग की रिपोर्ट लागू करे। आयोग की सिफारिशों के अनुसार निगमों को रकम का आवंटन हो। विपक्ष की मांग को नजरअंदाज करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही शुरू करने की व्यवस्था दी। इससे नाराज नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता, ओपी शर्मा, जगदीश प्रधान ने सदन से वॉकआउट किया। भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार की कोशिश भाजपा शासित तीनों नगर निगमों को आर्थिक रूप से कमजोर रखने की है।
तीन जनवरी को होगी सीलिंग पर चर्चा
दिल्ली विधानसभा को दो जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने बताया कि सदन में अभी सीलिंग पर चर्चा होनी बाकी है। इसमें कई सदस्यों ने अपनी बात रखने की मांग की है। इस चर्चा में दो-ढाई घंटे का वक्त लगेगा। तीन जनवरी को इस मसले पर चर्चा होगी।