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Gurugram News: कमीशन के नोटिस भेजने के बाद भरा जुर्माना
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राज्य सूचना आयोग ने जुर्माना भरने के लिए 31 अक्तूबर तक का दिया था समय
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी समय पर न देने पर गुरुग्राम के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय की एक असिस्टेंट पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। राज्य सूचना आयोग ने जुर्माना भरने के लिए 31 अक्तूबर तक का अंतिम मौका दिया था।
दरअसल, जिले के शिक्षक सरोज यादव ने अगस्त 2023 में बीईओ कार्यालय से आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी। निर्धारित समय सीमा में जवाब न मिलने पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग में शिकायत की। आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से सूचना असिस्टेंट को भेजी गई थी, लेकिन उसने आगे नहीं भेजी।
असिस्टेंट ने सफाई में कहा कि कार्यभार अधिक होने के कारण वह जानकारी को आगे फॉरवर्ड नहीं कर पाई। आयोग ने इसे लापरवाही मानते हुए 12 जून को आदेश जारी कर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। अब तक राशि जमा न होने पर आयोग ने अंतिम अवसर देते हुए 31 अक्तूबर तक जुर्माना जमा कराने का निर्देश दिया था ।
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गौरतलब है कि आरटीआई दाखिल करने के 30 दिन के भीतर जवाब देना अनिवार्य होता है, जिसमें डाक के लिए पांच दिन का समय भी शामिल है। शिकायतकर्ता का कहना है कि नोटिस जारी होने के बाद करीब एक साल बाद बीईओ कार्यालय से जवाब भेजा गया, जो कानून की भावना के विपरीत है।
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कमीशन की ओर से दो बार रिमाइंडर भेजा गया था। साथ ही असिस्टेंट को नोटिस भी भेजा गया था, जिसके बाद जुर्माना भर दिया गया है। - सुदेश राघव, खंड शिक्षा अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी समय पर न देने पर गुरुग्राम के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय की एक असिस्टेंट पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। राज्य सूचना आयोग ने जुर्माना भरने के लिए 31 अक्तूबर तक का अंतिम मौका दिया था।
दरअसल, जिले के शिक्षक सरोज यादव ने अगस्त 2023 में बीईओ कार्यालय से आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी। निर्धारित समय सीमा में जवाब न मिलने पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग में शिकायत की। आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से सूचना असिस्टेंट को भेजी गई थी, लेकिन उसने आगे नहीं भेजी।
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असिस्टेंट ने सफाई में कहा कि कार्यभार अधिक होने के कारण वह जानकारी को आगे फॉरवर्ड नहीं कर पाई। आयोग ने इसे लापरवाही मानते हुए 12 जून को आदेश जारी कर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। अब तक राशि जमा न होने पर आयोग ने अंतिम अवसर देते हुए 31 अक्तूबर तक जुर्माना जमा कराने का निर्देश दिया था ।
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गौरतलब है कि आरटीआई दाखिल करने के 30 दिन के भीतर जवाब देना अनिवार्य होता है, जिसमें डाक के लिए पांच दिन का समय भी शामिल है। शिकायतकर्ता का कहना है कि नोटिस जारी होने के बाद करीब एक साल बाद बीईओ कार्यालय से जवाब भेजा गया, जो कानून की भावना के विपरीत है।
कमीशन की ओर से दो बार रिमाइंडर भेजा गया था। साथ ही असिस्टेंट को नोटिस भी भेजा गया था, जिसके बाद जुर्माना भर दिया गया है। - सुदेश राघव, खंड शिक्षा अधिकारी