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Gurugram News: बीमा कंपनी को 36.53 लाख नौ फीसदी ब्याज के साथ देने का आदेश
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कोरोना के कारण हुई थी मौत, कंपनी ने आवेदन कर दिया था खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने काेरोना की चपेट में आने के दौरान कार्डियक अरेस्ट से मरीज की मौत के मामले में बीमा कंपनी को 36.53 लाख रुपये नौ फीसदी ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को होने वाली परेशानी पर पांच लाख रुपये और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च 55 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
सेक्टर-83 निवासी अर्चिता श्रीवास्तव ने आयोग में दी शिकायत में बताया कि पति निखिल सक्सेना अप्रैल 2021 में बीमार हो गए थे। इसके बाद पति को एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। 30 अप्रैल को कोरोना के चलते उनकी मौत हो गई थी। अस्पताल की तरफ से उनकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया था। उन्होंने बीमा कंपनी में क्लेम के लिए आवेदन किया। उनका आवेदन खारिज करते हुए कंपनी ने कहा कि यह बीमारी उनके द्वारा ली गई बीमा पालिसी के तहत नहीं आती है। पालिसी के तहत कंपनी हार्ट अटैक से मृत्यु होने पर क्लेम देती है। पूरे मामले को आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल, सदस्य ज्योति सिवाच व सदस्य खुशविंदर कौर ने सुना। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह नौ प्रतिशत की दर से 36,53,453 रुपये दें। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए पांच लाख रुपये और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 55 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने काेरोना की चपेट में आने के दौरान कार्डियक अरेस्ट से मरीज की मौत के मामले में बीमा कंपनी को 36.53 लाख रुपये नौ फीसदी ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को होने वाली परेशानी पर पांच लाख रुपये और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च 55 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
सेक्टर-83 निवासी अर्चिता श्रीवास्तव ने आयोग में दी शिकायत में बताया कि पति निखिल सक्सेना अप्रैल 2021 में बीमार हो गए थे। इसके बाद पति को एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। 30 अप्रैल को कोरोना के चलते उनकी मौत हो गई थी। अस्पताल की तरफ से उनकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया था। उन्होंने बीमा कंपनी में क्लेम के लिए आवेदन किया। उनका आवेदन खारिज करते हुए कंपनी ने कहा कि यह बीमारी उनके द्वारा ली गई बीमा पालिसी के तहत नहीं आती है। पालिसी के तहत कंपनी हार्ट अटैक से मृत्यु होने पर क्लेम देती है। पूरे मामले को आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल, सदस्य ज्योति सिवाच व सदस्य खुशविंदर कौर ने सुना। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह नौ प्रतिशत की दर से 36,53,453 रुपये दें। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए पांच लाख रुपये और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 55 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
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