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प्रदूषण पर सख्ती करने में नाकाम प्रशासन
Updated Sat, 03 Nov 2018 06:04 AM IST
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अमर उजाला लाइव
प्रदूषण पर सख्ती करने में नाकाम प्रशासन
नहीं रुका निर्माण कार्य, नहीं हो रहा है सभी इलाकों में सड़कों पर पानी का छिड़काव
24 घंटे चलने वाला निगम का अभियान दोपहर दो बजे के बाद हो जाता है फेल
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम।
साइबर सिटी में सांसों में घुल रहे जहर को लेकर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू कर दिया गया है। इसी के साथ प्रशासन ने तमाम बंदिशें लागू कर दी हैं, लेकिन बंदिशों पर अमल कराने पर जिला प्रशासन, नगर निगम व अन्य महकमा फेल है। विभागीय तालमेल की कमी भी देखने को मिल रही है। हालांकि प्रदूषण के स्तर में बृहस्पतिवार के मुकाबले शुक्रवार को मामूली कमी दिखाई दी।
निगम की ओर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तहत 24 घंटे चलाया गया अभियान भी दोपहर दो बजे के बाद फेल हो जाता है। शहर के बीच व ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में भवन निर्माण, खुले में कचरा, सड़कों व खाली प्लॉटों में सीएंडडी वेस्ट डाला जा रहा है। वहीं पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) की पाबंदी के बाद भी शहर की सैकड़ों सोसायटियों में अब भी जेनरेटर का प्रयोग किया जा रहा है। पुराने वाहनों पर रोक लगाने पर भी ट्रैफिक पुलिस खानापूर्ति करती नजर आ रही है। पेश है अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट:
माकूल टीमें नहीं
निर्माण कार्य पर सख्ती से दस नवंबर तक रोक लगाई गई है, लेकिन इसे रोकने के लिए माकूल टीमें नहीं हैं। शहर के पॉश कॉलोनियों से लेकर नए सेक्टरों में निर्माण किया जा रहा है, लेकिन न तो प्रशासन की तरफ से जागरूकता अभियान चलाया गया। न लोग खुद रोकने की जहमत उठा रहे हैं। सेक्टर-30, द्वारका एक्सप्रेसवे समेत अन्य जगहों पर निर्माण कार्य दिखे। नगर निगम की गठित टीमों ने 24 घंटे के अभियान के दौरान 50 हजार रुपये का चालान किया। टीमों ने चारों जोन में 24 घंटे के दौरान आग जलाने वालों के 23500 रुपये के 9 चालान किए।
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पाबंदी का खास असर नहीं
खुले में कचरा जलाने और मलबे को लेकर भी पाबंदी है, लेकिन इस पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है। गुरुग्राम शहरी क्षेत्र से बाहर फर्रूखनगर, पटौदी, सोहना क्षेत्र में लोग खुले में कचरा जला रहे हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। निगम ने कचरा एवं मलबा डालने वालों के 90 हजार रुपये के 18 चालान किए। बिना ढके कचरा एवं मलबा व निर्माण सामग्री ले जाने वालों के 65 हजार रुपये के 13 चालान किए। बिना ढकी निर्माण सामग्री विक्रेताओं के 3 लाख 10 हजार रुपये के 60 चालान किए।
पुराने वाहनों पर रोक लगाने में नाकामयाब
हाईकोई के आदेश के बाद भी शहर में पुराने वाहनों पर रोक लगाने में आरटीए विभाग और ट्रैफिक पुलिस नाकामयाब होती नजर आ रही है। शहर में हजारों की संख्या में दस वर्ष से पुराने वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। बृहस्पतिवार को ट्रैफिक पुलिस ने पुराने वाहनों के सिर्फ 17 ही चालान किए।
बिना प्रदूषण जांच के ही जारी किए जा रहे प्रदूषण सर्टिफिकेट
शहर में सैकड़ों की संख्या में जगह-जगह चल रहे प्रदूषण जांच केंद्रों मेें वाहनों की बिना किसी जांच के ही सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं। आरटीए विभाग की ओर से आज तक किसी भी प्रदूषण जांच केंद्र पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रदूषण बढ़ाने वाली सभी प्रकार की गतिविधियों पर निगम की टीमें लगातार जुर्माना कर रही हैं और दस तारीख तक पूरी टीमें 24 घंटे फील्ड में रहेंगी।
-यशपाल यादव, आयुक्त नगर निगम गुरुग्राम।
छोटे भवन निर्माण पर निगम की टीमें रोक लगा रही हैं और बड़े निर्माण पर प्रदूषण नियंत्रण की टीमें रोक लगा रही हैं।
