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रायसीना के नाम पर बेच दी गैरतपुर बास की पंचायती जमीन
Updated Thu, 31 May 2018 11:35 PM IST
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रायसीना के नाम पर बेच दी गैरतपुर बास की पंचायती जमीन
क्रॉसर
-उपायुक्त को भेजी रिपोर्ट में नायब तहसीलदार ने किया जिक्र
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम में एक और जमीन घोटाले सामने आया है। इसमें कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। मुख्यमंत्री को दी शिकायत की जांच में सामने आया है कि गैरतपुर बास की 46 एकड़ पंचायती जमीन को निजी बिल्डर को बेच दिया गया। गैरतपुर की जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए बगल के गांव रायसीना की जमीन को दिखाया गया है। नायब तहसीलदार बादशाहपुर द्वारा उपायुक्त को भेजी गई रिपोर्ट में इसका जिक्र है। सीएम विंडो पर दी शिकायत के बाद इस मामले में उपायुक्त को एफआईआर करने का निर्देश दिया गया है।
इस बाबत सेक्टर-14 निवासी निवासी अधिवक्ता आरएल नरूला ने सीएम विंडो में शिकायत दी थी। जांच में पाया गया है कि खसरा नंबर 188,189,190,191, 200 से 202 तक की जमीन पर अवैध कब्जा किया जा चुका है। इस खेल में राजस्व विभाग से लेकर पंचायत विभाग के कई अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे हैं। अधिवक्ता आरएल नरुला का कहना है कि करीब दो सौ करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाली पंचायती जमीन को बिल्डरों के हवाले तत्कालीन पंचायत व विभागीय अधिकारियों ने मिलीभगत करके किया था। वर्ष 2006 में पहली बार इसकी शिकायत की गई थी। जांच कई बार हुई पर अब तक किसी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। अब रिपोर्ट में कहा गया है कि इन खसरा नंबर की जमीन पर अवैध कब्जे हैं। 12 मई को अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इस बारे में एफआईआर के आदेश दिए हैं, लेकिन अब तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।
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-उपायुक्त को भेजी रिपोर्ट में नायब तहसीलदार ने किया जिक्र
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम में एक और जमीन घोटाले सामने आया है। इसमें कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। मुख्यमंत्री को दी शिकायत की जांच में सामने आया है कि गैरतपुर बास की 46 एकड़ पंचायती जमीन को निजी बिल्डर को बेच दिया गया। गैरतपुर की जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए बगल के गांव रायसीना की जमीन को दिखाया गया है। नायब तहसीलदार बादशाहपुर द्वारा उपायुक्त को भेजी गई रिपोर्ट में इसका जिक्र है। सीएम विंडो पर दी शिकायत के बाद इस मामले में उपायुक्त को एफआईआर करने का निर्देश दिया गया है।
इस बाबत सेक्टर-14 निवासी निवासी अधिवक्ता आरएल नरूला ने सीएम विंडो में शिकायत दी थी। जांच में पाया गया है कि खसरा नंबर 188,189,190,191, 200 से 202 तक की जमीन पर अवैध कब्जा किया जा चुका है। इस खेल में राजस्व विभाग से लेकर पंचायत विभाग के कई अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे हैं। अधिवक्ता आरएल नरुला का कहना है कि करीब दो सौ करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाली पंचायती जमीन को बिल्डरों के हवाले तत्कालीन पंचायत व विभागीय अधिकारियों ने मिलीभगत करके किया था। वर्ष 2006 में पहली बार इसकी शिकायत की गई थी। जांच कई बार हुई पर अब तक किसी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। अब रिपोर्ट में कहा गया है कि इन खसरा नंबर की जमीन पर अवैध कब्जे हैं। 12 मई को अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इस बारे में एफआईआर के आदेश दिए हैं, लेकिन अब तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।
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