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Gurugram News: पश्चिमी देशों का मेडिकल विकल्प बना दिल्ली-एनसीआर
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अरब, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों के मरीज पहुंच रहे इलाज कराने, चिकित्सा पर्यटन तीन हजार करोड़ सालाना पहुंचने का अनुमान
प्रति कारपोरेट अस्पताल में प्रतिवर्ष औसतन पहुंच रहे एक हजार मरीज
मूर्ति दलाल
गुरुग्राम। पश्चिमी देशों के मुकाबले अरब, मध्य पूर्व और दक्षिण अफ्रीकी देशों के मरीजों के लिए दिल्ली-एनसीआर मेडिकल हब का नया विकल्प बन रहा है। इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा मानकों पर खरे संस्थानों की संख्या भी बढ़कर 10 हो गई है। यह संस्थान वैश्विक संस्था ज्वाइंट कमिशन इंटरनेशनल (जेसीआई) से मान्यता प्राप्त हैं। जोकि इन मेडिकल संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय स्तरीय चिकित्सा गुणवत्ता का एक प्रमाण है। पूरे देश में जेसीआई मान्यता प्राप्त कुल 54 कारपोरेट संस्थान हैं। मेडिकल क्षेत्र में परामर्श मुहैया कराने वाली एक निजी संस्था के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में चिकित्सा पर्यटन कारोबार प्रतिवर्ष तीन हजार करोड़ रुपये के पार जा चुका है। इसमें खास बात यह है कि इस कुल कारोबार में 40 फीसदी भागीदारी अकेले गुरुग्राम की है।
दिल्ली-एनसीआर में इलाज के लिए अफगानिस्तान, मध्य पूर्व, ईराक, पूर्वी अफ्रीका, तंजानिया, सूडान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, उज्बेकिस्तान के मरीज आते हैं। एनसीआर के ज्यादातर कॉरपोरेट अस्पतालों में औसतन एक वर्ष में एक हजार से अधिक लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मात्र गुरुग्राम में मौजूदा समय में हर वर्ष लगभग चार हजार लोग चिकित्सा लाभ के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञ इसका कारण पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत के दिल्ली-एनसीआर में इलाज दस गुना तक सस्ता होना मान रहे हैं। इससे देश में एक ओर जहां नई-नई तकनीक से इलाज की पद्धतियां शुरू हो गई हैं, वहीं देश के विदेशी मुद्रा कोष में भी इजाफा हो रहा है।
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दक्षिण और उत्तर भारत ने जमाई चिकित्सा क्षेत्र में धमक
चिकित्सा विशेषज्ञ और सर्वोदय अस्पताल के निदेशक अमित अग्रवाल बताते हैं कि पश्चिमी देशों के मुकाबले दिल्ली-एनसीआर में चिकित्सा खर्च केवल दस प्रतिशत है। पहले दक्षिण भारत में लोग चिकित्सा पर्यटन के लिए पहुंचते थे। अब दिल्ली एनसीआर में इसकी धमक बढ़ी है। अमित बताते हैं कि करीब तीन से चार घंटे में लोग हवाई सफर से यहां पहुंच जाते हैं। सरकार ने चिकित्सा पर्यटन में बढ़त बनाने पर जोर देना शुरू किया है। इस कारण सभी अस्पतालों को नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन (एनबीए) मान्यता हासिल करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि पूर्व अफ्रीका के लोग अभी भी फ्रांस में इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं। पश्चिमी अफ्रीका के लोग यात्रा सहूलियत सहित कुछ अन्य कारणों से दक्षिण भारत की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं। अपोलो, मैक्स के अलावा फोर्टिस और मेदांता जैसे अस्पतालों के अलावा अन्य कई संस्थानों में चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र उत्तर भारत में फैला है।
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इन मुख्य बीमारियों के इलाज के लिए पहुंच रहे विदेशी मरीज
घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण, अंग प्रत्यारोपण, न्यूरो सर्जरी, कोर्नरी आर्टरी बाइपास सर्जरी (सीएबीजी), ओन्को यानी कैंसर का उपचार और वाल्व प्रतिस्थापन।
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इन देशों के मरीज ले रहे चिकित्सा पर्यटन का ज्यादा लाभ
मध्य पूर्व क्षेत्र से अरब देश ईरान, सीरिया, सऊदी अरबिया, लेबनाल, ईराक, यमन, जोर्डन, टर्की, यूनाइटेड अरब अमिरात, अफ्रीका महाद्वीप और सार्क देश जैसे अफगानिस्तान, मालदीव, पाकिस्तान, श्रीलंका, भूटान।
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डॉलर या विदेशी मुद्रा कार्ड से सरल हो रहा भुगतान
विदेशी मरीजों की सुविधा के लिए लगभग कॉरपोरेट अस्पतालों में परेशानी मुक्त लेनदेन की सुविधा उपलब्ध है। यहां विदेशी मरीज अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) और विदेशी मुद्रा कार्ड जैसे फोरेक्स के माध्यम से भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में विदेश में उपचार के बावजूद वह भुगतान या अन्य परेशानी का सामना करने से बच जाते हैं।
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कॉरपोरेट अस्पतालों के प्रतिनिधि बोले
पारस अस्पताल की निदेशक सीमा विज ने बताया कि आर्थोपेडिक, ब्रेन और स्पाइन सर्जरी के लिए औसतन एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। फोर्टिस अस्पताल के सीओओ अनिल विनायक ने कहा कि ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण, न्यूरो-स्पाइन सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और जटिल हृदय सर्जरी के लिए अंतरराष्ट्रीय मरीज दिल्ली-गुरुग्राम पहुंच रहे हैं। मणिपाल अस्पताल की सीएमएस डॉ. मेघा रिछारिया ने बताया कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय मरीजों को उपचार देने के लिए एक खास विंग काम पर लगाई गई है।
