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Gurugram News: करंट से हुई युवक की मौत पर निगम देगा 14.70 लाख का मुआवजा
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2017 में हुआ था हादसा, जिला अदालत ने निगम को ब्याज समेत रुपये देने का दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आठ साल पहले बिजली के खंभे में फैले करंट से हुई युवक की मौत पर परिजनों को बिजली निगम 14.70 लाख रुपये का मुआवजा देगा। यह आदेश सिविल जज जूनियर डिविजन दीपक यादव की अदालत ने दिया है। मृतक बिमलेश दुबे के परिवार ने 26.10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की थी।
खांड़सा गांव के अंजना कॉलोनी निवासी सुधा देवी ने अदालत में दायर याचिका में कहा कि पति बिमलेश दुबे 16 जून 2017 की सुबह काम की तलाश में घर से सेक्टर-37 की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया था और बिजली के खंबे से उनका हाथ लग गया था। खंभे में फैले करंट से चिपक गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया था। पोस्टमार्टम में भी इस बात की पुष्टि हुई थी कि उनकी मौत करंट से हुई है। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह बिजली के खंबे पर कोई तार फेंसिंग नहीं की हुई थी, जिसकी वजह से हादसा हुआ। उनके परिवार के पास आय का कोई दूसरा साधन भी नहीं था।
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अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निगम को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता को 14.70 लाख रुपये याचिका दाखिल करने की तिथि से नौ प्रतिशत की दर से दी जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आठ साल पहले बिजली के खंभे में फैले करंट से हुई युवक की मौत पर परिजनों को बिजली निगम 14.70 लाख रुपये का मुआवजा देगा। यह आदेश सिविल जज जूनियर डिविजन दीपक यादव की अदालत ने दिया है। मृतक बिमलेश दुबे के परिवार ने 26.10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की थी।
खांड़सा गांव के अंजना कॉलोनी निवासी सुधा देवी ने अदालत में दायर याचिका में कहा कि पति बिमलेश दुबे 16 जून 2017 की सुबह काम की तलाश में घर से सेक्टर-37 की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया था और बिजली के खंबे से उनका हाथ लग गया था। खंभे में फैले करंट से चिपक गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
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पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया था। पोस्टमार्टम में भी इस बात की पुष्टि हुई थी कि उनकी मौत करंट से हुई है। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह बिजली के खंबे पर कोई तार फेंसिंग नहीं की हुई थी, जिसकी वजह से हादसा हुआ। उनके परिवार के पास आय का कोई दूसरा साधन भी नहीं था।
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अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निगम को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता को 14.70 लाख रुपये याचिका दाखिल करने की तिथि से नौ प्रतिशत की दर से दी जाए।