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केंद्रीय विद्यालय खोलने का निर्णय सरकार का अधिकार : हाईकोर्ट

Tue, 15 Oct 2019 03:23 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 15 Oct 2019 03:23 AM IST
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High Court said opening of Kendriya Vidyalaya is Government right
Delhi high court - फोटो : PTI

देश में तहसील स्तर पर केंद्रीय विद्यालय खोलना और सभी स्कूलों के लिए समान पाठ्यक्रम बनाना सरकार का नीतिगत मामला है और इसमें सरकार ही निर्णय ले सकती है। यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने भाजपा नेता व वकील अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए की है।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने कहा कि यह नीतिगत मुद्दा है और उस पर निर्णय लेने का अधिकार केवल सरकार को है। जनहित याचिका दायर कर भाजपा नेता ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को आदेश देने की मांग की थी। याची की मांग थी कि केंद्रीय मंत्रालय हर तहसील, तालुका, उप-मंडल, सर्किल और प्रत्येक राज्य विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक सेंट्रल स्कूल (केंद्रीय विद्यालय) स्थापित करने की संभावना का पता लगाए।
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इसके अलावा वह एक मानक की पाठ्य पुस्तक उपलब्ध कराए, जिसमें समाजवाद, धर्म निरपेक्षता, एकता और राष्ट्र की अखंडता, मौलिक अधिकारों, राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों, मौलिक कर्तव्यों और संविधान की बुनियादी संरचना आदि पर एक-एक अध्याय हो। वहीं, देश में पहली से आठवीं कक्षा तक के सभी छात्रों के लिए इसका अध्ययन अनिवार्य किया जाए।
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याचिका में यह भी कहा था कि प्रत्येक तहसील में कम से कम एक केंद्रीय विद्यालय सुनिश्चित करना संविधान के अनुच्छेद-21ए के तहत प्रत्येक बच्चे के शिक्षा के मौलिक अधिकार की दिशा में बेहद जरूरी है।


खंडपीठ ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार पूरे भारत में स्कूली बच्चों के लिए सामान्य पाठ्यक्रम या अतिरिक्त पाठ्यक्रम चाहती है तो सरकार समाजवाद, धर्म निरपेक्षता, एकता और राष्ट्र की अखंडता, मौलिक अधिकारों, राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों, मौलिक कर्तव्यों और संविधान की मूल संरचना पर आधारित अध्यायों को शामिल करने के लिए स्वतंत्र है।

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