दिल्ली में लू से ज्यादा उमस खतरनाक: आसमान से आग नहीं बरसी, फिर भी 53.5°C जैसी तपिश, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में बढ़ती उमस लू से अधिक खतरनाक है। शरीर ठंडा न होने से हीट स्ट्रोक व बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन इसका मुख्य कारण है।
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राजधानी में मंगलवार को तापमान 42 डिग्री से कम रहा। इसके बावजूद शाम 5:30 बजे तपिश ने 53.5 डिग्री सेल्सियस जैसी गर्मी का अहसास कराया। जलवायु परिवर्तन पर काम करने वाली संस्था क्लाइमेट सेंट्रल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती उमस अब राजधानी के लोगों के लिए लू से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। इसकी वजह से शरीर गर्मी को बाहर नहीं निकाल पाता और हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन तथा दिल और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे गंगा के मैदानी इलाकों में मानसून से पहले और बाद के महीनों में उमस लगातार बढ़ रही है। पहले यह समस्या मुख्य रूप से मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे तटीय शहरों तक सीमित थी, लेकिन अब दिल्ली भी इसकी चपेट में आ गई है। इसके अनुसार, 1970 के बाद दुनिया के 69 प्रतिशत शहरों में खतरनाक उमस वाले दिनों की संख्या बढ़ी है।
वर्ष 2025 में दर्ज 23 खतरनाक उमस वाले दिनों में से 19 दिन सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़े पाए गए। वहीं मौसम विभाग के अधिकारी ने बताया कि रिज सबसे गर्म स्टेशन रहा, जहां तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 4.8 डिग्री अधिक) दर्ज किया गया। वहीं सुबह 8:30 बजे तक सफदरजंग, पालम, लोधी रोड और आया नगर में बहुत हल्की बारिश दर्ज की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, जब दिल्ली में तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रहता है और हवा में नमी अधिक होती है, तो शरीर का पसीना जल्दी नहीं सूखता है। इससे शरीर की प्राकृतिक ठंडक की प्रक्रिया प्रभावित होती है और अंदरूनी तापमान तेजी से बढ़ने लगता है।
यही स्थिति हीट स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है। रिपोर्ट के अनुसार, केवल तापमान देखकर खतरे का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। अब हीट इंडेक्स और वेट बल्ब तापमान जैसे पैमाने भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। इनसे पता चलता है कि गर्मी और नमी मिलकर शरीर पर कितना असर डाल रही है।