अपनों ने छोड़ा साथ तो हिंदू परिवार ने दिया फातमा को सहारा
बुढ़ापे में मुस्लिम महिला को छोड़कर उसका बेटा, बहु और पोते चले गए। महिला को हिंदू परिवार ने आश्रय देकर मिसाल कायम की है।
करीब 25 वर्ष से फातमा माई के रहने, खाने-पीने और इलाज समेत सभी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। फातमा माई (80) को हिंदू परिवार के पास रहने और उसके परिजनों द्वारा छोड़कर जाने का कोई मलाल नहीं है।
दादरी के रेलवे रोड पर एक हिंदू परिवार ने 25 वर्ष से मुस्लिम महिला को शरण दी है। सालों पहले फातमा माई का बेटा रहीसुद्दीन, पुत्रवधू सलमा, तीन पोते उनको छोड़कर दूसरी जगह चले गए।
घर से ही बनकर जाता है उनके लिए खाना
दादरी के इंद्रराज सिंह ने अपने अहाते में फातमा के लिए दो कमरे बनवाए हैं। घर से ही खाना भेजा जाता है। बीमार होने पर उनका इलाज भी करवाया जाता है।
बुजुर्ग महिला को सरकार से कोई पेंशन या दूसरी सुविधा नहीं मिलती। जरूरत के मुताबिक उन्हें रुपये भी दिए जाते हैं। फातमा वहीं पर नमाज भी पढ़ती हैं।
इंद्रराज सिंह का कहना है कि हिंदू और मुस्लिम में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने मानवता के नाते अपना फर्ज निभाया। कुछ लोग राजनैतिक लाभ लेने के लिए आपस में दरार पैदा कर एकता को खत्म करना चाहते हैं।