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प्रति कारपोरेट अस्पताल में प्रतिवर्ष औसतन पहुंच रहे एक हजार मरीज
मूर्ति दलाल
गुरुग्राम। पश्चिमी देशों के मुकाबले अरब, मध्य पूर्व और दक्षिण अफ्रीकी देशों के मरीजों के लिए दिल्ली-एनसीआर मेडिकल हब का नया विकल्प बन रहा है। इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा मानकों पर खरे संस्थानों की संख्या भी बढ़कर 10 हो गई है। यह संस्थान वैश्विक संस्था ज्वाइंट कमिशन इंटरनेशनल (जेसीआई) से मान्यता प्राप्त हैं। जोकि इन मेडिकल संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय स्तरीय चिकित्सा गुणवत्ता का एक प्रमाण है। पूरे देश में जेसीआई मान्यता प्राप्त कुल 54 कारपोरेट संस्थान हैं। मेडिकल क्षेत्र में परामर्श मुहैया कराने वाली एक निजी संस्था के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में चिकित्सा पर्यटन कारोबार प्रतिवर्ष तीन हजार करोड़ रुपये के पार जा चुका है। इसमें खास बात यह है कि इस कुल कारोबार में 40 फीसदी भागीदारी अकेले गुरुग्राम की है।
दिल्ली-एनसीआर में इलाज के लिए अफगानिस्तान, मध्य पूर्व, ईराक, पूर्वी अफ्रीका, तंजानिया, सूडान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, उज्बेकिस्तान के मरीज आते हैं। एनसीआर के ज्यादातर कॉरपोरेट अस्पतालों में औसतन एक वर्ष में एक हजार से अधिक लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मात्र गुरुग्राम में मौजूदा समय में हर वर्ष लगभग चार हजार लोग चिकित्सा लाभ के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञ इसका कारण पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत के दिल्ली-एनसीआर में इलाज दस गुना तक सस्ता होना मान रहे हैं। इससे देश में एक ओर जहां नई-नई तकनीक से इलाज की पद्धतियां शुरू हो गई हैं, वहीं देश के विदेशी मुद्रा कोष में भी इजाफा हो रहा है।
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दक्षिण और उत्तर भारत ने जमाई चिकित्सा क्षेत्र में धमक
चिकित्सा विशेषज्ञ और सर्वोदय अस्पताल के निदेशक अमित अग्रवाल बताते हैं कि पश्चिमी देशों के मुकाबले दिल्ली-एनसीआर में चिकित्सा खर्च केवल दस प्रतिशत है। पहले दक्षिण भारत में लोग चिकित्सा पर्यटन के लिए पहुंचते थे। अब दिल्ली एनसीआर में इसकी धमक बढ़ी है। अमित बताते हैं कि करीब तीन से चार घंटे में लोग हवाई सफर से यहां पहुंच जाते हैं। सरकार ने चिकित्सा पर्यटन में बढ़त बनाने पर जोर देना शुरू किया है। इस कारण सभी अस्पतालों को नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन (एनबीए) मान्यता हासिल करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि पूर्व अफ्रीका के लोग अभी भी फ्रांस में इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं। पश्चिमी अफ्रीका के लोग यात्रा सहूलियत सहित कुछ अन्य कारणों से दक्षिण भारत की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं। अपोलो, मैक्स के अलावा फोर्टिस और मेदांता जैसे अस्पतालों के अलावा अन्य कई संस्थानों में चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र उत्तर भारत में फैला है।
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इन मुख्य बीमारियों के इलाज के लिए पहुंच रहे विदेशी मरीज
घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण, अंग प्रत्यारोपण, न्यूरो सर्जरी, कोर्नरी आर्टरी बाइपास सर्जरी (सीएबीजी), ओन्को यानी कैंसर का उपचार और वाल्व प्रतिस्थापन।
इन देशों के मरीज ले रहे चिकित्सा पर्यटन का ज्यादा लाभ
मध्य पूर्व क्षेत्र से अरब देश ईरान, सीरिया, सऊदी अरबिया, लेबनाल, ईराक, यमन, जोर्डन, टर्की, यूनाइटेड अरब अमिरात, अफ्रीका महाद्वीप और सार्क देश जैसे अफगानिस्तान, मालदीव, पाकिस्तान, श्रीलंका, भूटान।
डॉलर या विदेशी मुद्रा कार्ड से सरल हो रहा भुगतान
विदेशी मरीजों की सुविधा के लिए लगभग कॉरपोरेट अस्पतालों में परेशानी मुक्त लेनदेन की सुविधा उपलब्ध है। यहां विदेशी मरीज अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) और विदेशी मुद्रा कार्ड जैसे फोरेक्स के माध्यम से भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में विदेश में उपचार के बावजूद वह भुगतान या अन्य परेशानी का सामना करने से बच जाते हैं।
कॉरपोरेट अस्पतालों के प्रतिनिधि बोले
पारस अस्पताल की निदेशक सीमा विज ने बताया कि आर्थोपेडिक, ब्रेन और स्पाइन सर्जरी के लिए औसतन एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। फोर्टिस अस्पताल के सीओओ अनिल विनायक ने कहा कि ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण, न्यूरो-स्पाइन सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और जटिल हृदय सर्जरी के लिए अंतरराष्ट्रीय मरीज दिल्ली-गुरुग्राम पहुंच रहे हैं। मणिपाल अस्पताल की सीएमएस डॉ. मेघा रिछारिया ने बताया कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय मरीजों को उपचार देने के लिए एक खास विंग काम पर लगाई गई है।