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राहत: एनएच-48 स्थित खेड़कीदौला टोल पचगांव में होगा शिफ्ट
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मंत्रालय की मंजूरी के बाद एनएचएआई टोल शिफ्ट करने के लिए उठा रहा कदम, छह माह में बनेगा नया टोल
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एनएच-8 स्थित खेड़कीदौला टोल को पचगांव में शिफ्ट करने की योजना को मंजूरी दे दी है। अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) पचगांव में टोल निर्माण को लेकर कदम उठा रहा है।
पचगांव में टोल शिफ्ट करने में छह माह का समय लग सकता है। पचगांव में मल्टी लेवल फ्री फ्लो टोल कलेक्शन (एमएलएफएफ) प्रणाली अपनाई जाएगी। दिल्ली-जयपुर हाईवे (एनएच-8) स्थित खेड़कीदौला टोल ने शहर के लोगों के बीच ही दूरी बढ़ा रखी है। मानेसर से गुरुग्राम आने के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों का कहना है कि यह ऐसी समस्या है, जिससे हजारों लोग रोज दो-चार होते हैं। साल 2015 से टोल हटाने को लेकर बात चल रही है। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्यामल मिश्रा ने करीब दो माह पहले एनएचएआई अधिकारियों से बैठक कर इस पर त्वरित काम करने को कहा था। इसके बाद टीम ने पचगांव में चिह्नित जमीन का निरीक्षण किया था। पचगांव में करीब 28 एकड़ जमीन पर टोल बनना है। एनएचएआई ने टोल प्लाजा शिफ्ट करने के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट और डीपीआर तैयार कराया था। सर्वे में हाईवे पर वाहनों की संख्या, जगह, टोल बनाने और कार्यालय बनाने समेत अन्य बातों का देखा गया था। इसके बाद रिपोर्ट को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय मंजूरी के लिए भेजा गया था। एनएचएआई के परियोजना निदेशक योगेश तिलक ने बताया कि मंत्रालय ने योजना को मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि टोल को पांच-छह माह में शिफ्ट कर दिया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इसके लिए पूरी कार्य योजना तैयार है। सोमवार को टीम पचगांव मौका मुआयना करेगी। इसे नगर निगम गुरुग्राम और नगर निगम मानेसर के दायरे से बाहर किया जा रहा है।
आधुनिक प्रणाली से होगा टोल कलेक्शन
योजना के अनुसार पचगांव में 28 लेन का टोल बनाया जा सकता है। इसे मल्टी लेवल फ्री फ्लो टोल कलेक्शन (एमएलएफएफ) प्रणाली अपनाई जा सकती है। यह एक ऐसी प्रणाली है जो वाहनों को बिना रुके, राजमार्ग गति से टोल का भुगतान करने की अनुमति देती है। इस तकनीक में आरएफआईडी (रेडियो-आवृत्ति पहचान) और एएनपीआर (स्वचालित नंबर प्लेट पहचान) जैसे उपकरणों का उपयोग होता है। इस प्रणाली के कारण टोल बूथ पर रुकने की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे यातायात सुचारु रूप से चलता है। एनएचएआई के अनुसार पचगांव टोल पर बूम बैरियर नहीं होंगे। योजना के अनुसार इस योजना पर भी विचार किया जा रहा है कि द्वारका एक्सप्रेसवे से टोल देने के बाद जयपुर जाने वालों को पचगांव में टोल न देना पड़े। इस पर मंत्रालय को अंतिम निर्णय लेना है।
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साल 2003 में बना था टोल
