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Gurugram News: मेवात में घट रहा लिंगानुपात, दूसरे जिलों से फिर भी बेहतर

Mon, 17 Feb 2025 01:09 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 17 Feb 2025 01:09 AM IST
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Sex ratio is decreasing in Mewat, still better than other districts
- चार साल में दिखी गिरावट, प्रदेश में तीसरे पायदान पर रहा मेवात
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रिजवान खान
नगीना। जिले में हर साल बच्चियों के लिंगानुपात में गिरावट देखने को मिल रही है। फिर भी अन्य जिलों के मुताबिक यहां की स्थिति काफी हद तक ठीक है। लिंगानुपात में सुधार के लिए लिंग जांच करने वाले केंद्रों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। कुछ दिनों पहले ही तावडू में छापेमारी कर कार्रवाई की गई थी। वहीं, अभी भी मेवात में पैदा होने वाली लड़कियों का लिंग अनुपात लड़कों से करीब दो प्रतिशत कम है। पिछले चार वर्षों के दौरान कुछ प्वाइंट की गिरावट देखने को मिली है।

जिला अस्पताल के डॉक्टर विशाल सिंगला ने बताया कि पिछले साल एक हजार लड़कों के बीच 928 लड़कियों का जन्म हुआ है। जो कि पूरे प्रदेश में तीसरा सबसे अधिक लिंगानुपात है। स्वास्थ्य विभाग के पिछले पांच साल के आंकड़ों को देखें तो जिले में अप्रैल 2020-2021 में 52,347 बच्चों ने जन्म लिया। जिनमें 1000 लड़को पर 965 लड़कियां थीं। जिनका औसत प्रतिशत 48.59 है। वहीं, साल 2021-2022 में 53,685 बच्चों ने जन्म लिया। जिनमें 1000 लड़कों पर 956 लड़कियां पैदा हुई जिनका औसत प्रतिशत 48.34 है। साल 2022-2023 में 52,920 बच्चों ने जन्म लिया। जिनमें 1000 लड़कों पर 954 लड़कियों ने जन्म लिया। इसके अलावा साल 2023-2024 में 57539 बच्चे पैदा हुए जिनमें 22 हजार से ज्यादा लड़के और 20 हजार से ज्यादा लड़कियां पैदा हुईं। कुल आकड़ों की बात की जाए तो लड़कियों के लिंगानुपात में केवल कुछ प्वाइंट की गिरावट देखने को मिली है। अधिकारियों की मानें तो बेटियां हर क्षेत्र में बेहतर काम कर रही हैं।
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भ्रूण हत्या पर रोक लगाने की अपील
सिविल अस्पताल के सीनियर डॉक्टर विशाल सिंगला ने जिले वासियों से अपील करते हुए कहा कि भ्रूण हत्या पाप है। आजकल बेटियां किसी भी काम में लड़कों से पीछे नहीं हैं। लड़कियों को कोख में मारना दंडनीय अपराध है।
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लिंग जांच केंद्रों पर अगर कोई भी संचालक लड़के या लड़की के बारे में जानकारी देता है तो उसकी शिकायत पुलिस या प्रशासन से करें। जिससे ऐसे जांच केंद्र संचालकों पर कार्रवाई की जा सके। सभी लोगों से अपील है कि बेटी को बोझ ना समझें बल्कि अच्छी परवरिश कर सामाजिक तौर पर मजबूत बनाएं। - सर्वजीत थापर, सिविल सर्जन नूह।


1. साल 2020-2021:
1000 लड़कों पर 965 लड़कियां



2. साल 2021-2022:
1000 लड़कों पर 956.10 लड़कियां

3. साल 2022-2023:
1000 लड़कों पर 954 लड़कियां

4. साल 2023-2024:
1000 लड़कों पर 928 लड़कियां
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