दोगुने हुए दिल के मरीज: अधिकतर पुरुष कर रहे ये दो गलती, आप भी न रखें मन में ऐसी कोई बात; नियमित कराएं ये जांच
डॉ. विवेक बताते हैं कि ज्यादातर पुरुष अपनी चिंता और तनाव दूसरों के साथ साझा नहीं करते हैं। इस कारण वह अन एक्सप्रेस्ड हॉस्टिलिटी (मन की बात न बोलने की समस्या) और इंटेंस डिप्रेशन (गंभीर तनाव) के शिकार हो जाते हैं।
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सर्दी की दस्तक के साथ ही लोगों को रक्त धमनी में सिकुड़न, खून में गाढ़ापन और रक्तचाप में बढ़ने की शिकायत होने लगी है। इसके कारण जिले में दिल के मरीजों की ओपीडी संख्या दोगुनी हो गई है। अलग अलग अस्पतालों में इमरजेंसी में 40 फीसदी मरीज भर्ती हो रहे हैं। ज्यादातर में मरीज युवा हैं। ऐसे में नागरिक व निजी अस्पताल के विशेषज्ञ इन दिनों 25 की उम्र के बाद युवाओं को दिल का ख्याल रखने की सलाह दे रहे हैं।
ह्दय रोग विशेषज्ञों के मुताबिक इन दिनों नर्म खून के थक्के की जगह पत्थर जैसी खून की गांठ जम रही हैं। यह गांठ तोड़ने के लिए पारंपरिक तकनीक भी काम नहीं आ रही। ऐसे में अस्पतालों में दिल के मरीजों के लिए नई नई तकनीक इस्तेमाल करने का ट्रेंड बढ़ा है। ज्यादातर मरीजों में दिल की बीमारी का कारण तनाव (स्ट्रेस), धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता के अलावा शुगर बीपी की बढ़ती समस्याएं हैं। इसके अलावा जीने के बेतरतीब अंदाज के कारण भी युवा दिलों की धड़कन कम हो रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि युवाओं में मॉडिफायबल यानी बदलाव योग्य कारणों से दिल का अटैक रोका जा सकता है। इसमें जीवन शैली सबसे अहम है। नागरिक अस्पताल के हार्ट सेंटर प्रभारी श्रीदत्त ने बताया कि युवाओं को जागरूक कर स्वस्थ जीवन शैली के लिए प्रेरित किया जा रहा है। गुरुग्राम में 90 फीसदी हार्ट अटैक का कारण बेतरतीब जीवन शैली है। ऐसे में जिला अस्पताल में डॉक्टर परामर्श के साथ ही मरीजों को जीवन शैली सुधारने की सलाह दे रहे हैं। डॉ. विवेक बताते हैं कि ज्यादातर पुरुष अपनी चिंता और तनाव दूसरों के साथ साझा नहीं करते हैं। इस कारण वह अन एक्सप्रेस्ड हॉस्टिलिटी (मन की बात न बोलने की समस्या) और इंटेंस डिप्रेशन (गंभीर तनाव) के शिकार हो जाते हैं।
इमरजेंसी में भर्ती हो रहे युवा मरीज
पारस अस्पताल के ह्दय रोग विभाग प्रभारी डॉ. अमित बताते हैं कि ओपीडी में औसतन हर दिन 50 मामले आते हैं। इसमें 40 फीसदी युवा और 40 फीसदी मामले 40 से 60 वर्ष के बीच के हैं। सोमवार को अस्पताल में दिल के चार गंभीर मरीज 35 वर्ष से कम उम्र के भर्ती किए गए। एक मरीज को कार्डिक मसाज के बाद स्टेंट डालने के लायक हालत में लाया गया। युवा मरीज को पहली बार हार्ट अटैक आया। ऐसे मामलों में थिन कैप ब्लॉकेज यानी 30 फीसदी ह्दय रुकावट अचानक अधिक वजन उठाने, तनाव लेने या किसी अन्य कारण से सौ फीसदी तक पहुंच रही है। इन दिनों ऐसे मामले दोगुने हो गए हैं।
अनियंत्रित बीपी दिल के लिए जानलेवा
मणिपाल के डॉ. दीक्षित गर्ग बताते हैं कि प्रदूषण और तनाव भी दिल के दुश्मन हैं। बीते तीन वर्षों में कोरोना के बाद युवाओं में दिल की समस्या बढ़ी है। इसमें धूम्रपान, मधुमेह, उच्च रक्तचाप न होने के बाद भी करीब 20 फीसदी मरीजों में हार्ट अटैक की समस्या हो रही है। कई मरीज अर्थेमिया की स्थिति में अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों को बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इस दौरान मरीज का रक्तचाप तेजी से बढ़ने घटने लगता है, इस स्थिति में दिल अर्थेमिया यानी अनियंत्रित ह्दय गति से जूझता है। ऐसे मरीजों को बचाना कई बार बेहद मुश्किल होता है। जरूरी है कि मरीज अपने बीपी, शुगर को नियंत्रित रखें।