वर्ष 2003 में दिल्ली-जयपुर हाईवे बनने के बाद दिल्ली-गुरुग्राम सुपर कनेक्टिविटी द्वारा यह टोल शुरू किया गया था। सेक्टर 82 से 95 तक की बिल्डर लाइसेंस सोसाइटियों को इससे दिक्कत आ रही है। कई बार लोगों ने इसको लेकर जाम लगाया, धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल तक भी कर चुके हैं। शहर की एक आरडब्ल्यूए ने इसेे लेकर हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर सरहौल बार्डर पर दिल्ली नगर निगम का टोल है। गुरुग्राम से दिल्ली जाने वाले लोगों को रोज जाम से जूझना पड़ता है। एमसीडी टोल को दिल्ली सीमा में लगाने को लेकर हरियाणा सरकार कई बार उठा चुकी है।
बाक्स-
-पहले 21 रुपये टोल टैक्स था, सिरहौल टोल हटने के बाद 55 रुपये कर दिया था।
-मौजूदा समय में कार को 85 रुपये का टोल चुकाना पड़ता है।
- इस टोल से रोजाना करीब 1.50 लाख वाहन गुजरते हैं।
- टोल के पास 80 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और 35 गांव हैं।
- टोल हटाने के लिए साल 2015 से काफी संघर्ष चल रहा है।
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कहां टोल हैं
-गुऱुग्राम-फरीदाबाद रोड पर-बंधवाड़ी टोल
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर-घामडोज टोल
गुरुग्राम-जयपुर हाईवे-खेड़कीदौला टोल
द्वारका एक्सप्रेस-वे पर-बजघेड़ा बॉर्डर (अभी चालू नहीं)
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बातचीत-
खेड़कीदौला टोल को पहले ही हट जाना चाहिए था। इससे सेक्टरों और आसपास गांव के लोगों को भी परेशानी होती है। टोल पर आए दिन विवाद होता है। टोल हटे तो हजारों लोगों को फायदा मिलेगा। -राहुल भारद्वाज, कारोबारी, निवासी सेक्टर-81
खेड़कीदौला टोल ने मानेसर और गुरुग्राम के बीच दूरी बढ़ा रखी है। पचगांव टोल शिफ्ट होने से न्यू गुरुग्राम के लोगों को ज्यादा फायदा होगा। इसे लेकर लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। - हरेल चतुर्वेदी, डीएलएफ न्यू टाउन सोसाइटी, सेक्टर-86
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एनएच-8 स्थित खेड़कीदौला टोल को पचगांव में शिफ्ट करने की योजना को मंजूरी दे दी है। अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) पचगांव में टोल निर्माण को लेकर कदम उठा रहा है।
पचगांव में टोल शिफ्ट करने में छह माह का समय लग सकता है। पचगांव में मल्टी लेवल फ्री फ्लो टोल कलेक्शन (एमएलएफएफ) प्रणाली अपनाई जाएगी। दिल्ली-जयपुर हाईवे (एनएच-8) स्थित खेड़कीदौला टोल ने शहर के लोगों के बीच ही दूरी बढ़ा रखी है। मानेसर से गुरुग्राम आने के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों का कहना है कि यह ऐसी समस्या है, जिससे हजारों लोग रोज दो-चार होते हैं। साल 2015 से टोल हटाने को लेकर बात चल रही है। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्यामल मिश्रा ने करीब दो माह पहले एनएचएआई अधिकारियों से बैठक कर इस पर त्वरित काम करने को कहा था। इसके बाद टीम ने पचगांव में चिह्नित जमीन का निरीक्षण किया था। पचगांव में करीब 28 एकड़ जमीन पर टोल बनना है। एनएचएआई ने टोल प्लाजा शिफ्ट करने के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट और डीपीआर तैयार कराया था। सर्वे में हाईवे पर वाहनों की संख्या, जगह, टोल बनाने और कार्यालय बनाने समेत अन्य बातों का देखा गया था। इसके बाद रिपोर्ट को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय मंजूरी के लिए भेजा गया था। एनएचएआई के परियोजना निदेशक योगेश तिलक ने बताया कि मंत्रालय ने योजना को मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि टोल को पांच-छह माह में शिफ्ट कर दिया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इसके लिए पूरी कार्य योजना तैयार है। सोमवार को टीम पचगांव मौका मुआयना करेगी। इसे नगर निगम गुरुग्राम और नगर निगम मानेसर के दायरे से बाहर किया जा रहा है।
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आधुनिक प्रणाली से होगा टोल कलेक्शन
योजना के अनुसार पचगांव में 28 लेन का टोल बनाया जा सकता है। इसे मल्टी लेवल फ्री फ्लो टोल कलेक्शन (एमएलएफएफ) प्रणाली अपनाई जा सकती है। यह एक ऐसी प्रणाली है जो वाहनों को बिना रुके, राजमार्ग गति से टोल का भुगतान करने की अनुमति देती है। इस तकनीक में आरएफआईडी (रेडियो-आवृत्ति पहचान) और एएनपीआर (स्वचालित नंबर प्लेट पहचान) जैसे उपकरणों का उपयोग होता है। इस प्रणाली के कारण टोल बूथ पर रुकने की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे यातायात सुचारु रूप से चलता है। एनएचएआई के अनुसार पचगांव टोल पर बूम बैरियर नहीं होंगे। योजना के अनुसार इस योजना पर भी विचार किया जा रहा है कि द्वारका एक्सप्रेसवे से टोल देने के बाद जयपुर जाने वालों को पचगांव में टोल न देना पड़े। इस पर मंत्रालय को अंतिम निर्णय लेना है।
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साल 2003 में बना था टोल
वर्ष 2003 में दिल्ली-जयपुर हाईवे बनने के बाद दिल्ली-गुरुग्राम सुपर कनेक्टिविटी द्वारा यह टोल शुरू किया गया था। सेक्टर 82 से 95 तक की बिल्डर लाइसेंस सोसाइटियों को इससे दिक्कत आ रही है। कई बार लोगों ने इसको लेकर जाम लगाया, धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल तक भी कर चुके हैं। शहर की एक आरडब्ल्यूए ने इसेे लेकर हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर सरहौल बार्डर पर दिल्ली नगर निगम का टोल है। गुरुग्राम से दिल्ली जाने वाले लोगों को रोज जाम से जूझना पड़ता है। एमसीडी टोल को दिल्ली सीमा में लगाने को लेकर हरियाणा सरकार कई बार उठा चुकी है।
बाक्स-
-पहले 21 रुपये टोल टैक्स था, सिरहौल टोल हटने के बाद 55 रुपये कर दिया था।
-मौजूदा समय में कार को 85 रुपये का टोल चुकाना पड़ता है।
- इस टोल से रोजाना करीब 1.50 लाख वाहन गुजरते हैं।
- टोल के पास 80 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और 35 गांव हैं।
- टोल हटाने के लिए साल 2015 से काफी संघर्ष चल रहा है।
कहां टोल हैं
-गुऱुग्राम-फरीदाबाद रोड पर-बंधवाड़ी टोल
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर-घामडोज टोल
गुरुग्राम-जयपुर हाईवे-खेड़कीदौला टोल
द्वारका एक्सप्रेस-वे पर-बजघेड़ा बॉर्डर (अभी चालू नहीं)
बातचीत-
खेड़कीदौला टोल को पहले ही हट जाना चाहिए था। इससे सेक्टरों और आसपास गांव के लोगों को भी परेशानी होती है। टोल पर आए दिन विवाद होता है। टोल हटे तो हजारों लोगों को फायदा मिलेगा। -राहुल भारद्वाज, कारोबारी, निवासी सेक्टर-81
खेड़कीदौला टोल ने मानेसर और गुरुग्राम के बीच दूरी बढ़ा रखी है। पचगांव टोल शिफ्ट होने से न्यू गुरुग्राम के लोगों को ज्यादा फायदा होगा। इसे लेकर लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। - हरेल चतुर्वेदी, डीएलएफ न्यू टाउन सोसाइटी, सेक्टर-86