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Gurugram News: हिंसक बवाल व तोड़फोड़ मामले में 35 कर्मचारियों की जमानत याचिका स्वीकार
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23 कर्मचारियों के रिहाई आदेश भी जारी, 12 कर्मचारियों के दस्तावेज, जमानती सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी होने पर मिलेगी जमानत
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। आईएमटी मानेसर में 9 अप्रैल को कंपनियों में कर्मचारियों के हिंसक बवाल व तोड़फोड़ मामले में भोंडसी जेल में बंद 35 आरोपी कर्मचारियों की अदालत ने बुधवार को जमानत याचिका स्वीकार की है। इनमें से 23 कर्मचारियों के रिहाई के आदेश भी जारी किए हैं। आदेश जारी होने के बाद गिरफ्तार कर्मचारियों के जेल से बाहर आने की प्रक्रिया शुरू हो गई। वहीं, 12 कर्मचारियों के दस्तावेज, जमानती सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जमानत मिल सकेगी।
9 अप्रैल को आईएमटी मानेसर स्थित कई कंपनियों के कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी को लेकर हड़ताल की थी। बाद में कर्मचारियों ने कंपनियों में तोड़फाेड़ करनी शुरू कर दी और उग्र कर्मचारियों ने कंपनियों के फर्नीचर, मशीनों व वाहनों को नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने कर्मचारियों पर लाठीचार्ज किया तो उन्होंने पुलिस पर पथराव किया व दो वाहनों को तोड़ने के साथ ही एक बाइक में आग लगा दी थी।
मामले की सोमवार को सुनवाई हुई थी। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि कई कर्मचारियों को शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया व उनके खिलाफ कोई ठोस सीसीटीवी साक्ष्य या प्रत्यक्ष गवाह नहीं है। वकीलों ने यह भी दलील दी कि कई कर्मचारी परिवार के अकेले कमाने वाले हैं। जेल में रहने के कारण उनके परिवारों को आर्थिक तौर पर परेशानी हो रही है। वहीं, सरकारी वकील ने आरोपी कर्मचारियों की जमानत का विरोध किया था कि आरोपियों के हिंसक बवाल से औद्योगिक शांति भंग हुई है। अदालत ने सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए 35 कर्मचारियों को जमानत दे दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को जांच में सहयोग करना होगा और वे भविष्य में ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। 23 आरोपियों के दस्तावेज पूरे होने पर उनके रिहाई आदेश जारी किए गए।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। आईएमटी मानेसर में 9 अप्रैल को कंपनियों में कर्मचारियों के हिंसक बवाल व तोड़फोड़ मामले में भोंडसी जेल में बंद 35 आरोपी कर्मचारियों की अदालत ने बुधवार को जमानत याचिका स्वीकार की है। इनमें से 23 कर्मचारियों के रिहाई के आदेश भी जारी किए हैं। आदेश जारी होने के बाद गिरफ्तार कर्मचारियों के जेल से बाहर आने की प्रक्रिया शुरू हो गई। वहीं, 12 कर्मचारियों के दस्तावेज, जमानती सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जमानत मिल सकेगी।
9 अप्रैल को आईएमटी मानेसर स्थित कई कंपनियों के कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी को लेकर हड़ताल की थी। बाद में कर्मचारियों ने कंपनियों में तोड़फाेड़ करनी शुरू कर दी और उग्र कर्मचारियों ने कंपनियों के फर्नीचर, मशीनों व वाहनों को नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने कर्मचारियों पर लाठीचार्ज किया तो उन्होंने पुलिस पर पथराव किया व दो वाहनों को तोड़ने के साथ ही एक बाइक में आग लगा दी थी।
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मामले की सोमवार को सुनवाई हुई थी। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि कई कर्मचारियों को शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया व उनके खिलाफ कोई ठोस सीसीटीवी साक्ष्य या प्रत्यक्ष गवाह नहीं है। वकीलों ने यह भी दलील दी कि कई कर्मचारी परिवार के अकेले कमाने वाले हैं। जेल में रहने के कारण उनके परिवारों को आर्थिक तौर पर परेशानी हो रही है। वहीं, सरकारी वकील ने आरोपी कर्मचारियों की जमानत का विरोध किया था कि आरोपियों के हिंसक बवाल से औद्योगिक शांति भंग हुई है। अदालत ने सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए 35 कर्मचारियों को जमानत दे दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को जांच में सहयोग करना होगा और वे भविष्य में ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। 23 आरोपियों के दस्तावेज पूरे होने पर उनके रिहाई आदेश जारी किए गए।
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