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Gurugram News: शिक्षा की जमीनी हकीकत, बच्चों व मास्टरजी को बैठने के लिए छत नहीं

Thu, 27 Feb 2025 12:32 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2025 12:32 AM IST
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Ground reality of education, no roof for children and teachers to sit
- दर्जनभर से अधिक गांवों में बिना भवन के संचालित हो रहे स्कूल, जिम्मेदार नहीं देते ध्यान
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रिजवान खान
नगीना। शिक्षा के क्षेत्र में जिले को आगे बढ़ाने के लिए सरकार भले ही लाखों दावे कर रही हो लेकिन, बिना भवन के चल रहे दर्जनों स्कूल सभी दावों की पोल खोल रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में दर्जनभर से अधिक स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। नगीना खंड के झिमरावट गांव में तीन स्कूल तो ऐसे हैं जिनका न तो अपना कोई भवन है और न ही शिक्षक के बैठने की कोई जगह है। बावजूद इसके यहां सरकारी स्कूल चलाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों के अलावा यहां विभाग का कोई अधिकारी नहीं आता। सैकड़ों बच्चे खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई करते हैं। बरसात के मौसम में बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। जिससे बच्चों को काफी नुकसान होता है।
बंदरबास में स्कूल भवन न होने से छोटे-छोटे बच्चे चौपाल पर खुली जगह में पढ़ाई करते हैं। यहां चौपाल में मात्र दो कमरे हैं और 300 से अधिक बच्चे पढ़ने आते हैं। जिससे बच्चों को बाहर बैठना पड़ता है।
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दौलतबास में भी किराये के कमरे में 200 से अधिक बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। गर्मी के मौसम में टिन शेड के नीचे बच्चे बैठ नहीं पाते हैं जिससे उनकी छुट्टी कर दी जाती है। बलैई गांव में मिडिल स्कूल भी पांच वर्ष से जर्जर है। इसे पीडब्ल्यूडी विभाग ने अयोग्य घोषित कर दिया था। पंचायत व स्कूल की ओर से दर्जनों बार विभाग को अवगत कराया जा चुका है इसके बाद भी स्कूल के भवन को ठीक नहीं किया गया है।
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इन 14 गांवों में नहीं हैं स्कूल भवन
ढाणा ग्राम पंचायत के चंद्रु का बास व बुद्धाबास, बुचाका ग्राम पंचायत के घटवासन, तिगांव के सिरसबास, बडेड के लट्ठमारबास, दोहा के मालिबास, महूं के लटूरबास, बुबलहेडी के कालूबास, रावली के कुबड़ाबास, ऐंचवाड़ी के खेड़ाबास, झिमरावट गांव के पड़ावदियाबास व दौलतबास व बंदरबास इसके अलावा बलैई गांव में भवन नहीं है।


विभाग के अधिकारियों के अनुसार 13 से 14 स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। जिनकी रिपोर्ट मांग कर उनका डिमांड लेटर बनवाने की तैयारी की जा रही है।
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पूरे जिले में दर्जनों गांव ऐसे हैं जिनमें स्कूल बिना भवन के चलाए जा रहे हैं। हमारी सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द स्कूल भवन बनाकर तैयार किए जाएं। - सरीफ पहलवान, गंगवानी।
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5 साल पहले गांव के मिडिल स्कूल का भवन जर्जर हो गया था। जिसका प्रस्ताव कई बार विभाग के अधिकारियों को भेजा गया। लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। अब अगर जल्द ही स्कूल भवन नहीं बनाया गया तो स्कूल में ताला जड़ दिया जाएगा। जुनैद खान, बलैई।
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सरकार की अनदेखी के चलते स्कूल भवन न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बिना भवन के बच्चों की पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। सरकार को इस ओर ध्यान देकर जल्द से जल्द समस्या का समाधान करना चाहिए। -सैय्यद फिरोज, खानपुर घाटी।
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चुनाव के दौरान नेता दावे और वादे तो ऐसे करते हैं। लेकिन सरकार बनने के बाद हालात जस के तस बने रहते हैं। -मुबारिक, अटेरना।
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वर्जन
पूरे प्रदेशभर में बिना भवन के चलाए जा रहे स्कूलों के लिए 123 करोड़ की राशि मंजूर हुई है। जिनमें जिले के भी कई गांवों में स्कूल भवन बनाए जाएंगे। विभाग की बैठक में पता चला है कि 14 स्कूल बिना भवन के चलाए जा रहे हैं। जल्दी ही रिपोर्ट मंगाई गई है और सभी गांवों का दौरा कर निरीक्षण किया जाएगा। -अजित सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी नूंह।
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