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Gurugram News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पथ संचलन कर मनाया शताब्दी वर्ष
Thu, 02 Oct 2025 11:17 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
Updated Thu, 02 Oct 2025 11:17 PM IST
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष में प्रवेश पर मुण्डाका व साकरस में कार्यक्रम आयोजितसंव
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शस्त्र पूजन कर शक्ति का दिया परिचय, 1925 में हुई थी स्थापनासंवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साै वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वीरवार को जिलेभर में कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में कहीं पथ संचलन तो कहीं शस्त्र पूजन कर शक्ति का परिचय दिया। जिला संघचालक नरेश कुमार ने बताया विजयदशमी के दिन वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। राष्ट्रप्रेम, जीवन मूल्यों के साथ देश के बुजुर्ग, परंपरा का पालन करने तथा उन्हें मजबूती के साथ आगे बढ़ाने के लिए संघ शुरू हुआ था।
हस्पतिवार को जिले के मुंड़ाका खंड, उजीना खंड, पुनहाना नगर, इंडरी खंड, तावडू नगर समेत कई इकाईयों में मंडल स्तर पर समाज के सहयोग से सौ वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम आयोजित किए। मुंड़ाका गांव में पथ संचलन का आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। गांव में प्रवेश करते ही स्वयंसेवकों पर ग्रामीणों ने फूलों की वर्षा की। सरपंच प्रतिनिधि रामकिशोर सैनी की अगुवाई में जगह-जगह स्वागत किया गया और हर नुक्कड़-चौराहे पर जय श्रीराम के उद्घोष गूंजे।
विशाल वट वृक्ष बना संगठनइस सौ वर्ष की अपनी विकास यात्रा में संघ ने अनेक प्रकार के सकारात्मक और नकारात्मक माहौल का सामना करते हुए आज एक विशाल वट वृक्ष के रूप में अपने आप को स्थापित किया है। संघ को विश्व का सबसे बड़ा गैर राजनीतिक संगठन बनाने में स्वयंसेवकों की कई पीढि़यां खप गई लेकिन उनके इस बलिदान व संघर्ष तथा सतत प्रक्रिया के फलस्वरूप आज पूरे विश्व की निगाहें संघ के ऊपर रहती हैं। संघ के स्वयंसेवक आज प्रत्येक क्षेत्र में काम करते हुए सिर्फ भारत माता की जय के अपने संकल्प को लगातार आगे बढ़ा रहे है। बृ
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संघर्षों में उभरे तेजी से
अपने सौ वर्ष की यात्रा में आरएसएस ने तीन बार अपने ऊपर प्रतिबंध झेले हैं। इनमें आपातकाल के समय संघ के स्वयंसेवकों के साथ जो अत्याचार किए, उन्हें जो यातनाएं दी, उन्हें याद कर आज भी आत्मा कांप जाती है। संघ के स्वयंसेवकों ने प्रतिबंधों को सहज रूप से लेते हुए दोगुनी शक्ति से अपने आप को फिर से समाज के बीच खड़ा किया। जिसका परिणाम आज ये है कि संघ के प्रयासों से आज पूरी दुनिया की निगाह भारत माता के प्रति सम्मान व आदर की रहती है।
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नूंह। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साै वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वीरवार को जिलेभर में कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में कहीं पथ संचलन तो कहीं शस्त्र पूजन कर शक्ति का परिचय दिया। जिला संघचालक नरेश कुमार ने बताया विजयदशमी के दिन वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। राष्ट्रप्रेम, जीवन मूल्यों के साथ देश के बुजुर्ग, परंपरा का पालन करने तथा उन्हें मजबूती के साथ आगे बढ़ाने के लिए संघ शुरू हुआ था।
हस्पतिवार को जिले के मुंड़ाका खंड, उजीना खंड, पुनहाना नगर, इंडरी खंड, तावडू नगर समेत कई इकाईयों में मंडल स्तर पर समाज के सहयोग से सौ वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम आयोजित किए। मुंड़ाका गांव में पथ संचलन का आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। गांव में प्रवेश करते ही स्वयंसेवकों पर ग्रामीणों ने फूलों की वर्षा की। सरपंच प्रतिनिधि रामकिशोर सैनी की अगुवाई में जगह-जगह स्वागत किया गया और हर नुक्कड़-चौराहे पर जय श्रीराम के उद्घोष गूंजे।
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विशाल वट वृक्ष बना संगठनइस सौ वर्ष की अपनी विकास यात्रा में संघ ने अनेक प्रकार के सकारात्मक और नकारात्मक माहौल का सामना करते हुए आज एक विशाल वट वृक्ष के रूप में अपने आप को स्थापित किया है। संघ को विश्व का सबसे बड़ा गैर राजनीतिक संगठन बनाने में स्वयंसेवकों की कई पीढि़यां खप गई लेकिन उनके इस बलिदान व संघर्ष तथा सतत प्रक्रिया के फलस्वरूप आज पूरे विश्व की निगाहें संघ के ऊपर रहती हैं। संघ के स्वयंसेवक आज प्रत्येक क्षेत्र में काम करते हुए सिर्फ भारत माता की जय के अपने संकल्प को लगातार आगे बढ़ा रहे है। बृ
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संघर्षों में उभरे तेजी से
अपने सौ वर्ष की यात्रा में आरएसएस ने तीन बार अपने ऊपर प्रतिबंध झेले हैं। इनमें आपातकाल के समय संघ के स्वयंसेवकों के साथ जो अत्याचार किए, उन्हें जो यातनाएं दी, उन्हें याद कर आज भी आत्मा कांप जाती है। संघ के स्वयंसेवकों ने प्रतिबंधों को सहज रूप से लेते हुए दोगुनी शक्ति से अपने आप को फिर से समाज के बीच खड़ा किया। जिसका परिणाम आज ये है कि संघ के प्रयासों से आज पूरी दुनिया की निगाह भारत माता के प्रति सम्मान व आदर की रहती है।