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Gurugram News: पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिक को श्रद्धांजलि अर्पित की
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सूबेदार मुकेश कुमार के शहीदी दिवस पर पैतृक गांव पहुंचे 50आरआर कुमाऊं रेजिमेंट के जवान
गुरुग्राम। 20 सितंबर सन 2007 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए सूबेदार मुकेश कुमार को उनके शहीदी दिवस के अवसर पर 50 आरआर-18 कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों ने उनके पैतृक गांव कुकडौला पचगांवा पहुंच कर उनके शहीदी स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
सूबेदार मुकेश कुमार के पिता हवलदार मीरसिंह यादव ने भी चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध में भाग लिया था।
20 सितंबर 2007 को मुकेश कुमार जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में एक खुफिया दल का नेतृत्व कर रहे थे। उस दिन शाम को करीब 6.45 पर उनके दल ने दो आतंकवादी को अपनी और बढ़ता देखा तो वह आतंकवादियों पर टूट पड़े। जवाबी कार्रवाई में उन्होंने पांच आतंकवादियों को ढेर कर दिया। एक आतंकवादी गोलीबारी करते हुए एक नाले में कूद गया। भारी गोलीबारी व अंधेरे के कारण उनका पूरा दल व पूरी रात विशाल पहाड़ी और ज्यादा जंगल होने के कारण वहां से निकलने में असमर्थ रहा। अगली सुबह सूबेदार मुकेश कुमार ने फिर से आतंकवादियों की खोज शुरू की। इस दौरान आमने सामने की लड़ाई में वह शहीद हो गए। सूबेदार मुकेश कुमार की अदम्य साहस को देखते हुए राष्ट्रपति और 50आरआर ने उसको सेना मेडल वीरता से अलंकृत किया। ब्यूरो
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गुरुग्राम। 20 सितंबर सन 2007 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए सूबेदार मुकेश कुमार को उनके शहीदी दिवस के अवसर पर 50 आरआर-18 कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों ने उनके पैतृक गांव कुकडौला पचगांवा पहुंच कर उनके शहीदी स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
सूबेदार मुकेश कुमार के पिता हवलदार मीरसिंह यादव ने भी चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध में भाग लिया था।
20 सितंबर 2007 को मुकेश कुमार जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में एक खुफिया दल का नेतृत्व कर रहे थे। उस दिन शाम को करीब 6.45 पर उनके दल ने दो आतंकवादी को अपनी और बढ़ता देखा तो वह आतंकवादियों पर टूट पड़े। जवाबी कार्रवाई में उन्होंने पांच आतंकवादियों को ढेर कर दिया। एक आतंकवादी गोलीबारी करते हुए एक नाले में कूद गया। भारी गोलीबारी व अंधेरे के कारण उनका पूरा दल व पूरी रात विशाल पहाड़ी और ज्यादा जंगल होने के कारण वहां से निकलने में असमर्थ रहा। अगली सुबह सूबेदार मुकेश कुमार ने फिर से आतंकवादियों की खोज शुरू की। इस दौरान आमने सामने की लड़ाई में वह शहीद हो गए। सूबेदार मुकेश कुमार की अदम्य साहस को देखते हुए राष्ट्रपति और 50आरआर ने उसको सेना मेडल वीरता से अलंकृत किया। ब्यूरो
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