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Gurugram News: बच्चों पर सर्दी की मार, निमोनिया के मरीजों की संख्या में हुआ इजाफा
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जिला अस्पताल में रोजाना 200 बच्चे बीमार होकर पहुंच रहे हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शीत लहर ने जिले में अस्थमा, निमोनिया, सर्दी, खांसी जुकाम के मरीज बच्चों की संख्या बढ़ा दी है। जिला अस्पताल में रोजाना 150 से 200 बच्चे बीमार होकर पहुंच रहे हैं। सोमवार को ठंड और शीतलहर के बावजूद काफी संख्या में मरीज ओपीडी में पहुंचे। अस्पताल के जच्चा बच्चा वार्ड के बाहर प्रसूताओं के परिजन कंबल, रजाई आदि लेकर पहुंचे। परिजनों के बैठने की जगह खुली होने के कारण, वहां काफी ठंड है। मरीजाें के परिजनों के लिए कोई बंद हॉल जैसी व्यवस्था अस्पताल में नहीं है। कॉरिडोर में लोग ठंड से परेशान नजर आए। अस्पताल में सामान्य वार्ड समेत करीब 125 मरीज भर्ती हैं, जिनके परिवार के लोग अस्पताल परिसर के बरामदे आदि में रुक कर ठंड से मुकाबला करते नजर आए ।
शीत लहर के कारण बीमार हो रहे हैं बच्चे
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. उमेश मेहता ने बताया कि इन दिनों अस्थमा, निमोनिया, सर्दी, खांसी जुकाम के मरीज बच्चों की संख्या बढ़ गई है। सोमवार को दोपहर 12.30 बचे तक पीडियाट्रिक्स ओपीडी में 140 बच्चे आ चुके थे। डाॅ. उमेश ने कहा कि इस वक्त बच्चों को ठंड से बचाकर रखना बहुत जरूरी है। इसके साथ पर्सनल हाइजीन यानी साफ सफाई का ध्यान रखे। बच्चों के सिर, पैर आदि अच्छी तरह ढंक कर रखे। बच्चों को स्वास्थ्यवर्धक और पर्याप्त भोजन कराएं, और उन्हें ठंड से बचाकर रखें।
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बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं
आयुष विभाग की पंचकर्मा विशेषज्ञ डाॅ. गीतांजलि अरोड़ा ने बताया की बच्चों को च्यवनप्राश और हल्दी वाला दूध जरूर दें। दूध में एक से लेकर चार खजूर उबालकर उस दूध को बच्चों को पिलाएं। बच्चों के लिए एक खजूर और बड़ों के लिए चार से पांच खजूर का प्रयोग कर सकते हैं। तिल और गुड़ वाले लड्डू, मूंगफली भी ठंड का असर कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बेहतर उपाय है। कच्चे आंवले का प्रयोग किसी न किसी रूप में किया जाए।
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अपनी दवाएं बंद न करे अस्थमा के मरीज
जिला अस्पताल के छाती और फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. वरुण ने बताया कि सर्दी से बचने को पूरे उपाय रखें। अस्थमा के मरीज अपनी दवाएं बंद नहीं करें। इनहेलर अपने पास रखें। कमरे में हीटर चला रहे हो तो ऑयल हीटर का प्रयोग करें ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। अभी अस्पताल की ओपीडी के अलावा इमर्जेंसी में भी अस्थमा और श्वास और फेफड़े संबंधित रोग के मरीज आ रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शीत लहर ने जिले में अस्थमा, निमोनिया, सर्दी, खांसी जुकाम के मरीज बच्चों की संख्या बढ़ा दी है। जिला अस्पताल में रोजाना 150 से 200 बच्चे बीमार होकर पहुंच रहे हैं। सोमवार को ठंड और शीतलहर के बावजूद काफी संख्या में मरीज ओपीडी में पहुंचे। अस्पताल के जच्चा बच्चा वार्ड के बाहर प्रसूताओं के परिजन कंबल, रजाई आदि लेकर पहुंचे। परिजनों के बैठने की जगह खुली होने के कारण, वहां काफी ठंड है। मरीजाें के परिजनों के लिए कोई बंद हॉल जैसी व्यवस्था अस्पताल में नहीं है। कॉरिडोर में लोग ठंड से परेशान नजर आए। अस्पताल में सामान्य वार्ड समेत करीब 125 मरीज भर्ती हैं, जिनके परिवार के लोग अस्पताल परिसर के बरामदे आदि में रुक कर ठंड से मुकाबला करते नजर आए ।
शीत लहर के कारण बीमार हो रहे हैं बच्चे
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. उमेश मेहता ने बताया कि इन दिनों अस्थमा, निमोनिया, सर्दी, खांसी जुकाम के मरीज बच्चों की संख्या बढ़ गई है। सोमवार को दोपहर 12.30 बचे तक पीडियाट्रिक्स ओपीडी में 140 बच्चे आ चुके थे। डाॅ. उमेश ने कहा कि इस वक्त बच्चों को ठंड से बचाकर रखना बहुत जरूरी है। इसके साथ पर्सनल हाइजीन यानी साफ सफाई का ध्यान रखे। बच्चों के सिर, पैर आदि अच्छी तरह ढंक कर रखे। बच्चों को स्वास्थ्यवर्धक और पर्याप्त भोजन कराएं, और उन्हें ठंड से बचाकर रखें।
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बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं
आयुष विभाग की पंचकर्मा विशेषज्ञ डाॅ. गीतांजलि अरोड़ा ने बताया की बच्चों को च्यवनप्राश और हल्दी वाला दूध जरूर दें। दूध में एक से लेकर चार खजूर उबालकर उस दूध को बच्चों को पिलाएं। बच्चों के लिए एक खजूर और बड़ों के लिए चार से पांच खजूर का प्रयोग कर सकते हैं। तिल और गुड़ वाले लड्डू, मूंगफली भी ठंड का असर कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बेहतर उपाय है। कच्चे आंवले का प्रयोग किसी न किसी रूप में किया जाए।
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अपनी दवाएं बंद न करे अस्थमा के मरीज
जिला अस्पताल के छाती और फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. वरुण ने बताया कि सर्दी से बचने को पूरे उपाय रखें। अस्थमा के मरीज अपनी दवाएं बंद नहीं करें। इनहेलर अपने पास रखें। कमरे में हीटर चला रहे हो तो ऑयल हीटर का प्रयोग करें ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। अभी अस्पताल की ओपीडी के अलावा इमर्जेंसी में भी अस्थमा और श्वास और फेफड़े संबंधित रोग के मरीज आ रहे हैं।