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Gurugram News: एचएसवीपी के पूर्व अधिकारियों समेत सात पर केस
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गुरुग्राम में प्लॉट आवंटन अनियमितता का मामला, एसीबी ने दर्ज की दो अलग-अलग नई एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुग्राम में प्लॉट आवंटन से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में दो नई एफआईआर दर्ज की है। इन मामलों में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के कई पूर्व अधिकारियों समेत कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर प्लॉटों का अवैध आवंटन किया गया और बाद में उन्हें स्थानांतरित भी किया गया। ये मामले करीब तीन दशक पुराने हैं।
पहला मामला सेक्टर-40 स्थित प्लॉट नंबर 833-ए के आवंटन से संबंधित है। एसीबी ने इस मामले में तत्कालीन एचएसवीपी अधिकारियों सुरेश कुमार, गिरीश कुमार, अनिल कुमार अग्रवाल और सुभाष रानी उर्फ सुशीला के खिलाफ केस दर्ज किया है। शिकायत के अनुसार, 1994 में यह प्लॉट जगदीश चंद गुप्ता के नाम आउटीज कोटे के तहत ड्रॉ में निकला था। आरोप है कि सह-आवेदकों की एनओसी सहित कई औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं। वर्ष 2015 से 2019 के बीच हाईकोर्ट और विभागीय आदेशों के बावजूद आवंटन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
दूसरा मामला सेक्टर-39 स्थित प्लॉट नंबर 257ए के आवंटन से जुड़ा है। एसीबी ने इसमें तत्कालीन मुख्य प्रशासक डी. सुरेश, तत्कालीन प्रशासक गिरीश कुमार, तत्कालीन अधीक्षक नितिन हुड्डा, तत्कालीन डीए अनिल कुमार अग्रवाल और प्लॉट आवंटी श्याम सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर दो सितंबर 2026 को गुरुग्राम एसीबी थाने में दर्ज की गई। शिकायतकर्ता सुरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने प्रॉपर्टी डीलर और आवंटी से मिलीभगत कर नियमों की अनदेखी की। श्याम सिंह ने 1994 में चार मरला प्लॉट के लिए आवेदन किया था, लेकिन अन्य हिस्सेदारों की सहमति और एनओसी को लेकर विवाद था। विभागीय निर्देशों के बावजूद प्लॉट आवंटन का रास्ता साफ किया गया। दोनों मामलों में एचएसवीपी के पूर्व अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। गिरीश कुमार और अनिल कुमार अग्रवाल दोनों एफआईआर में आरोपी के तौर पर दर्ज हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुग्राम में प्लॉट आवंटन से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में दो नई एफआईआर दर्ज की है। इन मामलों में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के कई पूर्व अधिकारियों समेत कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर प्लॉटों का अवैध आवंटन किया गया और बाद में उन्हें स्थानांतरित भी किया गया। ये मामले करीब तीन दशक पुराने हैं।
पहला मामला सेक्टर-40 स्थित प्लॉट नंबर 833-ए के आवंटन से संबंधित है। एसीबी ने इस मामले में तत्कालीन एचएसवीपी अधिकारियों सुरेश कुमार, गिरीश कुमार, अनिल कुमार अग्रवाल और सुभाष रानी उर्फ सुशीला के खिलाफ केस दर्ज किया है। शिकायत के अनुसार, 1994 में यह प्लॉट जगदीश चंद गुप्ता के नाम आउटीज कोटे के तहत ड्रॉ में निकला था। आरोप है कि सह-आवेदकों की एनओसी सहित कई औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं। वर्ष 2015 से 2019 के बीच हाईकोर्ट और विभागीय आदेशों के बावजूद आवंटन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
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दूसरा मामला सेक्टर-39 स्थित प्लॉट नंबर 257ए के आवंटन से जुड़ा है। एसीबी ने इसमें तत्कालीन मुख्य प्रशासक डी. सुरेश, तत्कालीन प्रशासक गिरीश कुमार, तत्कालीन अधीक्षक नितिन हुड्डा, तत्कालीन डीए अनिल कुमार अग्रवाल और प्लॉट आवंटी श्याम सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर दो सितंबर 2026 को गुरुग्राम एसीबी थाने में दर्ज की गई। शिकायतकर्ता सुरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने प्रॉपर्टी डीलर और आवंटी से मिलीभगत कर नियमों की अनदेखी की। श्याम सिंह ने 1994 में चार मरला प्लॉट के लिए आवेदन किया था, लेकिन अन्य हिस्सेदारों की सहमति और एनओसी को लेकर विवाद था। विभागीय निर्देशों के बावजूद प्लॉट आवंटन का रास्ता साफ किया गया। दोनों मामलों में एचएसवीपी के पूर्व अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। गिरीश कुमार और अनिल कुमार अग्रवाल दोनों एफआईआर में आरोपी के तौर पर दर्ज हैं।
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