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Gurugram News: दूषित पानी का होगा इलाज, बदलेगा मानेसर का मिजाज
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नौरंगपुर में सड़क पर जमा गंदा पानी, फाइल फोटो
अब गावों में लगेंगे एसटीपी प्लांट, शोधित पानी से ग्रीन बेल्ट और पेड़-पौधों होंगे हरे-भरे
नंबर गेम - 06 करोड़ रुपये किए जाएंगे खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
मानेसर। नगर निगम मानेसर ने अब क्षेत्र के गांवों में बह रहे दूषित पानी का इलाज ढूंढ लिया है। अब गांवों में ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जाएंगे, ताकि गंदे पानी को साफ कर उसका दोबारा उपयोग किया जा सके। इसके लिए निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना पर करीब 6 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
दरअसल, नौरंगपुर और नैनवाल गांवों का गंदा पानी पहले एनएसजी के एसटीपी में जाता था। वहां पानी को साफ कर ग्रीन बेल्ट और अन्य हरित क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता था लेकिन वहां पिछले कुछ समय से गंदा पानी जाना बंद हो गया है। इसके बाद गांवों का गंदा पानी कई जगह गलियों, खाली प्लॉटों और नालियों में जमा होने लगा। इससे लोगों को बदबू, गंदगी और मच्छरों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अब नगर निगम ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की तैयारी की है।
इन क्षेत्रों में लगाए जाएंगे एसटीपी
निगम क्षेत्र के गांव नैनवाल, कासन, भांगरौला, झुंड सराय, और नौरंगपुर में एसटीपी लगाए जाएंगे। झुंड सराय में एक एमएलडी क्षमता का प्लांट बनेगा, जबकि बाकी गांवों में तीन-तीन एमएलडी क्षमता के एसटीपी तैयार किए जाएंगे। इन प्लांटों में गांवों का गंदा पानी साफ किया जाएगा। इसके बाद इस पानी का उपयोग तालाबों को भरने, ग्रीन बेल्ट विकसित करने और पेड़-पौधों की सिंचाई में किया जाएगा। इससे एक तरफ गांवों में गंदा पानी जमा होने की समस्या कम होगी तो दूसरी तरफ पानी का बेहतर उपयोग भी हो सकेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से गांवों में गंदे पानी की निकासी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो पाया था। अब एसटीपी बनने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद गांवों में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी और जलभराव की समस्या में काफी कमी आएगी। -मनदीप धनखड़, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम
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नंबर गेम - 06 करोड़ रुपये किए जाएंगे खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
मानेसर। नगर निगम मानेसर ने अब क्षेत्र के गांवों में बह रहे दूषित पानी का इलाज ढूंढ लिया है। अब गांवों में ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जाएंगे, ताकि गंदे पानी को साफ कर उसका दोबारा उपयोग किया जा सके। इसके लिए निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना पर करीब 6 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
दरअसल, नौरंगपुर और नैनवाल गांवों का गंदा पानी पहले एनएसजी के एसटीपी में जाता था। वहां पानी को साफ कर ग्रीन बेल्ट और अन्य हरित क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता था लेकिन वहां पिछले कुछ समय से गंदा पानी जाना बंद हो गया है। इसके बाद गांवों का गंदा पानी कई जगह गलियों, खाली प्लॉटों और नालियों में जमा होने लगा। इससे लोगों को बदबू, गंदगी और मच्छरों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अब नगर निगम ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की तैयारी की है।
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इन क्षेत्रों में लगाए जाएंगे एसटीपी
निगम क्षेत्र के गांव नैनवाल, कासन, भांगरौला, झुंड सराय, और नौरंगपुर में एसटीपी लगाए जाएंगे। झुंड सराय में एक एमएलडी क्षमता का प्लांट बनेगा, जबकि बाकी गांवों में तीन-तीन एमएलडी क्षमता के एसटीपी तैयार किए जाएंगे। इन प्लांटों में गांवों का गंदा पानी साफ किया जाएगा। इसके बाद इस पानी का उपयोग तालाबों को भरने, ग्रीन बेल्ट विकसित करने और पेड़-पौधों की सिंचाई में किया जाएगा। इससे एक तरफ गांवों में गंदा पानी जमा होने की समस्या कम होगी तो दूसरी तरफ पानी का बेहतर उपयोग भी हो सकेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से गांवों में गंदे पानी की निकासी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो पाया था। अब एसटीपी बनने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद गांवों में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी और जलभराव की समस्या में काफी कमी आएगी। -मनदीप धनखड़, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम