चुनाव जीतने के लिए हुड्डा ने चुराया मोदी का नारा
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हरियाणा विधानसभा चुनाव का रण बजने से पहले ही टिकट के दावेदारों के बीच प्रचार वार छिड़ चुका है। वोटर की हवाओं को अपने पक्ष में करने के लिए लोकसभा चुनाव के तर्ज पर विधानसभा सीट अनुसार प्रचार के नुस्खे अजमाए जा रहे हैं।
तकनीक और साइबर के दौर में फेसबुक, ट्विटर और बल्क एसएमएस से इतर प्रचार के लिए टैग लाइन और पंचलाइन का सहारा लिया जा रहा है। हालांकि हर उम्मीदवारों ने साइबर वर्ल्ड में प्रचार के लिए टेक्नोक्रेट को नौकरी दी है। कुछ उम्मीदवारों ने इसके आउटसोर्स भी किया है।
इस प्रचार वार के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीत के फॉमूले की नकल करते हुए अपना चुनावी नारा भी कुछ वैसा ही रखा है।
देखिए हुड्डा ने कैसी की मोदी की नकल
सूत्रों की मानें तो विधानसभा चुनाव के टिकट के दावेदार क्रिएटिव आर्टिस्ट, कॉपी राइटर और नामचीन एडवर्टाइजिंग एजेंसियों का सहारा ले रहे हैं।
नतीजतन, ‘एक बार फिर सुखबीर कटारिया’, ‘अबकी बार सीमा पहुजा’, ‘सबका साथ सबका विकास, तीसरी बार हुडा सरकार’ जैसे पंचलाइन व स्लोगन से सजे पोस्टर शहर के चौक चौराहों पर दिख रहा है।
मुख्यमंत्री हुड्डा को इस बार अपनी कुर्सी खतरे में लग रही है। ऐसे में चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनावी फॉर्मूला लागू कर वह अपनी चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश में हैं।
चुनाव से पहले ही मिलने लगे ऑफर
विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा होने से पहले टिकट के उम्मीदवार अपना जोर अजमाइश कर रहे हैं। गुड़गांव जिले में सबसे अधिक युवा मतदाता होने के नाते उम्मीदवारों की निगाहें सबसे ज्यादा इन्हीं पर है। इसी का नतीजा है कि युवाओं को टी-शर्ट और कलाई घड़ी मुफ्त में बांटी जा रही है।
कारों के साथ टशन दिखाने के लिए कलर फुल बैकग्राउंड के साथ उम्मीदवार अपना नाम, फोटो व स्लोगन का वालपेपर बांट रहे हैं। बकायदा इसे लगाया जा रहा है। लगाते वक्त ये भी ध्यान रख रहे हैं कि कहीं कानून का उल्लंघन न हो।
मध्यम वर्ग की जेहन में अपना नाम बसाने के लिए हरेक घर में दीवार घड़ी और कैलेंडर बांटी जा रही है। दीवार घड़ी के बैकग्राउंड में अपना नाम और फोटो लगा हुआ है। उम्मीदवारों के समर्थक अपने गाड़ियों के बाहर स्टीकर और नाम लगाकर चल रहे हैं।
चुनाव के लिए खरीद लिया चैनल
जानकारों की मानें तो विधानसभा की तारीख घोषित होने से पहले प्रचार की दो वजह है। एक तो वह टिकट की दावेदारी पेश करना चाहते हैं और दूसरी, चुनाव खर्च कम दिखाने की कोशिश है। अभी से चुनाव प्रचार की वजह से तारीख घोषित होने के बाद कम प्रचार भी किया जाए, तो काम चल जाएगा।
चुनाव में अपने प्रचार को दमदार बनाने के लिए दो क्षेत्रीय पार्टियों ने बाकायदा न्यूज चैनल खरीद लिया है। अभी से उन न्यूज चैनलों पर आधे से अधिक समय पार्टी की गतिविधियों से ही दर्शकों को रूबरू कराया जाता है।
अधिकारिक सूत्रों की मानें तो चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे पार्टी के आला नेता दिन भर चैनल पर चलने वाली गतिविधियों पर नजर रखते हैं।