ऑड-ईवन को मिली NGT की मंजूरी, दोपहिया वाहनों को नहीं मिली छूट
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार को ऑड-ईवन लागू करने की मंजूरी दे दी है यानी 13 से 17 नवंबर तक ऑड-ईवन लागू होगा। हालांकि एनजीटी ने इसके लिए कुछ शर्तें रखी थीं जिसके अनुसार ही यह स्कीम लागू की जा रही है।
#FLASH: National Green Tribunal gives nod to the #OddEven scheme. #Delhi pic.twitter.com/zfL3204gh9
— ANI (@ANI) November 11, 2017विज्ञापन
वहीं इससे पहले सुनवाई शुरू करते हुए एनजीटी ने कड़ा रुख अख्तियार किया। एनजीटी ने एक बार फिर दिल्ली सरकार के वकील तरुणवीर केहर से ऑड-ईवन को लागू करने के पीछे की वजह पूछी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने कहा कि पहले जब स्थिति खराब थी तो इसे क्यों नहीं लागू किया, अब क्यों कर रहे हैं जब हालात सामान्य हो गए हैं।
इसके साथ ही एनजीटी ने दिल्ली सरकार से वो चिट्ठी दिखाने को कहा जिसके आधार पर ऑड-ईवन लागू किया जा रहा है। एनजीटी ने ये भी पूछा कि क्या आपने एलजी से इस बारे में अनुमति ली है। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार को ये भी बताने को कहा कि आखिर एक इंसान दिन में कितनी बार सांस लेता है।
कोर्ट ने ये भी कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) ने दिल्ली सरकार को पहले ही इस भयावह स्थिति के बारे में मौखिक रूप से अवगत करा दिया था लेकिन सरकार ने इससे इनकार कर दिया।
एनजीटी ने केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा कि वो एक बड़े शहर का नाम बताएं जिसका पीएम 10 लेवल 100 से कम है। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार उसके उसके धैर्य की परीक्षा ना लें।
आगे बोलते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि आंकड़े दिखाते हैं कि बारिश से प्रदूषण के स्तर में कमी आती है तो फिर कृत्रिम बारिश क्यों नहीं करवाई गई? अब जब एनजीटी ने कहा है तो पानी का छिड़काव करवाया जा रहा है।
NGT asks Delhi Government the rationale behind applying the odd even scheme, and why it wasn't applied when the air quality situation was worse
— ANI (@ANI) November 11, 2017
NGT asks Delhi government to show the letter on basis of which this decision was taken, and whether the LG's approval was taken for the same. NGT asked the Delhi government to state how many times does a person breathe in a day #OddEven
— ANI (@ANI) November 11, 2017
Central Pollution Control Board submitted that they had warned the Delhi government orally in advance about the impending problem, which the Delhi government denied.
— ANI (@ANI) November 11, 2017
सरकार ने ईपीएम के कहने पर ऑड-ईवन किया लागू
राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषित हवा सुधारने के लिए सम-विषम योजना 13 नवंबर से लागू होगी या नहीं, इस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में सुनवाई जारी है जिसके बाद ही कुछ तय होगा। शुक्रवार को एनजीटी ने कहा कि योजना को लागू करने की तब तक इजाजत नहीं दी जा सकती जब तक दिल्ली सरकार यह साबित न कर दे कि सड़क पर वाहनों को कम करने से क्या फायदा है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने तल्खी के साथ पूछा है कि किस बुनियाद पर दिल्ली सरकार ने इसे 13 से 17 नवंबर तक लागू करने की घोषणा की है। पीठ ने कहा है कि आखिर दोपहिया वाहनों को सम-विषम से बाहर क्यों रखा है।
महिला ड्राइवर समेत अन्य छूट के प्रावधान के पीछे का मकसद क्या है? पीठ ने कहा कि जब मन करे तब सम-विषम योजना का ऐलान कर दिया जाए ऐसा नहीं हो सकता। आपको बताना होगा कि इसकी बुनियाद क्या है?
दिल्ली सरकार ने कहा कि उन्होंने पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) के कहने पर सम-विषम की घोषणा की है। वहीं पीठ ने कहा कि ईपीसीए ने सिर्फ सम-विषम के लिए नहीं कहा। बाकी काम का क्या हुआ।
जब राष्ट्रीय राजधानी में पर्टिकुलेट मैटर 2.5 अपने सामान्य स्तर के बजाय 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर या उससे ज्यादा लगातार 48 घंटे रहेगी तभी यह स्कीम तत्काल लागू की जानी चाहिए।
13 तारीख से सम-विषम लागू करने के पीछे क्या वजह है। पीठ ने कहा कि हम आपकी योजना पर पाबंदी नहीं लगाना चाहते बल्कि अवैज्ञानिक, असक्षम और अपर्याप्त योजना को लागू नहीं होने देंगे।
सम-विषम के दौरान डीटीपी, क्लस्टर बसों में मुफ्त सफर
दिल्ली सरकार ने पांच दिन के सम-विषम फार्मूले के दौरान डीटीसी और क्लस्टर बसों में लोगों को मुफ्त यात्रा सुविधा देने का ऐलान किया है। दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि सम-विषम के दौरान लोगों को ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करने को प्रोत्साहित करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
देश में वाराणसी सबसे प्रदूषित शहर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में हवा का आपातकाल जारी है। हवा में पर्टिकुलेट मैटर 2.5 का स्तर 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ऊपर जबकि पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 10 का स्तर 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ऊपर बना हुआ है।
वहीं शुक्रवार को यूपी का वाराणसी वायु प्रदूषण के मामले में देश का सबसे प्रदूषित शहर रिकॉर्ड किया गया है। आगरा, लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे शहरों में हवा अति गंभीर बनी हुई है।