एचएसवीपी फोर्टिस अस्पताल से वापस लें रियायती जमीन : मानवाधिकार आयोग
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सेक्टर-44 स्थित फोर्टिस अस्पताल में डेंगू से सात वर्षीय आद्या की मौत मामले में सोमवार को हरियाणा मानवाधिकार आयोग की गुरुग्राम बेंच में सुनवाई हुई। मामले में स्वास्थ्य निदेशक ने अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंप दी है। निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में फोर्टिस अस्पताल की लापरवाही को सही माना है। इस पर आयोग ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के मुख्य प्रशासक को पत्र लिखकर फोर्टिस अस्पताल को रियायती दर पर दी गई जमीन वापस लेने को कहा है। पत्र में आयोग ने कहा है कि अस्पताल से हुए करार के अनुसार कार्य न करने पर जमीन को वापस लिया जाए। इसके साथ ही आयोग ने अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए एक महीने का समय दिया है।
द्वारका निवासी जयंत कुमार ने डेंगू से पीड़ित अपनी बेटी आद्या को 30 अगस्त 2017 को गुरुग्राम सेक्टर-44 के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान 14 सितंबर 2017 को उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और मानव अधिकार आयोग में शिकायत दी थी। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में अस्पताल की खामियां बताई थीं। जिस पर सुशांत लोक थाना पुलिस को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-2 के तहत मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था। एफआईआर दर्ज कराते वक्त सिविल सर्जन द्वारा सुशांत लोक थाना पुलिस को 56 पेजों की विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी थी।
मानव अधिकार आयोग ने शिकायत पर स्वास्थ्य निदेशक को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा था। जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशक ने फोर्टिस अस्पताल की लापरवाही को स्पष्ट कर दिया था। इस पर आयोग ने यह आदेश दिए हैं।
इस बारे में हरियाणा मानवाधिकार आयोग के सदस्य दीपा भाटिया का कहना है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक को फोर्टिस अस्पताल से जमीन वापस लेने की कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा फोर्टिस अस्पताल को नोटिस देकर एक महीने में जवाब देने को कहा गया है।
फोर्टिस अस्पताल प्रवक्ता के अनुसार आद्या के इलाज में अस्पताल ने उच्च मानक का पालन किया था। पहले भी इस संबंध में विभिन्न प्राधिकरण और जांच एजेंसियों को स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। सोमवार शाम तक आयोग की तरफ से कोई नोटिस नहीं मिला है। यदि नोटिस मिलता है तो कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जवाब दिया जाएगा।