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तहसीलदारों व कर्मचारियों की आय व संपति की भी जांच करे सरकार
Updated Thu, 06 Dec 2018 05:07 PM IST
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आरोपी तहसीलदारों की संपत्ति की जांच कराने की मांग
गुरुग्राम। मानेसर तहसील में 2009 से 2012 तक 53 रजिस्ट्री में हेरफेर कर 5 करोड़ से अधिक के स्टांप घोटाले का पर्दाफाश करने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं के समूह अधिकार ने सिविल लाइन स्थित एक निजी होटल में पत्रकारवार्ता कर आरोपी तहसीलदारों व अन्य तहसील कर्मियों की आय व संपत्ति की जांच करवाने की मांग की। उन्होंने इस मामले में कोर्ट की शरण लेकर 7 तहसीलदार समेत 31 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है।
आरटीआई कार्यकर्ता ओम प्रकाश, हरेंद्र ढींगड़ा, ओपी कटारिया सहित अन्य ने बताया कि न्यायालय की शरण में जाने के ढाई साल बाद वे इस घोटाले में एक कदम आगे बढ़ पाए हैं। पुलिस ने अदालत के आदेश पर केस दर्ज कर लिया है। कहा गया कि अदालत में याचिका दायर करने के बाद उन्होंने इतने सबूत लगाए हैं, जो आरोपियों को गुनहगार साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में संलिप्त रहे सभी 6 तहसीलदारों की अगर संपत्ति की जांच करवाई जाए तो वो कम से कम 100 करोड़ की निकलेगी। कहा गया, एक अधिकारी की संपत्ति तो 1700 करोड़ रुपये से अधिक की है।
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पत्रकारवार्ता के बाद उन्होंने पुलिस आयुक्त से मुलाकात की। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच तेजी से और सक्षम अधिकारी से करवाई जाए। मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से मामले में संलिप्त सभी अधिकारियों की संपत्ति की जांच करवाने की मांग की। आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी करने की भी उन्होंने मांग की।
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गुरुग्राम। मानेसर तहसील में 2009 से 2012 तक 53 रजिस्ट्री में हेरफेर कर 5 करोड़ से अधिक के स्टांप घोटाले का पर्दाफाश करने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं के समूह अधिकार ने सिविल लाइन स्थित एक निजी होटल में पत्रकारवार्ता कर आरोपी तहसीलदारों व अन्य तहसील कर्मियों की आय व संपत्ति की जांच करवाने की मांग की। उन्होंने इस मामले में कोर्ट की शरण लेकर 7 तहसीलदार समेत 31 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है।
आरटीआई कार्यकर्ता ओम प्रकाश, हरेंद्र ढींगड़ा, ओपी कटारिया सहित अन्य ने बताया कि न्यायालय की शरण में जाने के ढाई साल बाद वे इस घोटाले में एक कदम आगे बढ़ पाए हैं। पुलिस ने अदालत के आदेश पर केस दर्ज कर लिया है। कहा गया कि अदालत में याचिका दायर करने के बाद उन्होंने इतने सबूत लगाए हैं, जो आरोपियों को गुनहगार साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में संलिप्त रहे सभी 6 तहसीलदारों की अगर संपत्ति की जांच करवाई जाए तो वो कम से कम 100 करोड़ की निकलेगी। कहा गया, एक अधिकारी की संपत्ति तो 1700 करोड़ रुपये से अधिक की है।
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पत्रकारवार्ता के बाद उन्होंने पुलिस आयुक्त से मुलाकात की। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच तेजी से और सक्षम अधिकारी से करवाई जाए। मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से मामले में संलिप्त सभी अधिकारियों की संपत्ति की जांच करवाने की मांग की। आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी करने की भी उन्होंने मांग की।