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डेल्टा प्लस वैरिएंट की जांच के लिए नमूनों की जीनोम सीक्वेसिंग पर जोर
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गुरुग्राम (पंकज मोहन मिश्रा)। कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट का अब तक जिले में एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। योजना के तहत जांच की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि मरीजों की समय रहते पहचान हो सके। वहीं, इसकी जांच के लिए विभाग द्वारा इसके 5 फीसदी नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है है।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. जयप्रकाश ने बताया कि जीनोम सीक्वेसिंग के लिए माह भर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के 30 नमूने पीजीआई रोहतक भेजे जा रहे हैं। यहां से प्रदेश भर के सभी जिलों से आए नमूनों को एकत्र कर कोरोना के नए वैरिएंट की जांच के लिए दिल्ली लैब में भेजा जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल दिसंबर से ही यह प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जब ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन की बात सामने आई थी। अब जीनोम सीक्वेसिंग पर खासा ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि डेल्टा प्लस वैरिएंट का पता लगाने के लिए यह एक अहम जरिया है।
स्वास्थ्य विभाग के पास रहती है पूरी डिटेल
जिन मरीजों के नमूने जीनोम सीक्वेसिंग के लिए भेजे जा रहे हैं, उनकी स्वास्थ्य विभाग के पास विस्तृत जानकारी रहती है। ऐसा इसलिए ताकि डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि होते ही संबंधित मरीज से तुरंत संपर्क किया जा सके। पिछले साल ब्रिटेन में मिले नए स्ट्रेन के बारे में पूछने पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आधिकारिक तौर पर जिले में नए स्ट्रेन से पीड़ित सिर्फ एक ही मरीज आया था और वह भी बाद में स्वस्थ हो गया था। वहीं, परिजनों के नमूनों की भी जांच की गई थी लेकिन सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई थी।
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तीसरी लहर के लिए ये हैं तैयारियां
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कोरोना की तीसरी लहर को भी ध्यान में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। योजना के मुताबिक शहरी इलाकों में बने अस्थाई अस्पतालों के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी इसी तरीके से अस्पतालों में ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन युक्त बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी। वहीं, तीसरी लहर में बच्चों के लिए संभावित खतरे को देखते हुए सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल के साथ ही ग्रामीण इलाकों के उपमंडल अस्पतालों में भी बच्चों के लिए विशेष वार्ड बनाए जाएंगे। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच करने के लिए निर्देशित किया गया है।
जिले में यह है टीकाकरण की स्थिति
कोरोना टीकाकरण के मामले में शुरुआत से ही गुुरुग्राम प्रदेश में पहले पायदान पर रहा है। अभी तक जिले में कुल 12 लाख 97 हजार 198 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। वहीं, पूरे प्रदेश में 70 लाख 43 हजार 821 लोगों को वैक्सीन लगी है, जिसमें से 83 लाख 15 हजार 519 को पहली व 12 लाख 71 हजार 698 लोगों को टीके की दूसरी डोज लगाई गई है।
दूसरी लहर की प्रमुख वजहों में ये भी शामिल
नारायणा अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. सतीश कौल के मुताबिक, पिछले साल अक्तूबर में डेल्टा वैरिएंट भारत में आया था और माना जा सकता है कि यह दूसरी लहर की प्रमुख वजहों में से एक रहा होगा। हालांकि, पुख्ता तौर पर इसलिए नहीं कहा जा सकता क्योंकि भारत में जीनोम सीक्वेंसिंग बहुत कम स्तर पर होती है, जिससे इसकी पुष्टि की जा सके।
इलाज को लेकर नहीं मिल हैं दिशा निर्देश
डेल्टा से पीड़ित मरीजों के अलग प्रबंधन की बात पर डॉ. सतीष कौल ने बताया कि अभी तक सरकार की तरफ से इस बारे में कोई दिशानिर्देश नहीं मिले हैं। दवाओं की बात करें तो मोनोक्लोनल एंटीबाडी कोरोना के अन्य वैरिएंट्स के मुकाबले डेल्टा पर कम असर करती हैं। हालांकि, वैक्सीन के दोनों डोज लग जाने के दो हफ्ते बाद से अन्य वैरिएंट्स की तरह डेल्टा के संक्रमण से भी सुरक्षा मिलती है।
डेल्टा प्लस वैरिएंट के कई ऐसे कारण हैं जिसकी वजह से चिंता बढ़ जाती है। पहला कारण यह है कि इस वायरस का वैरिएंट बहुत ज्यादा संक्रामक है। इससे फेफड़ों की कोशिकाओं के लिए खतरा बढ़ जाता है, जिससे ज्यादा गंभीर बीमारी जन्म ले सकती है। तीसरा कारण मोनोक्लोनल एंटीबॉडी इस पर कम प्रभावी है। अगर तीसरी लहर आती है तो यह ज्यादा फैल सकता है और साथ ही स्वास्थ्य संबंधी ज्यादा गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
- डॉ. शुचिन बजाज, फाउंडर, उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल
