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Gurugram News: शूटिंग से सीधे जिला परिषद का कार्यालय पहुंचे थे धर्मेंद्र

Tue, 25 Nov 2025 12:34 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 25 Nov 2025 12:34 AM IST
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Dharmendra reached the Zila Parishad office directly from the shooting.
संवाद न्यूज एजेंसी
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गुरुग्राम। बॉलीवुड के सदाबहार हीरो, देसी स्टाइल के असली ही-मैन और लाखों दिलों की धड़कन धर्मेन्द्र अब हमारे बीच नहीं रहे। धर्मेंद्र का गुरुग्राम से पुराना नाता रहा है। उन्होंने साइबर सिटी की कई जगहों पर शूटिंग की है। उनके निधन की खबर सुनकर साइबर सिटी के लोगों ने सोशल मीडिया पर दुख जाहिर करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया ने दुख जताते हुए कहा है कि महान अभिनेता धर्मेंद्र के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। धर्मेंद्र को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके शोकाकुल परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के साथ हैं।

जिला परिषद कार्यालय में पहुंचे थे धर्मेंद
धर्मेन्द्र 2018 में गुरुग्राम के एक चर्च में शूटिंग के लिए आए थे। जहां लोगों ने उन्हें करीब से देखा था। चर्च के पास में ही जिला परिषद का कार्यालय था। वहां भी धर्मेंद्र गए थे। पूर्व जिला पार्षद एवं मौजूदा जिला परिषद की चेयरपर्सन दीपाली चौधरी के पिता दीपचंद ने बताया कि यह वाक्य 2018 का है जब में जिला परिषद कार्यालय के निकट एक चर्च में शूटिंग हो रही थी और शूटिंग के बाद जैसे ही धर्मेन्द्र शूटिंग से फ्री हुए तब मैं उन्हें अपने साथ जिला परिषद कार्यालय में लेकर पहुंचा और उनके साथ उनका बाउंसर भी था।
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गेट तक छोड़ने आए थे

मुझे याद है कि जब मई दिसंबर 1989 से गवर्नमेंट नेशनल कॉलेज, सिरसा से स्टूडेंट्स का एजुकेशनल टूर मुंबई ले कर गया था तो सुबह-सुबह हम धर्मेंद्र के घर पर सभी स्टूडेंट्स के साथ पहुंच गए थे। उस समय उनकी नई फिल्म नाकेबंदी रिलीज हुई थी। उन्होंने सबको कैसेट दी थी और सबको अपने घर के मेन गेट के बाहर तक छोड़ने आए थे।
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-प्रोफेसर सुभाष सपरा
सड़क पर मत फेंको…


सूरजकुंड मेले का व्यस्त समय था। सब अपने-अपने काम में लगे थे, लेकिन उस एक बुलावे ने जैसे थकान को पल भर में धो दिया। जब मिलने निकले थे, उनकी ऊर्जा, उनका प्रेम, हर बात को ध्यान से सुनने और समझने की उनकी उत्सुकता… सब कुछ असाधारण था। ऐसा लगा मानो किसी अपने से मिल रहे हों। वे बार-बार एक ही बात कहते सड़क पर मत फेंको… बस इतना सा संदेश पहुंचा देना। यही उनका संदेश था, और यही हमारे लिए नई प्रेरणा।
-नीरज दहिया, सामाजिक कार्यकर्ता
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