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Gurugram News: आठ साल बाद उपभोक्ता बिजली चोरी के दोष से मुक्त
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वसूला गया जुर्माना 2.11 लाख रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित वापस करने के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। आठ साल पुराने बिजली चोरी के एक मुकदमे में अदालत ने उपभोक्ता को दोष मुक्त करार देते हुए बिजली विभाग को जमा किए गए 2.11 लाख रुपये 9 फीसदी की सालाना ब्याज दर से वापस करने का आदेश दिया है। बिजली विभाग ने इस आदेश के खिलाफ अदालत में अपील दाखिल की लेकिन विभाग की अपील को भी खारिज कर दिया गया।
सेक्टर-9 की रहने वालीं कमलेश अरोड़ा के यहां पर 24 अक्तूबर 2015 को बिजली विभाग ने 2.11 लाख रुपये का बिजली का बिल भेज दिया। यह बिल देखकर उपभोक्ता के पैरों तले जमीन खिसक गई। विभाग की ओर से कहा गया कि 31 अगस्त 2015 को उनका मीटर चेक किया गया था, जिसमें छेड़छाड़ पाई गई थी। मीटर चेक करने की सूचना तक उपभोक्ता को नहीं दी गई थी। पीड़ित उपभोक्ता के अधिवक्ता क्षितिज मेहता ने बताया कि बिजली कनेक्शन कट जाने के डर से कमलेश ने बिजली का बिल तो जमा कर दिया लेकिन साथ ही 17 नवंबर 2017 को मुकदमा भी दायर कर दिया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने कमलेश के हक में फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि वह कमलेश को 2.11 लाख रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से वापस दे। इस फैसले के खिलाफ बिजली विभाग ने अदालत में अपील दाखिल कर दी। अब सिविल जज की ओर से बिजली विभाग की ओर से दायर की गई अपील को भी खारिज कर दिया गया है। अधिवक्ता क्षितिज मेहता ने बताया कि अदालत का आदेश मानते हुए अगर विभाग ने ब्याज सहित पैसा वापस नहीं किया तो वह अदालत की अवमानना का मामला दायर करेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। आठ साल पुराने बिजली चोरी के एक मुकदमे में अदालत ने उपभोक्ता को दोष मुक्त करार देते हुए बिजली विभाग को जमा किए गए 2.11 लाख रुपये 9 फीसदी की सालाना ब्याज दर से वापस करने का आदेश दिया है। बिजली विभाग ने इस आदेश के खिलाफ अदालत में अपील दाखिल की लेकिन विभाग की अपील को भी खारिज कर दिया गया।
सेक्टर-9 की रहने वालीं कमलेश अरोड़ा के यहां पर 24 अक्तूबर 2015 को बिजली विभाग ने 2.11 लाख रुपये का बिजली का बिल भेज दिया। यह बिल देखकर उपभोक्ता के पैरों तले जमीन खिसक गई। विभाग की ओर से कहा गया कि 31 अगस्त 2015 को उनका मीटर चेक किया गया था, जिसमें छेड़छाड़ पाई गई थी। मीटर चेक करने की सूचना तक उपभोक्ता को नहीं दी गई थी। पीड़ित उपभोक्ता के अधिवक्ता क्षितिज मेहता ने बताया कि बिजली कनेक्शन कट जाने के डर से कमलेश ने बिजली का बिल तो जमा कर दिया लेकिन साथ ही 17 नवंबर 2017 को मुकदमा भी दायर कर दिया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने कमलेश के हक में फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि वह कमलेश को 2.11 लाख रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से वापस दे। इस फैसले के खिलाफ बिजली विभाग ने अदालत में अपील दाखिल कर दी। अब सिविल जज की ओर से बिजली विभाग की ओर से दायर की गई अपील को भी खारिज कर दिया गया है। अधिवक्ता क्षितिज मेहता ने बताया कि अदालत का आदेश मानते हुए अगर विभाग ने ब्याज सहित पैसा वापस नहीं किया तो वह अदालत की अवमानना का मामला दायर करेंगे।
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