डेल्टा प्लस वैरिएंट का अभी तक कोई भी मामला नहीं आया है। इसकी जांच के लिए शुरुआत से ही हम 5 फीसदी नमूनों की जीनोम सीक्वेसिंग कर रहे हैं। लोगों से अपील है कि अनिवार्य रूप से सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजेशन समेत अन्य कोरोना बचाव नियमों का पालन करें।
- डॉ. वीरेंद्र यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गुरुग्राम
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जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. जयप्रकाश ने बताया कि जीनोम सीक्वेसिंग के लिए माह भर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के 30 नमूने पीजीआई रोहतक भेजे जा रहे हैं। यहां से प्रदेश भर के सभी जिलों से आए नमूनों को एकत्र कर कोरोना के नए वैरिएंट की जांच के लिए दिल्ली लैब में भेजा जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल दिसंबर से ही यह प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जब ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन की बात सामने आई थी। अब जीनोम सीक्वेसिंग पर खासा ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि डेल्टा प्लस वैरिएंट का पता लगाने के लिए यह एक अहम जरिया है।
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स्वास्थ्य विभाग के पास रहती है पूरी डिटेल
जिन मरीजों के नमूने जीनोम सीक्वेसिंग के लिए भेजे जा रहे हैं, उनकी स्वास्थ्य विभाग के पास विस्तृत जानकारी रहती है। ऐसा इसलिए ताकि डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि होते ही संबंधित मरीज से तुरंत संपर्क किया जा सके। पिछले साल ब्रिटेन में मिले नए स्ट्रेन के बारे में पूछने पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आधिकारिक तौर पर जिले में नए स्ट्रेन से पीड़ित सिर्फ एक ही मरीज आया था और वह भी बाद में स्वस्थ हो गया था। वहीं, परिजनों के नमूनों की भी जांच की गई थी लेकिन सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई थी।
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तीसरी लहर के लिए ये हैं तैयारियां
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कोरोना की तीसरी लहर को भी ध्यान में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। योजना के मुताबिक शहरी इलाकों में बने अस्थाई अस्पतालों के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी इसी तरीके से अस्पतालों में ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन युक्त बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी। वहीं, तीसरी लहर में बच्चों के लिए संभावित खतरे को देखते हुए सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल के साथ ही ग्रामीण इलाकों के उपमंडल अस्पतालों में भी बच्चों के लिए विशेष वार्ड बनाए जाएंगे। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच करने के लिए निर्देशित किया गया है।
जिले में यह है टीकाकरण की स्थिति
कोरोना टीकाकरण के मामले में शुरुआत से ही गुुरुग्राम प्रदेश में पहले पायदान पर रहा है। अभी तक जिले में कुल 12 लाख 97 हजार 198 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। वहीं, पूरे प्रदेश में 70 लाख 43 हजार 821 लोगों को वैक्सीन लगी है, जिसमें से 83 लाख 15 हजार 519 को पहली व 12 लाख 71 हजार 698 लोगों को टीके की दूसरी डोज लगाई गई है।
दूसरी लहर की प्रमुख वजहों में ये भी शामिल
नारायणा अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. सतीश कौल के मुताबिक, पिछले साल अक्तूबर में डेल्टा वैरिएंट भारत में आया था और माना जा सकता है कि यह दूसरी लहर की प्रमुख वजहों में से एक रहा होगा। हालांकि, पुख्ता तौर पर इसलिए नहीं कहा जा सकता क्योंकि भारत में जीनोम सीक्वेंसिंग बहुत कम स्तर पर होती है, जिससे इसकी पुष्टि की जा सके।
इलाज को लेकर नहीं मिल हैं दिशा निर्देश
डेल्टा से पीड़ित मरीजों के अलग प्रबंधन की बात पर डॉ. सतीष कौल ने बताया कि अभी तक सरकार की तरफ से इस बारे में कोई दिशानिर्देश नहीं मिले हैं। दवाओं की बात करें तो मोनोक्लोनल एंटीबाडी कोरोना के अन्य वैरिएंट्स के मुकाबले डेल्टा पर कम असर करती हैं। हालांकि, वैक्सीन के दोनों डोज लग जाने के दो हफ्ते बाद से अन्य वैरिएंट्स की तरह डेल्टा के संक्रमण से भी सुरक्षा मिलती है।
डेल्टा प्लस वैरिएंट के कई ऐसे कारण हैं जिसकी वजह से चिंता बढ़ जाती है। पहला कारण यह है कि इस वायरस का वैरिएंट बहुत ज्यादा संक्रामक है। इससे फेफड़ों की कोशिकाओं के लिए खतरा बढ़ जाता है, जिससे ज्यादा गंभीर बीमारी जन्म ले सकती है। तीसरा कारण मोनोक्लोनल एंटीबॉडी इस पर कम प्रभावी है। अगर तीसरी लहर आती है तो यह ज्यादा फैल सकता है और साथ ही स्वास्थ्य संबंधी ज्यादा गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
- डॉ. शुचिन बजाज, फाउंडर, उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल
डेल्टा प्लस वैरिएंट का अभी तक कोई भी मामला नहीं आया है। इसकी जांच के लिए शुरुआत से ही हम 5 फीसदी नमूनों की जीनोम सीक्वेसिंग कर रहे हैं। लोगों से अपील है कि अनिवार्य रूप से सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजेशन समेत अन्य कोरोना बचाव नियमों का पालन करें।
- डॉ. वीरेंद्र यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गुरुग्राम