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Gurugram News: फ्लैट के बदले फ्लैट देने के वादे से मुकरा बिल्डर

Wed, 19 Jul 2023 12:09 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jul 2023 12:09 AM IST
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Builder refused to promise to give flat instead of flat
चिंटेल्स : आरडब्ल्यूए ने कहा-प्रशासन के समक्ष रखा जाएगा पूरा मामला
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बिल्डर बोला-एक भी फ्लैट मालिक विकल्प के लिए नहीं आया आगे

21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में भी होनी है सुनवाई

अमर उजाला ब्यूरो

गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी में रहने के लिए असुरक्षित घोषित किए गए टावरों के फ्लैट मालिकों को दिए गए दूसरे विकल्प फ्लैट के बदले फ्लैट देने से बिल्डर मुकर गया है। अब बिल्डर की ओर से फ्लैट मालिकों को सिर्फ फ्लैट के बदले उसका पैसा देने का विकल्प दिया गया है। बिल्डर की ओर से इस संबंध में वहां की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को ई-मेल भेजकर सूचित भी कर दिया है। आरडब्ल्यूए की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले से जिला उपायुक्त को अवगत कराया जाएगा। आगामी 21 जुलाई को इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में भी है।
चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से सीनियर मैनेजर लीगल राकेश कुमार ने कहा है कि कुछ फ्लैट मालिकों के कहने पर फ्लैट के बदले फ्लैट देने का विकल्प दिया था। अब तक एक भी फ्लैट मालिक इस विकल्प के लिए आगे नहीं आया है। इसलिए हम इस दिए गए विकल्प को अब वापस ले रहे हैं। जिला प्रशासन को इस संबंध में अवगत करा दिया गया है। इस समय केवल एक ही विकल्प खुला हुआ है। वह निर्धारित दर पर अपने फ्लैट की कीमत मालिक वापस ले ले। यह पहले आओ पहले पाओ के आधार पर उपलब्ध है।
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चिंटेल्स सोसाइटी की टावर डी 10 फरवरी 2022 को हादसाग्रस्त हुई थी। इसके बाद इसे रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। टावर ई और एफ को भी जांच के बाद रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। टावर जी भी अब रहने के लिए असुरक्षित है। ए टावर के संबंध में प्रत्येक एक वर्ष में ऑडिट किए जाने के लिए कहा है। इस तरह सोसाइटी की कई टावर रहने के लिए असुरक्षित घोषित की जा चुकी हैं।
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चिंटेल्स की आरडब्ल्यूए के प्रधान राकेश हुड्डा कहते हैं कि इस पूरे मामले को जिला उपायुक्त के समक्ष रखा जाएगा। एक हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान के बाद दूसरा विकल्प बिल्डर ने दिया था। एक तरफा तरीके से यह वापस लिया है। प्रशासन से बातचीत की जाएगी। 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई है। उसमें भी यह बात रखी जाएगी।
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