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हकीकत बयां कर रही अस्थायी अस्पताल और कोविड केयर सेंटर की यह तस्वीर
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गुरुग्राम। कोविड के खिलाफ जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कितने गंभीर हैं, इसकी हकीकत ताऊ देवीलाल स्टेडियम में बना अस्थायी अस्पताल बयां कर रहा है। यहां पर पांच दिन पहले सीएम से अधूरे अस्पताल का उद्घाटन करवा दिया गया। इतना ही नहीं, 24 घंटे तक हुई बारिश से इस अस्पताल में हुए जलभराव ने प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा नेताओं ने प्रशासन की कोविड से लोगों को बचाने की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतना ही नहीं, सेक्टर-14 में बनाए गए 100 बेड के अस्थायी अस्पताल का हाल यह है कि वहां पर एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया है, जबकि सिविल अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर काफी मरीज स्लैब और स्ट्रेचर पर इलाज करवा रहे हैं।
सामाजिक और राजनीतिक लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन ने पीएम के सामने पॉश इलाके में कार में बैठे लोगों के लिए ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन और छह लाख लोगों के टीके लगाने की रिपोर्ट पेश करके तारीफ करा ली लेकिन यह तस्वीर नहीं पेश की कि सीएम से अधूरे अस्पताल का उद्घाटन करवा दिया। इतना नहीं ऐसी जगह पर अस्पताल बनाया, जहां बारिश में जलभराव हो गया। यदि वहां मरीज होते तो उनका क्या हाल होता।
कांग्रेस के पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव का कहना है कि प्रशासन ने पीएम के सामने वास्तविकता पेश नहीं की है। ऐसा करना जनता के साथ भद्दा मजाक है। इसी तरह की टिप्पणी सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता सुरजीत सिंह की है, उनका कहना है कि सीएम ने अधूरे अस्पताल का उद्घाटन करके जनता के साथ मजाक किया है। देखा जाए तो अफसरों ने पीएम के सामने सिर्फ कागजी रिपोर्ट पेश की है जो कि हकीकत कुछ और है। कांग्रेस नेता प्रदीप गुलारिया का कहना है जल्दबाजी में अधूरे अस्पताल का उद्घाटन हुआ है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच में तालमेल का अभाव है। इस तरह के निर्णय से पहले प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सुझाव नहीं लिए। बेहतर होता कि सेक्टर-29 के ग्राउंड में इस तरह का अस्पताल बनता।
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सवाल : कोरोना खत्म होने के बाद खरीदेंगे 80 लाख से किट
मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम जिले को 15 दिन पहले तीन हजार से अधिक मरीजों के उपचार की किट खरीदने के लिए 80 लाख रुपये जारी किए थे। इस राशि से यहां के प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने किट नहीं खरीदी है जबकि इस दौरान महामारी चरम पर है। सामाजिक लोगों ने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या वह महामारी खत्म होने का इंतजार कर रहा है। महामारी खत्म होने के बाद ही उपचार के लिए सामान की खरीद होगी। इस मामले में प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अभी टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
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सामाजिक और राजनीतिक लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन ने पीएम के सामने पॉश इलाके में कार में बैठे लोगों के लिए ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन और छह लाख लोगों के टीके लगाने की रिपोर्ट पेश करके तारीफ करा ली लेकिन यह तस्वीर नहीं पेश की कि सीएम से अधूरे अस्पताल का उद्घाटन करवा दिया। इतना नहीं ऐसी जगह पर अस्पताल बनाया, जहां बारिश में जलभराव हो गया। यदि वहां मरीज होते तो उनका क्या हाल होता।
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कांग्रेस के पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव का कहना है कि प्रशासन ने पीएम के सामने वास्तविकता पेश नहीं की है। ऐसा करना जनता के साथ भद्दा मजाक है। इसी तरह की टिप्पणी सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता सुरजीत सिंह की है, उनका कहना है कि सीएम ने अधूरे अस्पताल का उद्घाटन करके जनता के साथ मजाक किया है। देखा जाए तो अफसरों ने पीएम के सामने सिर्फ कागजी रिपोर्ट पेश की है जो कि हकीकत कुछ और है। कांग्रेस नेता प्रदीप गुलारिया का कहना है जल्दबाजी में अधूरे अस्पताल का उद्घाटन हुआ है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच में तालमेल का अभाव है। इस तरह के निर्णय से पहले प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सुझाव नहीं लिए। बेहतर होता कि सेक्टर-29 के ग्राउंड में इस तरह का अस्पताल बनता।
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सवाल : कोरोना खत्म होने के बाद खरीदेंगे 80 लाख से किट
मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम जिले को 15 दिन पहले तीन हजार से अधिक मरीजों के उपचार की किट खरीदने के लिए 80 लाख रुपये जारी किए थे। इस राशि से यहां के प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने किट नहीं खरीदी है जबकि इस दौरान महामारी चरम पर है। सामाजिक लोगों ने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या वह महामारी खत्म होने का इंतजार कर रहा है। महामारी खत्म होने के बाद ही उपचार के लिए सामान की खरीद होगी। इस मामले में प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अभी टेंडर प्रक्रिया चल रही है।