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धनीराम ने एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में जीते तीन मैडल
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धनीराम अपने पदक के साथ
- फोटो : Gurgaon
गुुरुग्राम। जिले के धनीराम ने उत्तराखंड मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए दो स्वर्ण व एक रजत पदक प्राप्त किया है। धनीराम ने 65 आयु वर्ग में 3 हजार वॉक रेस में प्रथम स्थान, 1500 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान और 800 मीटर दौड़ में द्वितीय स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया। यह प्रतियोगिताएं देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में 21 फरवरी को आयोजित हुई थी।
इससे पहले वे 10 और 21 किलोमीटर की 70 मैराथन में दौड़ चुके हैं। उन्होंने प्रदेश में 35 पदक और राष्ट्रीय स्तर पर 24 पदक हासिल किए हैं। 68 वर्षीय धनीराम दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वे मूलत: मानेसर के हैं। इन दिनों गांधीनगर में रह रहे हैं।
वह अपनी प्रतिभा पर भरोसा रखते हुए योग गुरुस्त्रत्त् रामदेव को भी कुश्ती के लिए चैलेंज कर चुके हैं। हालांकि उनका कहना है बाबा रामदेव ने चैलेंज को स्वीकार नहीं किया है। यदि रामदेव उन्हें हराते हैं तो वे अपनी दो एकड़ जमीन उनके नाम कर देंगे।
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पत्नी खेलने के लिए किया प्रेरित, लगाई पुरस्कारों की झड़ी
धनीराम ने बताया कि 22 साल पहले रिटायर होने के बाद वे 2008 तक दुकान पर बैठते थे। उनकी दिवंगत पत्नी को कुश्ती खेलना पसंद था। इस दौरान उनकी पत्नी संतोष यादव ने कहा कि वे इतने हष्ट पुष्ट हैं तो कुश्ती क्यों नहीं खेलते। पत्नी के प्रेरित करने पर उन्होंने अखाड़े की ओर रुख किया। जिसके बाद पुरस्कारों की झड़ी लगाई। धनीराम बताते हैं बेशक वह मुझे छोड़ कर चली गई हैं लेकिन मैं उनकी आत्मा को खुशी देने के लिए जिंदगी भी खेलता रहूंगा।
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इससे पहले वे 10 और 21 किलोमीटर की 70 मैराथन में दौड़ चुके हैं। उन्होंने प्रदेश में 35 पदक और राष्ट्रीय स्तर पर 24 पदक हासिल किए हैं। 68 वर्षीय धनीराम दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वे मूलत: मानेसर के हैं। इन दिनों गांधीनगर में रह रहे हैं।
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वह अपनी प्रतिभा पर भरोसा रखते हुए योग गुरुस्त्रत्त् रामदेव को भी कुश्ती के लिए चैलेंज कर चुके हैं। हालांकि उनका कहना है बाबा रामदेव ने चैलेंज को स्वीकार नहीं किया है। यदि रामदेव उन्हें हराते हैं तो वे अपनी दो एकड़ जमीन उनके नाम कर देंगे।
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पत्नी खेलने के लिए किया प्रेरित, लगाई पुरस्कारों की झड़ी
धनीराम ने बताया कि 22 साल पहले रिटायर होने के बाद वे 2008 तक दुकान पर बैठते थे। उनकी दिवंगत पत्नी को कुश्ती खेलना पसंद था। इस दौरान उनकी पत्नी संतोष यादव ने कहा कि वे इतने हष्ट पुष्ट हैं तो कुश्ती क्यों नहीं खेलते। पत्नी के प्रेरित करने पर उन्होंने अखाड़े की ओर रुख किया। जिसके बाद पुरस्कारों की झड़ी लगाई। धनीराम बताते हैं बेशक वह मुझे छोड़ कर चली गई हैं लेकिन मैं उनकी आत्मा को खुशी देने के लिए जिंदगी भी खेलता रहूंगा।