-जयभगवान शर्मा, स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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प्रदूषण पर सख्ती करने में नाकाम प्रशासन
नहीं रुका निर्माण कार्य, नहीं हो रहा है सभी इलाकों में सड़कों पर पानी का छिड़काव
24 घंटे चलने वाला निगम का अभियान दोपहर दो बजे के बाद हो जाता है फेल
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम।
साइबर सिटी में सांसों में घुल रहे जहर को लेकर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू कर दिया गया है। इसी के साथ प्रशासन ने तमाम बंदिशें लागू कर दी हैं, लेकिन बंदिशों पर अमल कराने पर जिला प्रशासन, नगर निगम व अन्य महकमा फेल है। विभागीय तालमेल की कमी भी देखने को मिल रही है। हालांकि प्रदूषण के स्तर में बृहस्पतिवार के मुकाबले शुक्रवार को मामूली कमी दिखाई दी।
निगम की ओर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तहत 24 घंटे चलाया गया अभियान भी दोपहर दो बजे के बाद फेल हो जाता है। शहर के बीच व ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में भवन निर्माण, खुले में कचरा, सड़कों व खाली प्लॉटों में सीएंडडी वेस्ट डाला जा रहा है। वहीं पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) की पाबंदी के बाद भी शहर की सैकड़ों सोसायटियों में अब भी जेनरेटर का प्रयोग किया जा रहा है। पुराने वाहनों पर रोक लगाने पर भी ट्रैफिक पुलिस खानापूर्ति करती नजर आ रही है। पेश है अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट:
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माकूल टीमें नहीं
निर्माण कार्य पर सख्ती से दस नवंबर तक रोक लगाई गई है, लेकिन इसे रोकने के लिए माकूल टीमें नहीं हैं। शहर के पॉश कॉलोनियों से लेकर नए सेक्टरों में निर्माण किया जा रहा है, लेकिन न तो प्रशासन की तरफ से जागरूकता अभियान चलाया गया। न लोग खुद रोकने की जहमत उठा रहे हैं। सेक्टर-30, द्वारका एक्सप्रेसवे समेत अन्य जगहों पर निर्माण कार्य दिखे। नगर निगम की गठित टीमों ने 24 घंटे के अभियान के दौरान 50 हजार रुपये का चालान किया। टीमों ने चारों जोन में 24 घंटे के दौरान आग जलाने वालों के 23500 रुपये के 9 चालान किए।
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पाबंदी का खास असर नहीं
खुले में कचरा जलाने और मलबे को लेकर भी पाबंदी है, लेकिन इस पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है। गुरुग्राम शहरी क्षेत्र से बाहर फर्रूखनगर, पटौदी, सोहना क्षेत्र में लोग खुले में कचरा जला रहे हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। निगम ने कचरा एवं मलबा डालने वालों के 90 हजार रुपये के 18 चालान किए। बिना ढके कचरा एवं मलबा व निर्माण सामग्री ले जाने वालों के 65 हजार रुपये के 13 चालान किए। बिना ढकी निर्माण सामग्री विक्रेताओं के 3 लाख 10 हजार रुपये के 60 चालान किए।
पुराने वाहनों पर रोक लगाने में नाकामयाब
हाईकोई के आदेश के बाद भी शहर में पुराने वाहनों पर रोक लगाने में आरटीए विभाग और ट्रैफिक पुलिस नाकामयाब होती नजर आ रही है। शहर में हजारों की संख्या में दस वर्ष से पुराने वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। बृहस्पतिवार को ट्रैफिक पुलिस ने पुराने वाहनों के सिर्फ 17 ही चालान किए।
बिना प्रदूषण जांच के ही जारी किए जा रहे प्रदूषण सर्टिफिकेट
शहर में सैकड़ों की संख्या में जगह-जगह चल रहे प्रदूषण जांच केंद्रों मेें वाहनों की बिना किसी जांच के ही सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं। आरटीए विभाग की ओर से आज तक किसी भी प्रदूषण जांच केंद्र पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रदूषण बढ़ाने वाली सभी प्रकार की गतिविधियों पर निगम की टीमें लगातार जुर्माना कर रही हैं और दस तारीख तक पूरी टीमें 24 घंटे फील्ड में रहेंगी।
-यशपाल यादव, आयुक्त नगर निगम गुरुग्राम।
छोटे भवन निर्माण पर निगम की टीमें रोक लगा रही हैं और बड़े निर्माण पर प्रदूषण नियंत्रण की टीमें रोक लगा रही हैं।
-जयभगवान शर्मा, स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी