Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Preparing for accidents during Diwali Delhi hospitals deploy extra beds and doctors special teams to be on sta

दिवाली पर हादसों से निपटने की तैयारी: दिल्ली के अस्पतालों में अतिरिक्त बेड-डॉक्टर तैनात, रहेंगी स्पेशल टीमें

Fri, 06 Nov 2026 07:27 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 06 Nov 2026 07:27 PM IST
सार

दिवाली पर पटाखों और दीयों से होने वाली आगजनी और जलने की घटनाओं को देखते हुए दिल्ली के बड़े अस्पतालों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। त्योहार के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों के इमरजेंसी से लेकर बर्न एंड प्लासटिक विभाग को अलर्ट रखा जा रहा है।

विज्ञापन
Preparing for accidents during Diwali Delhi hospitals deploy extra beds and doctors special teams to be on sta
दिल्ली एम्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिवाली पर पटाखों और दीयों से होने वाली आगजनी और जलने की घटनाओं को देखते हुए दिल्ली के बड़े अस्पतालों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। त्योहार के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों के इमरजेंसी से लेकर बर्न एंड प्लासटिक विभाग को अलर्ट रखा जा रहा है। एम्स, सफदरजंग, आरएमएल और लेडी हार्डिंग अस्पताल में अतिरिक्त डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जरूरी दवाओं, पट्टियों और इलाज में इस्तेमाल होने वाले दूसरे सामान का इंतजाम किया जा रहा है। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को तुरंत भर्ती करने के लिए भी व्यवस्था की जा रही है।

विज्ञापन



अस्पतालों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है, क्योंकि पिछले साल दिवाली और उससे एक दिन पहले राजधानी के प्रमुख अस्पतालों में जलने की चोटों के साथ 325 मरीज पहुंचे थे। इनमें करीब 270 मरीज पटाखों की वजह से झुलसे थे। ऐसे में इस बार पटाखे जलाने की सीमित अनुमति के बावजूद अस्पताल किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहते। सफदरजंग अस्पताल में देश की सबसे बड़ी बर्न यूनिट है। यहां हर साल जलने के गंभीर और सामान्य दोनों तरह के मरीज पहुंचते हैं। दिवाली को देखते हुए अस्पताल में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के इलाज की अलग-अलग व्यवस्था के साथ आपातकालीन ट्रॉली, ड्रेसिंग सामग्री, जरूरी दवाएं और अलग से आरक्षित बेड की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
विज्ञापन


एम्स के आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर भी तैयार
एम्स में बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के साथ इमरजेंसी, ट्रामा सेंटर, आरपी सेंटर, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर को भी तैयार रखा गया है। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को बिना देरी इलाज मिल सके, इसके लिए ग्रीन, येलो और रेड जोन के इतंजाम किए गए है। वहीं, सफजरजंग अस्पताल और आरएमएल अस्पताल में 20 बेड आरक्षित रखें गए है। साथ ही, सफदरजंग में जनरल सर्जन, हड्डी, एनेस्थीशिया, नेत्र और बर्न एंड प्लासटिक विशेषज्ञ 24 घंटे तैनात रहेंगे। इसके अलावा आरएमएल अस्पताल में मरीजों को बिना किसी रूकावट के सीधे आपातकालीन और बर्न एंड प्लास्टिक विभाग में ला सकते हैं। साथ ही, आईसीयू में भी दो बेड आरक्षित है। डॉक्टर तीन दिन छोटी दिवाली, दिवाली और गोवर्धन पूजा तक 24 घंटे अस्पताल में तैनात रहेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेडी हार्डिंग में आपातकालीन विभाग व अन्य सभी विभाग पूरी तरह से तैयार
दिवाली को लेकर लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में हर वर्ष की तरह पूरी तैयारी की गई है। किसी भी विकट समस्या से उत्पन्न होने वाली संभावनाओं के लिए आपातकालीन विभाग व अन्य सभी विभाग पूरी तरह से तैयार हैं। आग से होने वाली दुर्घटनाओं के इलाज के लिए सभी इंतेजामत किए गए हैं व दुर्घटना आपातकालीन विभाग व मेडिसिन विभाग व शल्य चिकित्सा विभाग पूरी तरह से सशक्त व तैनात है। आपातकालीन विभाग का (आईसीयू) गहन चिकित्सा क्षेत्र भी तैयार है व डिजास्टर वार्ड जिस में 20 बिस्तर हैं। वह भी बिल्कुल ऑपरेशनल मोड में है जिसको कभी भी शॉर्ट नोटिस पर सक्रिय किया जा सकता है। वातावरण में प्रदूषण व धुएं से होने वाली बीमारियां और श्वास नली से संबंधित रोगों से निपटने के लिए भी आपातकालीन विभाग व अन्य सभी विभाग सजग, सक्षम और तैयार हैं।

पिछली दिवाली पर सफदरजंग में आए थे सबसे ज्यादा मरीज
पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि पटाखों से होने वाली दुर्घटनाएं कितनी गंभीर हो सकती हैं। दिवाली और उससे पहले के दिन दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में कुल 325 लोग जलने की चोटों के साथ पहुंचे थे। इनमें सबसे अधिक 129 मरीज सफदरजंग अस्पताल में आए थे। इनमें 18 मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। एम्स में 55 मरीज पहुंचे थे, जिनमें 10 गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था।


जलने पर सबसे पहले करें यह काम
डॉक्टरों के अनुसार, पटाखे या किसी अन्य कारण से जलने पर सबसे पहले प्रभावित हिस्से को 15 से 20 मिनट तक सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे रखना चाहिए। जले हुए हिस्से पर घी, तेल, टूथपेस्ट या कोई घरेलू नुस्खा नहीं लगाना चाहिए। अगर जलने की चोट गंभीर है या चेहरा, आंखें प्रभावित हुई हैं तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। बच्चों के झुलसने पर भी बिना देरी चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।

पटाखे जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
-पटाखे जलाते समय जूते पहनें और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा लगाएं।
-पटाखे को हाथ में पकड़कर न जलाएं। इसके लिए लंबी मोमबत्ती या अगरबत्ती का इस्तेमाल करें।
-अगर पटाखा नहीं जलता है तो उसके पास तुरंत न जाएं और दोबारा जलाने की कोशिश न करें।
-रॉकेट और अनार जैसे पटाखे खुले स्थान पर समतल जमीन पर रखें।
-पटाखे जलाते समय पास में पानी की बाल्टी और रेत जरूर रखें।
-घर के अंदर, बालकनी या बंद जगह पर पटाखे न जलाएं।
-पेट्रोल, गैस सिलेंडर, बिजली के तारों और दूसरी ज्वलनशील चीजों के पास पटाखे न जलाएं।
-पटाखे जलाते समय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed