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Gurugram News: ड्रॉपआउट बच्चों की बनेगी सूची, घर -घर जाकर किया जाएगा सर्वें
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टीम पता लगाएगी किन कारणों से बच्चे नहीं जा रहे स्कूल
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम।
मिशन शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में पढ़ रहे और बीच में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों का डाटा इकट्ठा करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए एजुकेशन वॉलंटियर भी नियुक्त किए गए हैं, जो जनवरी से मैदानी स्तर पर बच्चों की पहचान करेंगे और रिपोर्ट बनाएंगे।
जिले में ऐसे बच्चों की पूरी लिस्ट तैयार की जाएगी जो बीच में पढ़ाई छोड़ देते हैं। शिक्षा विभाग ने जनवरी से घर–घर सर्वे कर यह पता लगाने का फैसला लिया है कि आखिर किन कारणों से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सर्वे के आधार पर इन बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ा जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि शहरों, कॉलोनियों, गांवों और मजदूर बस्तियों में कई बच्चे ऐसे मिलते हैं जो पारिवारिक परिस्थितियों के कारण स्कूल छोड़ देते हैं। मजदूरी, बार-बार स्थान बदलना, आर्थिक समस्या या पढ़ाई में रुचि की कमी ये आम वजहें सामने आती हैं। ऐसे बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ने के लिए विशेष ड्रॉपआउट अभियान चलाया जाएगा।
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हर साल जिले में लगभग 400 से 500 बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए जनवरी से मार्च तक विस्तृत सर्वे चलेगा, जिसमें हर ऐसे बच्चे का नाम, कक्षा और कारण दर्ज किया जाएगा। इसके बाद शिक्षकों और वॉलंटियर्स की टीम उनके परिवारों से मिलकर बच्चे को स्कूल वापस लाने का प्रयास करेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम।
मिशन शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में पढ़ रहे और बीच में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों का डाटा इकट्ठा करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए एजुकेशन वॉलंटियर भी नियुक्त किए गए हैं, जो जनवरी से मैदानी स्तर पर बच्चों की पहचान करेंगे और रिपोर्ट बनाएंगे।
जिले में ऐसे बच्चों की पूरी लिस्ट तैयार की जाएगी जो बीच में पढ़ाई छोड़ देते हैं। शिक्षा विभाग ने जनवरी से घर–घर सर्वे कर यह पता लगाने का फैसला लिया है कि आखिर किन कारणों से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सर्वे के आधार पर इन बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ा जाएगा।
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अधिकारियों ने बताया कि शहरों, कॉलोनियों, गांवों और मजदूर बस्तियों में कई बच्चे ऐसे मिलते हैं जो पारिवारिक परिस्थितियों के कारण स्कूल छोड़ देते हैं। मजदूरी, बार-बार स्थान बदलना, आर्थिक समस्या या पढ़ाई में रुचि की कमी ये आम वजहें सामने आती हैं। ऐसे बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ने के लिए विशेष ड्रॉपआउट अभियान चलाया जाएगा।
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हर साल जिले में लगभग 400 से 500 बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए जनवरी से मार्च तक विस्तृत सर्वे चलेगा, जिसमें हर ऐसे बच्चे का नाम, कक्षा और कारण दर्ज किया जाएगा। इसके बाद शिक्षकों और वॉलंटियर्स की टीम उनके परिवारों से मिलकर बच्चे को स्कूल वापस लाने का प्रयास करेगी।