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हुडा टीम पर हमला करने के मामले में कोर्ट ने 17 दोषियों को सुनाई सजा

Fri, 29 Apr 2022 11:19 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2022 11:19 PM IST
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Court sentenced 17 convicts for attacking HUDA team
गुरुग्राम। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 2015 में हुडा के अतिक्रमणरोधी टीम पर हमला करने के मामले में आप के पूर्व पार्षद समेत 17 लोगों को सात से 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। 15 मई, 2015 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की टीम पर सेक्टर-47 झिमार बस्ती में हमला किया गया था। इस दौरान पुलिस टीमों पर पेट्रोल बम और एलपीजी सिलेंडर भी फेंके गए थे, जिसमें एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट समेत 15 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोना सिंह की अदालत ने बृहस्पतिवार को सजा सुनाते हुए 17 लोगों के खिलाफ जुर्माना भी लगाया। इनमें आम आदमी पार्टी की पूर्व पार्षद समेत 10 महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें से 10 को सात साल का कठोर कारावास व 7 लोगों को 10 साल कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्व पार्षद निशा सिंह सहित सभी 10 महिलाओं पर 10,000 रुपये और अन्य पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट में चली इस सुनवाई के दौरान दो आरोपियों की मौत हो चुकी है। 2015 में जब यह घटना हुई थी, तब इस मामले में 19 आरोपी थे। सुनवाई के दौरान रमेश और रतनलाल की मौत हो गई।
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कोर्ट की टिप्पणी:
कोर्ट ने आदेश में कहा है कि भुगतान न करने की स्थिति में सजा दो से तीन साल तक बढ़ा दी जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अधिकारियों को घायल करने के लिए आरोपियों की ओर से यह एक गंभीर चूक की गई है, लेकिन यह मानने की भी कोई वजह नहीं है कि इनका सुधार या पुनर्वास नहीं किया जा सकता है।
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15 मई को टीम पर हुआ था हमला
15 मई 2015 को कनिष्ठ अभियंता राजपाल की अगुवाई में हुडा की टीम सेक्टर-47 झिमार बस्ती में अतिक्रमणरोधी अभियान चला रही थी। आदेश के अनुसार अधिवक्ता खजान सिंह, प्रदीप जैलदार और निशा सिंह ने भीड़ को हमला करने के लिए उकसाया। भीड़ ने पुलिस टीमों पर पेट्रोल बम और एलपीजी सिलेंडर भी फेंके। इस मामले में सजा सुनाते हुए कोर्ट ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत दंगा करने, विस्फोटक पदार्थ का उपयोग करने और ड्यूटी पर लोक सेवकों को चोट पहुंचाने के मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराया गया था। इनमें से निशा सिंह को आईपीसी की धारा 114 के तहत भी दोषी ठहराया गया था।
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